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    भागलपुर : NGT नियमों का उल्लंघन? वायरल वीडियो में गंगा में निर्माण सामग्री गिराते दिखे कर्मचारी

    Updated: Fri, 30 Jan 2026 03:34 AM (IST)

    भागलपुर में बरारी पुल के पास गंगा नदी में समानांतर पुल निर्माण के दौरान स्टीमर से धूलकण गिराने का वीडियो वायरल हुआ है। यह विक्रमशिला गंगेटिक डॉल्फिन अ ...और पढ़ें

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    भागलपुर के बरारी पुल के पास गंगा नदी में समानांतर पुल निर्माण कार्य के दौरान स्टीमर से गंगा में धूलकण गिराने का वीडियो वायरल

    जागरण संवाददाता, भागलपुर। भागलपुर के बरारी पुल के पास गंगा नदी में चल रहा समानांतर पुल निर्माण कार्य के दौरान स्टीमर से गंगा में धूलकण गिराने का वीडियो वायरल हो रहा है। जो एनजीटी के नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है। वायरल वीडियो में यह कहा जा रहा है कि ऐसा रोजाना होता है, लेकिन अब तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।

    दरअसल यह क्षेत्र विक्रमशिला गंगगेटिक डॉल्फिन अभ्यारण रिजर्व क्षेत्र का हिस्सा है। लगातार ऐसे होने से रिजर्व क्षेत्र का पारिस्थितिकी तंत्र खराब हो सकता है और उसमें रहने वाले डाल्फिन सहित जलीय जीवन के लिए यह खतरनाक साबित हो सकता है। वहीं पुल निर्माण कर रहे एसपी सिंगला कंपनी के पदाधिकारी का दावा है कि यह निर्माण सामग्री नहीं थी।

    • डाल्फिन अभ्यारण में समानांतर पुल निर्माण एजेंसी गंगा में गिरा रही धूलकण
    • स्टीमर से धूलकण गिराने का वीडियो वायरल, बनाने वाले शख्स ने कहा रोजाना किया जाता है ऐसा काम
    • वीडियो वायरल होने के बाद वन विभाग की टीम हुई एक्टिव
    • निर्माण एजेंसी के साइट इंजीनियर को दिए गई अंतिम चेतावनी
    • डीएफओ बोले दोबारा ऐसा हुआ तो होगी कार्रवाई
    • उस क्षेत्र की बढ़ाई जा रही है पेट्रोलिंग
    • विशेषज्ञ बोले क्षेत्र में ऐसा करना गैरकानूनी
    • वन विभाग को करनी चाहिए करवाई
    • यह एनजीटी के नियम का उल्लंघन

    एक पदाधिकारी ने बताया कि समानांतर पुल के पिलर निर्माण के लिए मिक्सर मशीन और निर्माण सामग्री को स्टीमर के माध्यम से नदी के उसपार में ले जाया जा रहा था। यह काम एक निजी एजेंसी को दिया गया है। इसमें गाड़ियों के टायर में लगे धूल जो जमा हो जाता है वह था। उसी की सफाई गलती से नदी में कर दी गई है। जो आगे से नहीं किया जाएगा।

    वहीं वीडियो वायरल होने के बाद गुरुवार को वन विभाग की टीम भी कंस्ट्रक्शन साइट पर पहुंची थी। वन विभाग ने साइट इंचार्ज को तुरंत चेतावनी दी और दोबारा ऐसा करने पर सख्त कार्रवाई करने की बात कही है। वही वन विभाग के पदाधिकारियों ने बताया कि अब रोजाना इस क्षेत्र की पेट्रोलिंग की जाएगी।


    डॉल्फिन अभ्यारण में प्रदूषण पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण के सख्त नियम

    • • गंगा डॉल्फिन अभ्यारण क्षेत्र में किसी भी प्रकार का प्रदूषण पूर्णतः प्रतिबंधित है।
    • • अभ्यारण के भीतर या आसपास मलबा, धूलकण, ठोस कचरा, तेल अथवा अपशिष्ट डालना गैरकानूनी है
    • • नियम उल्लंघन पर दोषी व्यक्ति या एजेंसी पर न्यूनतम पचास हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाता है
    • • गंभीर मामलों में जुर्माने की राशि कई लाख रुपये तक बढ़ाई जा सकती है
    • • जुर्माने की पूरी राशि पर्यावरण संरक्षण और गंगा की बहाली में खर्च की जाती है
    • • गंगा में अनुपचारित अपशिष्ट छोड़ने वाले उद्योगों पर सख्त दंड और बंदी की कार्रवाई का प्रावधान है
    • • डॉल्फिन अभ्यारण संरक्षित क्षेत्र होने के कारण हानिकारक निर्माण गतिविधियों पर रोक है।
    • • अभ्यारण क्षेत्र में अवैध बालू खनन पूरी तरह प्रतिबंधित किया गया है।
    • • जलीय जीवों की सुरक्षा के लिए नौकाओं की गति सीमित रखने के निर्देश हैं।
    • • प्रदूषण रोकने में विफल रहने पर संबंधित विभागों से पर्यावरण क्षतिपूर्ति वसूली जाती है।

     

    निर्माण एजेंसी को गाइडलाइंस के अनुसार कोई भी चीज गंगा नदी में नहीं डालना है। अगर वह ऐसा करती है तो उसका कार्रवाई होगी। वीडियो प्राप्त होने के बाद टीम कंस्ट्रक्शन साइट पर गई थी। साइट इंचार्ज को अंतिम चेतावनी दे दी गई है। अगर फिर ऐसी जानकारी प्राप्त होती है तो कंपनी पर कार्रवाई होगी।

    रिजर्व अभ्यारण क्षेत्र में इस तरह की मनमानी करना गैर कानूनी है। यह डॉल्फिन अभ्यारण क्षेत्र है। गंगा नदी में किसी भी तरह का धूलकण या निर्माण सामग्री गिरना नदी में रहने वाले जलीय जीव के पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को प्रभावित करता है। दरअसल ऊपर से किसी भी तरह के धूलकण पानी में जाने के बाद पानी टर्बिटेड होता है जिससे प्रकाश संश्लेषण की क्रिया प्रभावित होती है। इसी जलीय जीवों का आहार श्रृंखला गड़बड़ हो जाती है। इसकी पूरी तरह से मानिटरिंग होनी चाहिए। साथ ही वन विभाग को इस पर कर एक्शन लेने की जरूरत है।

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    प्रोफेसर एसके चौधरी, डॉल्फिन विशेषज्ञ