Kabir Jayanti : आडंबरों पर चोट और सर्वव्यापी ईश्वर, भागलपुर में स्वामी आगमानंद ने समझाया कबीर का गहरा रहस्य
भागलपुर में जिला हिंदी साहित्य सम्मेलन ने संत कबीर की 529वीं जयंती पर एक भव्य गोष्ठी का आयोजन किया। इसमें कबीर के मानवता, प्रेम और भक्ति के विचारों पर ...और पढ़ें

भागलपुर में कबीर के विचारों पर सारगर्भित गोष्ठी, समाज को सुधारने के लिए दिए गए कई बड़े संदेश
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भागलपुर में संत कबीर की 529वीं जयंती पर भव्य गोष्ठी आयोजित।
कबीर के मानवता, प्रेम और भक्ति के विचारों पर गहन चर्चा हुई।
स्वामी आगमानंद ने आडंबरों को त्यागकर ईश्वर की सर्वव्यापकता समझाई।
जागरण संवाददाता, भागलपुर। जिला हिंदी साहित्य सम्मेलन के तत्वावधान में भगवान पुस्तकालय में संत कबीर के अवतरण दिवस पर एक भव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन जगद्गुरु रामानुजाचार्य श्री रामचंद्राचार्य परमहंस स्वामी आगमानंद जी महाराज ने संत कबीर के चित्र पर पुष्पार्चण कर किया। अध्यक्षता प्रो. डॉ. लक्ष्मीश्वर झा ने की, जबकि संचालन दिलीप शास्त्री ने किया। इस गोष्ठी का संयोजन प्रो. डॉ. आनंद कुमार झा 'बल्लो' ने किया ।
कबीर के शब्दों में छिपे हैं जीवन के गहरे रहस्य
कार्यक्रम की शुरुआत आरएसएस के विभाग बौद्धिक शिक्षण प्रमुख हरविन्द नारायण भारती द्वारा 'हे ऋषिवर शत-शत वंदन' गीत के साथ हुई। विशिष्ट अतिथि के रूप में स्वामी जीवनानंद (प्रो. डॉ. ज्योतिन्द्र चौधरी) मौजूद रहे। स्वामी आगमानंद जी महाराज ने कहा कि समय-समय पर समाज की कुरीतियों को मिटाने के लिए कबीर जैसे महापुरुषों का अवतरण होता है। उन्होंने कहा कि आज के दौर में कबीर के शब्दों को समझना किसी रहस्य से कम नहीं है।
दोहे के माध्यम से ईश्वर की सर्वव्यापकता समझाई
स्वामी आगमानंद ने कबीर के कालजयी दोहे 'पाथर पूजे हरि मिलै, तो मैं पूजूं पहार...' की व्याख्या करते हुए इसके आध्यात्मिक अर्थ को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि पत्थर पूजन में भी भगवान मिल सकते हैं, यदि व्यक्ति में सच्चा प्रेम, समर्पण और निष्ठा हो। उन्होंने जोर देकर कहा कि कबीर के अनुसार ईश्वर सर्वव्यापी हैं और सृष्टि के कण-कण में विद्यमान हैं।
आडंबर और दिखावे पर कबीर का तीखा प्रहार
मुख्य अतिथि गीतकार राजकुमार ने अपने विचार रखते हुए कहा कि कबीर ने कभी किसी धर्म पर प्रहार नहीं किया। इसके विपरीत, उन्होंने धर्मों के भीतर पनप चुके आडंबरों और दिखावे पर तीखा आघात कर समाज को सुधारने का प्रयास किया। उनके विचार आज के समय में भी समाज को नई दिशा देने के लिए प्रासंगिक हैं। उन्होंने कहा कि कबीर दास की यह 529वीं जन्म जयंती है।
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गणमान्य लोगों ने व्यक्त किए अपने विचार
गोष्ठी में पंडित ऋषिकेश पाण्डेय, आशीष कुमार झा, सौरभ कुमार, शशिकांत झा और डॉ. विवेक ने कबीर के विचारों पर अपने सारगर्भित विचार रखे। इसके अलावा राजीव कुमार सिंह, संजय कुमार, कुंदन, सुमन सौरभ 'सोनू'और मुन्ना सहित बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी और प्रबुद्धजन उपस्थित थे।
नवगछिया में भी हुई भव्य जयंती गोष्ठी
कबीर दास की जयंती के उपलक्ष्य में केवल भागलपुर शहर ही नहीं, बल्कि आसपास के क्षेत्रों में भी उत्साह देखा गया। श्री शिवशक्ति योगपीठ नवगछिया में भी कबीर दास की जयंती पर एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जहां लोगों ने उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।