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    भागलपुर में सिपाही से SP तक कटा रहे आवास भत्ता, मौज में हैं सार्जेंट मेजर

    Updated: Sun, 19 Apr 2026 03:39 PM (IST)

    नवगछिया में सार्जेंट मेजर हिमांशु कुमार दो साल से बिना आवंटन के सरकारी आवास में रह रहे हैं, जिससे उनका आवास भत्ता नहीं कट रहा। एसपी राजेश कुमार ने माम ...और पढ़ें

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    प्रस्तुति के लिए इस्तेमाल की गई तस्वीर। (सांकेतिक फोटो)

    कौशल किशोर मिश्र, भागलपुर। सरकारी आवास में रहने वाले सिपाही से लेकर एसपी के वेतन की कुछ राशि आवास भत्ता के रूप में कटता है।

    लेकिन नवगछिया के सार्जेंट मेजर हिमांशु कुमार इसके अपवाद बने हुए हैं। वर्ष 2024 के अप्रैल माह से 2026 में अबतक सरकारी आवास का उपभोग तो कर रहे हैं, लेकिन उक्त आवास का उपभोग करने के बावजूद उनका आवास भत्ता इसलिए नहीं कट रहा कि जिस आवास पर उनका दो सालों से कब्जा है, वह किसी को आवंटित ही नहीं है।

    जबकि सिपाही, जमादार, दारोगा, इंस्पेक्टर, डीएसपी और एसपी तक का आवास भत्ता कट रहा है। चौंकाने वाली बात यह है कि जिस आवास में वह रह रहे हैं वह निर्माण बाद आवंटित ही नहीं हुआ है। लेकिन बिना आवंटित उक्त आवास में बीते दो साल से सार्जेंट मेजर का कब्जा है। वहीं वह रह रहे हैं।

    सरकारी आवास का उपभोग करने के बाद भी आवास भत्ता नहीं कटाए जाने के कारण अबतक करीब डेढ़ लाख रुपये का सरकार को आवास भत्ता मद में नुकसान हो चुका है।

    पुलिसकर्मियों में इस बात को लेकर काफी चर्चा है कि उन्हें आवास भत्ता लग रहा है लेकिन सार्जेंट मेजर पदाधिकारी हैं इसलिए उन्हें सरकारी आवास का उपभोग करने के बाद मात्र इसलिए आवास भत्ता नहीं कट रहा है कि वह आवास अभी तक आवंटित ही नहीं हुआ है।

    क्या है पूरा मामला

    नियम है कि सरकारी क्वार्टर में रहने वाले हर पुलिसकर्मी के वेतन से एचआरए की कटौती होती है। सिपाही, जमादार, दारोगा, इंस्पेक्टर, डीएसपी और एसपी तक सबका एचआरए कट रहा है। लेकिन सार्जेंट मेजर हिमांशु कुमार को इस कटौती से राहत मिली हुई है।

    वे नवगछिया में बने नए आवास में 2024 से रह रहे हैं, पर कागज पर वह क्वार्टर आज भी खाली है। बिना आबंटन के कब्जा जमाए रखने के कारण उनका एचआरए नहीं कट रहा।

    सिपाहियों ने कहा- हमारा तो कट रहा

    पुलिसकर्मियों में एस अपवाद को लेकर रोष है कि सार्जेंट मेजर के आवास भत्ता से राहत मिलने पर 24 महीने में करीब डेढ़ लाख रुपये का नुकसान सरकारी खजाने को सिर्फ एचआरए मद में हो चुका है।

    कई सिपाहियों ने बताया कि हमारा तो कट रहा है, पर पदाधिकारी होने से सार्जेंट मेजर का नहीं कट रहा, क्योंकि कागज पर आवास आवंटित ही नहीं है।

    उठ रहे सवाल

    आवास भत्ता कटाने वाले कई पुलिसकर्मियों ने इस बात को लेकर सवाल उठाया कि उक्त आवास का आबंटन कौन रोक रखा ह। दो साल में क्वार्टर आवंटित क्यों नहीं हुआ।

    जब आबंटन नहीं हुआ तो कब्जा कैसे मिला बिना आवंटन पत्र के सार्जेंट मेजर किसकी अनुमति से उस आवास में शिफ्ट हुए।

    क्या कहता है नियम

    नियम कहता है कि सरकारी आवास में रहने पर एचआरए नहीं मिलता या किराया कटता है। क्या दो साल का बकाया उनसे वसूला जाएगा। सिपाही को क्वार्टर मिलते ही एचआरए बंद हो जाता है, पर यहां उल्टा हो रहा है। गृह विभाग के नियमानुसार सरकारी आवास लेने पर एचआरए देय नहीं होता।

    अगर कोई बिना आवंटन के भी सरकारी भवन में रहता है तो उससे मानक किराया और पेनल्टी वसूली का प्रावधान है। आबंटन न होना, एचआरए बचाने का बहाना नहीं बन सकता।

    पुलिस मुख्यालय स्तर पर कई बार ऐसे मामलों में वसूली के आदेश हुए हैं। पुलिसकर्मियों में नाराजगी है कि छोटे रैंक वालों से तो एक दिन की देरी पर भी रिकवरी हो जाती है, पर पदाधिकारी स्तर पर दो साल से छूट मिल रही है।

    अभी हम नए हैं

    एसपी राजेश कुमार ने पूछे जाने पर कहा कि वह अभी नये हैं, लेकिन उनकी संज्ञान में यह बातें लाई गई है। दरअसल जिस आवास में सार्जेंट मेजर हिमांशु कुमार रह रहे हैं, वह आवास बनने के बाद से किसी को आवंटित ही नहीं हो सकी है।

    उक्त आवास का इस्तेमाल वह कर रहे हैं। एसपी ने कहा कि जब आवास आवंटित ही नहीं है तो आवास भत्ता नहीं कट रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले में लीगल नार्म क्या है, पता कराते हैं।

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