Friendship Day: मरने के बाद भी नहीं भूले दोस्ती! तस्वीर को गंगा स्नान करा पूरी की कांवड़ यात्रा
दोस्तों ने अपने दिवंगत मित्र छोटू की तस्वीर के साथ कांवड़ यात्रा पूरी की, जो पिछले साल एक दुर्घटना में चल बसे थे। पश्चिम बंगाल के हुगली से आए इन श्रद् ...और पढ़ें

तस्वीर को गंगा में स्नान कराते दोस्त। फोटो जागरण
HighLights
दोस्तों ने दिवंगत मित्र छोटू की तस्वीर संग कांवड़ यात्रा की।
अजगैवीनाथ धाम से देवघर तक की यात्रा में दोस्त को याद किया।
गंगा स्नान और जलाभिषेक में छोटू की तस्वीर को शामिल किया।
जागरण संवाददाता, भागलपुर। आज फ्रेंडशिप डे है। बीते दिनों अजगैवीनाथ धाम में दोस्ती की ऐसी मिसाल देखने को मिली, जिसने हर किसी को भावुक कर दिया। गंगा तट पर कांवरियों की भीड़ के बीच पश्चिम बंगाल के हुगली जिले से आए श्रद्धालुओं का एक समूह अपने साथ एक तस्वीर लेकर चल रहा था। य
ह तस्वीर उनके उस दोस्त की थी, जिसकी पिछले वर्ष आकस्मिक दुर्घटना में मौत हो गई थी। हुगली निवासी विनीत कुमार अपनी टीम का नेतृत्व करते हुए बांग्ला सावन में देवघर जलाभिषेक के लिए अजगैवीनाथ धाम पहुंचे थे। उनके साथियों के हाथ में उनके दिवंगत मित्र छोटू की तस्वीर थी।
विनीत ने बताया कि छोटू पिछले चार वर्षों से उनके साथ कांवर यात्रा पर अजगैवीनाथ से देवघर तक जाता था। इस बार जब यात्रा की योजना बनी तो सभी दोस्तों ने तय किया कि छोटू को पीछे नहीं छोड़ेंगे। सबसे पहले उसकी तस्वीर को गंगा में स्नान कराया गया, फिर विधिवत पूजा-अर्चना कर उसके नाम से भी गंगाजल भरा गया।
छोटू नहीं, लेकिन उसकी यादें हमेशा साथ रहेगी
विनीत ने बताया कि छोटू बेहद मिलनसार स्वभाव का था। हर सुख-दुख में वह सबसे पहले साथ खड़ा रहता था। ऐसे दोस्त के बिना यात्रा अधूरी लग रही थी। इसलिए उसकी तस्वीर को ही अपने साथ लेकर पूरी कांवर यात्रा करने का निर्णय लिया गया। उन्होंने कहा कि तस्वीर साथ होने से ऐसा महसूस हो रहा था कि छोटू आज भी उनके बीच मौजूद है।
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27 जुलाई को बाबा बैद्यनाथ पर किया जलाभिषेक
पूरी श्रद्धा के साथ टीम ने 27 जुलाई को देवघर पहुंचकर बाबा बैद्यनाथ का जलाभिषेक किया। अपने साथ-साथ उन्होंने छोटू के नाम से भी गंगाजल अर्पित किया। यात्रा के दौरान हर पड़ाव पर तस्वीर को सम्मान के साथ रखा गया और उसे अपने साथी की तरह ही स्थान दिया गया।
टीम के सदस्य सुब्रत ने बताया कि वे लोग पिछले चार वर्षों से लगातार देवघर की यात्रा कर रहे हैं। छोटू हर बार उनके साथ रहता था। इस बार उसकी कमी हर पल महसूस हुई, लेकिन उसकी तस्वीर साथ होने से लगा कि वह भी इस आस्था की यात्रा का हिस्सा है।