कहीं ऑनलाइन चलेगा काम, तो कहीं स्कूल आने का फरमान; भागलपुर में जनगणना कर रहे शिक्षकों की अटेंडेंस पर भ्रम
भागलपुर में जनगणना कार्य में लगे शिक्षकों की उपस्थिति को लेकर शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन के बीच समन्वय की कमी सामने आई है। विभिन्न प्रखंडों में अलग- ...और पढ़ें

जनगणना करते शिक्षक। फोटो जागरण
जागरण संवाददाता, भागलपुर। जिले में दो मई से शुरू हुए जनगणना कार्य को लेकर शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन के बीच समन्वय की कमी अब खुलकर सामने आने लगी है।
जनगणना के लिए बड़ी संख्या में शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति तो कर दी गई है, लेकिन उनकी उपस्थिति (अटेंडेंस) को लेकर अलग-अलग प्रखंडों और नगर निकायों में अलग-अलग निर्देश जारी किए गए हैं। इस विरोधाभास ने शिक्षकों के बीच असमंजस और नाराजगी दोनों बढ़ा दी है।
दरअसल, जनगणना कार्य में लगाए गए प्रगणक और पर्यवेक्षक के रूप में कार्य कर रहे शिक्षकों को लेकर कहीं ‘मार्क आन ड्यूटी’ के जरिए उपस्थिति दर्ज करने का निर्देश दिया गया है, तो कहीं पहले स्कूल में उपस्थित होकर फिर जनगणना कार्य करने की बात कही गई है।
अलग-अलग आदेश
नगर निगम, नगर परिषद नवगछिया, नाथनगर और सबौर प्रखंड के पदाधिकारियों द्वारा जारी पत्र में स्पष्ट कहा गया है कि संबंधित शिक्षक अपने-अपने कार्यक्षेत्र में रहते हुए ‘मार्क ऑन ड्यूटी’ के माध्यम से ही उपस्थिति बनाएंगे।
वहीं दूसरी ओर रंगरा चौक प्रखंड में जारी आदेश में शिक्षकों को सुबह 6:30 बजे से 9:30 बजे तक विद्यालय में उपस्थित रहने के बाद ही जनगणना कार्य में जाने का निर्देश दिया गया है।
एक ही जिले में दो तरह के आदेश लागू होने से शिक्षकों के बीच भ्रम की स्थिति बनी हुई है। शिक्षक संघ से जुड़े प्रतिनिधियों का कहना है कि जब कार्य एक ही है, तो नियम भी एक जैसा होना चाहिए।
शत प्रतिशत शिक्षकों की हुई है प्रतिनियुक्ति
इधर, जिले भर में करीब 14 हजार से अधिक शिक्षकों को जनगणना कार्य में लगाया गया है। इसका सीधा असर स्कूलों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। कई ऐसे विद्यालय हैं जहां लगभग सभी शिक्षक जनगणना में प्रतिनियुक्त हैं, जिससे बच्चों की पढ़ाई बाधित हो रही है।
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अभिभावकों ने भी इस पर चिंता जताई है। मंगलवार को आयोजित वीडियो कान्फ्रेंसिंग में शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव ने राज्यभर के जिला शिक्षा पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि जनगणना कार्य में लगे शिक्षकों की सूची अविलंब उपलब्ध कराई जाए। विभागीय स्तर पर यह माना जा रहा है कि जनगणना के कारण शैक्षणिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है, इसलिए इसकी मानिटरिंग जरूरी है।
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