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    BPSC शिक्षकों की बहाली से सुधरी भागलपुर-बांका की शिक्षा, केंद्र की रिपोर्ट में उछले अंक; दोनों जिलों ने चौंका दिया

    Updated: Mon, 13 Jul 2026 05:59 AM (IST)

    बिहार में बीपीएससी शिक्षकों की बंपर बहाली से भागलपुर और बांका जिलों की शिक्षा व्यवस्था में सुधार आया है, जिसे केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की PGI-D रिपोर् ...और पढ़ें

    सरकारी विद्यालयों के शैक्षणिक माहौल और परीक्षाओं के नतीजे हुए बेहतर।

    सरकारी विद्यालयों के शैक्षणिक माहौल और परीक्षाओं के नतीजे हुए बेहतर।

    जागरण संवाददाता, भागलपुर। बिहार में पिछले दो वर्षों के भीतर बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) के माध्यम से रिकॉर्ड स्तर पर की गई शिक्षकों की बंपर बहाली का बड़ा असर अब दिखने लगा है। सरकारी विद्यालयों के शैक्षणिक माहौल और परीक्षाओं के नतीजों में हुए इस क्रांतिकारी सुधार पर अब देश के केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की मुहर भी लग चुकी है। मंत्रालय द्वारा जारी देशव्यापी 'परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स-डिस्ट्रिक्ट' (PGI-D) 2025-26 की ताजा रिपोर्ट में भागलपुर और बांका दोनों जिलों के अंकों में शानदार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। 

    भागलपुर के स्कोर में 8 अंकों का तगड़ा उछाल, बांका भी 2 अंक सुधरा

    पीजीआई-डी रिपोर्ट की सबसे महत्वपूर्ण 'आउटकम' यानी शैक्षणिक परिणाम श्रेणी में सिल्क सिटी भागलपुर ने पिछले वर्ष के मुकाबले 8 अंकों की लंबी छलांग लगाई है। बीते वर्ष 2024-25 में जहां भागलपुर जिला 132 अंकों पर सिमटा था, वहीं इस वर्ष बेहतरीन प्रदर्शन के साथ उसका ग्राफ बढ़कर 140 अंकों पर पहुंच गया है। दूसरी तरफ पड़ोसी जिले बांका ने भी सुधार की रफ्तार जारी रखते हुए अपने पुराने स्कोर 118 से 2 अंकों का इजाफा कर इस बार 120 अंक हासिल किए हैं। 

    10 हजार से अधिक नए शिक्षकों ने संभाली कमान, नियमित हुईं कक्षाएं

    शिक्षा विभाग के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, पिछले दो वर्षों में भागलपुर जिले के सरकारी स्कूलों में करीब 6,500 नए बीपीएससी शिक्षकों ने योगदान दिया है। वहीं बांका जिले के सुदूर ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के स्कूलों में लगभग 4,400 नवनियुक्त बीपीएससी शिक्षकों की विषयवार तैनाती की गई है। इतनी बड़ी संख्या में स्पेशलिस्ट शिक्षकों के आने से स्कूलों में गणित, विज्ञान और अंग्रेजी जैसी कठिन माने जाने वाली कक्षाएं अब रोजाना व्यवस्थित रूप से संचालित हो रही हैं। 

    290 अंकों के कड़े टेस्ट में दोनों जिले अभी 'प्रचेष्टा-2' ग्रेड में शामिल

    विशेषज्ञों के अनुसार, कुल 290 अंकों की इस जटिल 'आउटकम श्रेणी' में बच्चों के सीखने की क्षमता, वास्तविक शैक्षणिक उपलब्धि और वार्षिक परीक्षा परिणामों का गहन मूल्यांकन होता है। शिक्षकों की मेहनत से बच्चों का लर्निंग लेवल सुधरा है, हालांकि आंकड़ों के लिहाज से भागलपुर और बांका दोनों जिले अभी 'प्रचेष्टा-2' ग्रेड में बने हुए हैं। लगातार बढ़ते अंक इस बात का सीधा और सकारात्मक संकेत हैं कि सूबे के सरकारी विद्यालयों में शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार की प्रक्रिया सही दिशा में आगे बढ़ रही है। 

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    बुनियादी सुविधाओं में पिछड़ गया भागलपुर, बांका ने फिर मारी बाजी

    शैक्षणिक स्तर सुधरने के बावजूद रिपोर्ट की दूसरी सबसे महत्वपूर्ण श्रेणी 'इंफ्रास्ट्रक्चर एवं स्टूडेंट एंटाइटलमेंट' (IF & SE) में भागलपुर जिला बुरी तरह पिछड़ गया है। कुल 90 अंकों की इस इंफ्रास्ट्रक्चर परीक्षा में भागलपुर को महज 39 अंक मिले हैं, जबकि बांका जिला 48 अंकों के साथ लगातार दूसरे साल मजबूत स्थिति में कायम रहा। भागलपुर ने पिछले साल के 37 अंकों से केवल 2 अंक का मामूली सुधार किया है, जिससे साफ है कि जिले के सरकारी स्कूलों में भौतिक सुधार की गति बेहद कछुआ रही है। 

    पेयजल, शौचालय और बिजली की कमी ने काटा भागलपुर का नंबर

    समीक्षा रिपोर्ट के अनुसार, इस इंफ्रास्ट्रक्चर श्रेणी के तहत स्कूल भवन की स्थिति, शुद्ध पेयजल, चालू शौचालय, बिजली, लाइब्रेरी और खेल सामग्री का कड़ा मूल्यांकन किया जाता है। इसके अलावा बच्चों को मिलने वाली छात्रवृत्ति, मुफ्त पाठ्यपुस्तक, स्कूल यूनिफॉर्म और मिड-डे मील (मध्यान्ह भोजन) योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को भी परखा जाता है। भागलपुर के कई स्कूलों में बाउंड्री वॉल, दिव्यांग अनुकूल रैंप और भवनों के रखरखाव की भारी कमी पाई गई, जबकि बांका ने इन बुनियादी मानकों पर अपेक्षाकृत काफी बेहतर काम किया है।

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