Trending

    खरमास 15 मार्च से 14 अप्रैल: विवाह और मांगलिक कार्य रहेंगे स्थगित, जान लें अप्रैल-जुलाई में शुभ मुहूर्त

    Updated: Mon, 09 Mar 2026 02:57 PM (IST)

    इस वर्ष 15 मार्च से 14 अप्रैल तक खरमास रहेगा, जिस दौरान विवाह, गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य स्थगित रहेंगे। सूर्य के मीन राशि में प्रवेश से शुरू होने ...और पढ़ें

    News Article Hero Image
    timer icon

    समय कम है?

    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    जागरण संवाददाता, भागलपुर। सनातन परंपरा में समय केवल घड़ी की सुइयों से नहीं मापा जाता, बल्कि ग्रह-नक्षत्रों की चाल और आकाशीय संकेतों के माध्यम से जीवन के शुभ-अशुभ कार्यों का निर्धारण किया जाता है। इसी अनुशासन में एक ऐसा काल आता है जब शहनाइयों की मधुर धुनें कुछ समय के लिए थम जाती हैं और विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन जैसी मांगलिक गतिविधियों पर विराम लग जाता है। इसे खरमास कहा जाता है।

    इस वर्ष खरमास कब से कब तक?

    तिलका मांझी महावीर मंदिर के पंडित आनंद झा के अनुसार, इस वर्ष 14 मार्च की रात्रि 3 बजकर 07 मिनट पर सूर्य देव मीन राशि में प्रवेश करेंगे। इसके साथ ही 15 मार्च से मीन संक्रांति के साथ खरमास शुरू होगा। इस अवधि में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन और अन्य मांगलिक संस्कार स्थगित रहेंगे। जैसे ही सूर्य देव 14 अप्रैल को मेष राशि में प्रवेश करेंगे, यह विराम समाप्त होगा और विवाह तथा अन्य शुभ कार्यों की शुरुआत फिर से होगी।

    सनातन धर्म में वर्ष में दो बार खरमास आता है। यह समय सांसारिक उत्सवों से अधिक आत्मिक साधना, पूजा-पाठ और दान-पुण्य के लिए उपयुक्त माना जाता है। इस अवधि में भले ही विवाह और अन्य मांगलिक संस्कार स्थगित हों, लेकिन जप, तप, ध्यान और सेवा कार्य जारी रह सकते हैं। धार्मिक दृष्टि से इसे आत्मशुद्धि और ईश्वर भक्ति का श्रेष्ठ काल माना गया है।

    विवाह मुहूर्त और ग्रह-नक्षत्रों का महत्व

    ज्योतिष शास्त्र के अनुसार विवाह के लिए केवल तिथि ही नहीं, बल्कि ग्रह-नक्षत्रों की अनुकूल स्थिति भी जरूरी होती है। शुभ लग्न, उपयुक्त नक्षत्र और मंगलकारी वार मिलकर विवाह के लिए सर्वोत्तम मुहूर्त तय करते हैं।
    विशेष रूप से गुरु और शुक्र ग्रह का विवाह मुहूर्त में महत्वपूर्ण स्थान है। गुरु ग्रह पति का कारक माना जाता है, जबकि शुक्र ग्रह वर की कुंडली में स्त्री का कारक होता है। वैवाहिक जीवन की सुख-समृद्धि के लिए इन दोनों ग्रहों का उदित और शुभ स्थिति में होना अत्यंत आवश्यक माना जाता है।

    परंपरा के अनुसार प्रतिपदा, द्वितीया, तृतीया, पंचमी, षष्ठी, सप्तमी, अष्टमी, दशमी, एकादशी, द्वादशी, त्रयोदशी और पूर्णिमा को विवाह के लिए शुभ तिथियां माना जाता है। वहीं रविवार, सोमवार, बुधवार, गुरुवार और शुक्रवार को मांगलिक कार्यों के लिए अनुकूल दिन होते हैं।

    खरमास समाप्त होने के बाद विवाह के मुहूर्त

    मिथिला पंचांग के अनुसार अप्रैल में 17, 20, 26 और 30 अप्रैल, मई में 1, 6, 8, 10, 13 और जून में 19, 24, 25, 26, 28, 29 जून, जुलाई में 1, 2, 3, 6, 9, 12 जुलाई को विवाह के शुभ मुहूर्त बन रहे हैं।

    बनारसी पंचांग के अनुसार अप्रैल में 15, 16, 20, 21, 25–30 अप्रैल, मई में 1, 3–8, 12, 13 और जून में 19–29 जून, जुलाई में 1, 2, 6–8, 11, 12 जुलाई को विवाह के लिए अनुकूल तिथियां हैं।

    धार्मिक और आध्यात्मिक संदेश

    खरमास का समय केवल बाहरी उत्सवों से विराम देने का नहीं है, बल्कि यह अंदर की शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा पर ध्यान केंद्रित करने का अवसर भी है। इस दौरान व्यक्ति जप, ध्यान, पूजा-पाठ, दान-पुण्य और सेवा कार्यों में अधिक समय दे सकता है। धार्मिक दृष्टि से इसे आत्मशुद्धि का काल माना जाता है, जब मनुष्य सांसारिक कार्यों से हटकर भीतर की शांति और ईश्वर भक्ति की ओर उन्मुख होता है।

    इस प्रकार, खरमास न केवल मांगलिक कार्यों पर विराम लगाता है, बल्कि आध्यात्मिक विकास और धार्मिक अनुशासन का अवसर भी प्रदान करता है। विवाह और अन्य मांगलिक कार्यों के शुभ मुहूर्त ग्रहों की अनुकूल स्थिति और पंचांग के अनुसार ही निर्धारित किए जाते हैं, ताकि वैवाहिक जीवन में सुख, समृद्धि और मंगलकारी ऊर्जा बनी रहे।