कैमल समर कैंप 2026 : कक्षा 5-6 के कमजोर बच्चों के लिए विशेष पढ़ाई, भागलपुर समेत राज्यभर में विशेष अभियान
शिक्षा विभाग ने कक्षा 5 और 6 के कमजोर बच्चों के लिए 'कैमल समर कैंप 2026' शुरू किया है। यह राज्यभर में 1 जून से 30 जून तक चलेगा, जिसका उद्देश्य गतिविधि ...और पढ़ें

कमजोर छात्रों के लिए खास योजना, कैमल समर कैंप से मजबूत होगी बुनियाद
जागरण संवाददाता, भागलपुर। सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले उन बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए शिक्षा विभाग ने विशेष पहल शुरू की है, जो भाषा और गणित की बुनियादी दक्षताओं में कमजोर पाए गए हैं। प्राथमिक शिक्षा निदेशालय के निर्देश पर राज्यभर में कक्षा 5 और 6 के चयनित विद्यार्थियों के लिए ‘कैमल समर कैंप 2026’ का आयोजन किया जाएगा।
यह समर कैंप 1 जून से 30 जून तक गांव और टोला स्तर पर संचालित होगा। इसका मुख्य उद्देश्य बच्चों की पढ़ने, समझने, लिखने और गणना करने की क्षमता को मजबूत करना है, ताकि वे आगे की कक्षाओं में बेहतर प्रदर्शन कर सकें।
गांव और टोला स्तर पर चलेगा विशेष अभियान
यह पूरा कार्यक्रम समुदाय आधारित होगा। हर कैंप में 10 से 15 बच्चों को शामिल किया जाएगा। बच्चों का चयन आकलन उपकरण के माध्यम से किया जाएगा और उनके निवास स्थान के आधार पर कैंप स्थल निर्धारित होगा, ताकि उन्हें पढ़ाई में सुविधा मिल सके।
कैंप प्रतिदिन डेढ़ घंटे संचालित किया जाएगा। इसे छह सप्ताह के विशेष शैक्षणिक ढांचे में विभाजित किया गया है। पहले सप्ताह में बच्चों का मूल्यांकन, नामांकन और समुदाय स्तर पर जागरूकता गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। इसके बाद नियमित शिक्षण गतिविधियों के माध्यम से बच्चों की सीखने की क्षमता को मजबूत किया जाएगा।
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स्वयंसेवकों की बड़ी भूमिका, न्यूनतम आयु 18 वर्ष
इस कार्यक्रम के सफल संचालन के लिए बड़ी संख्या में स्वयंसेवकों की मदद ली जाएगी। सभी मध्य विद्यालयों से कम से कम दो से तीन ऐसे युवाओं का चयन किया जाएगा, जो स्वेच्छा से बच्चों को पढ़ाने के लिए तैयार हों।
इसके अलावा शिक्षा सेवक, तालीमी मरकज कर्मी और अन्य सामाजिक संस्थाओं के स्वयंसेवक भी इस अभियान में भाग ले सकेंगे। स्वयंसेवक की न्यूनतम आयु 18 वर्ष निर्धारित की गई है। साथ ही भाषा और गणित में रुचि तथा स्मार्टफोन संचालन की सामान्य जानकारी होना आवश्यक होगा, ताकि वे डिजिटल रिकॉर्डिंग में भी सहयोग कर सकें।
खेल-खेल में सीखने पर रहेगा विशेष जोर
समर कैंप में केवल पारंपरिक पढ़ाई नहीं होगी, बल्कि गतिविधि आधारित शिक्षण पर विशेष जोर दिया जाएगा। बच्चों को पढ़ने, समझने और अभिव्यक्ति कौशल विकसित करने के अवसर दिए जाएंगे।
बुनियादी गणितीय गतिविधियों के साथ खेल, कहानी सुनाना, चित्रांकन, पोस्टर निर्माण और अन्य रोचक गतिविधियों को भी शामिल किया गया है। विभाग का मानना है कि इस तरह की गतिविधियों से बच्चों में सीखने की रुचि बढ़ेगी और वे पढ़ाई को बोझ नहीं समझेंगे।
अंतिम सप्ताह में होगा पुनर्मूल्यांकन
छह सप्ताह के इस कार्यक्रम के अंतिम सप्ताह में बच्चों का पुनर्मूल्यांकन किया जाएगा। इससे यह पता लगाया जाएगा कि कैंप के दौरान बच्चों की शैक्षणिक क्षमता में कितना सुधार हुआ है।
पहले सप्ताह में जहां आधारभूत मूल्यांकन किया जाएगा, वहीं अंतिम सप्ताह में प्रगति की तुलना कर परिणाम निकाले जाएंगे। इससे कार्यक्रम की प्रभावशीलता का भी आकलन हो सकेगा।
प्रशिक्षण और निगरानी व्यवस्था भी मजबूत
कार्यक्रम के सफल संचालन के लिए जिला रिसोर्स पर्सन, प्रखंड नोडल पर्सन और स्वयंसेवकों को चरणबद्ध प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण के माध्यम से उन्हें बच्चों को पढ़ाने की आधुनिक और सरल तकनीकों की जानकारी दी जाएगी। साथ ही बच्चों की प्रगति का रिकॉर्ड वेब लिंक के माध्यम से ऑनलाइन दर्ज किया जाएगा, ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और व्यवस्थित बनी रहे।
जिला स्तर पर होगी समीक्षा बैठक
समर कैंप शुरू होने से पहले जिला स्तर पर प्रधानाध्यापकों, प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों और संबंधित संस्थाओं के प्रतिनिधियों के साथ बैठक आयोजित की जाएगी। इसमें कैंप की रूपरेखा, जिम्मेदारियां और निगरानी व्यवस्था पर विस्तृत चर्चा होगी।
शिक्षा विभाग का मानना है कि यह पहल कमजोर विद्यार्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर साबित होगी, जिससे वे न केवल अपनी बुनियादी दक्षता सुधार सकेंगे, बल्कि आगे की पढ़ाई के लिए भी आत्मविश्वास हासिल करेंगे।
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