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    PGI-D रिपोर्ट: डिजिटल लर्निंग में पिछड़ा कोसी-सीमांचल और पूर्वी बिहार, स्कूल में सुरक्षा की खराब स्थिति

    Updated: Sat, 11 Jul 2026 08:00 AM (IST)

    केंद्र सरकार की PGI-D 2025-26 रिपोर्ट ने पूर्वी बिहार, कोसी और सीमांचल के जिलों में डिजिटल शिक्षा व स्कूल सुरक्षा की कमजोर स्थिति उजागर की है। ...और पढ़ें

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    HighLights

    1. PGI-D रिपोर्ट ने डिजिटल शिक्षा, स्कूल सुरक्षा की कमजोर स्थिति बताई।

    2. पूर्वी बिहार, कोसी-सीमांचल के कोई जिले शीर्ष श्रेणी में नहीं।

    3. सुविधाओं के प्रभावी उपयोग, निगरानी, प्रशिक्षण की कमी मुख्य कारण।

    अभिषेक प्रकाश, भागलपुर। केंद्र सरकार की परफार्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स फार डिस्ट्रिक्ट्स (पीजीआई-डी) 2025-26 रिपोर्ट ने पूर्वी बिहार, कोसी और सीमांचल के जिलों में डिजिटल शिक्षा और स्कूल सुरक्षा की कमजोर स्थिति उजागर कर दी है।

    क्षेत्र के 13 जिलों में से कोई भी जिला शीर्ष श्रेणी में जगह नहीं बना सका। दरअसल जिलों के पिछड़ने की मुख्य वजह स्मार्ट क्लास, आईसीटी लैब, डिजिटल लाइब्रेरी और तकनीक आधारित शिक्षण को बढ़ावा देना नहीं बल्कि उपलब्ध सुविधाओं के प्रभावी उपयोग में कमी, नियमित निगरानी का अभाव, शिक्षकों का तकनीकी प्रशिक्षण कमजोर होना और स्कूल सुरक्षा मानकों के बेहतर क्रियान्वयन में कमी है।

    डिजिटल लर्निंग श्रेणी में मुंगेर 288 अंक के साथ सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाला जिला रहा, जबकि भागलपुर 275 अंक के साथ दूसरे स्थान पर रहा। इसके अलावा लखीसराय को 269, खगड़िया को 260, बांका और सहरसा को 258, मधेपुरा को 257, पूर्णिया को 250, सुपौल को 248, कटिहार को 246 और किशनगंज को 231 अंक मिले। अररिया और जमुई भी प्रचेष्टा-3 श्रेणी में शामिल रहे।

    रिपोर्ट की सबसे चिंताजनक बात यह है कि डिजिटल लर्निंग में भागलपुर, मुंगेर समेत क्षेत्र का कोई भी जिला उत्तम-3, उत्तम-2, उत्तम-1 या उत्कर्ष श्रेणी तक नहीं पहुंच पाया। इससे साफ है कि स्कूलों में डिजिटल संसाधन उपलब्ध कराने के बाद भी उनका प्रभावी उपयोग चुनौती बना हुआ है।

    वहीं स्कूल सेफ्टी एंड चाइल्ड प्रोटेक्शन श्रेणी में भी स्थिति संतोषजनक नहीं रही। इस श्रेणी में भागलपुर और मुंगेर को ही प्रचेष्टा-2 ग्रेड हासिल हुआ। जबकि बांका, जमुई, लखीसराय, खगड़िया, सहरसा, मधेपुरा, सुपौल, अररिया, किशनगंज, पूर्णिया और कटिहार प्रचेष्टा-3 श्रेणी में रहे। रिपोर्ट बताती है कि स्कूलों में सुरक्षित वातावरण, आपदा प्रबंधन, बाल संरक्षण व्यवस्था और डिजिटल शिक्षा की गुणवत्ता में अभी लंबा रास्ता तय करना बाकी है।

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    डिजिटल लर्निंग में मामूली सुधार, अधिकांश जिलों में स्थिति जस की तस

    डिजिटल लर्निंग के क्षेत्र में पूर्वी बिहार और सीमांचल-कोसी के जिलों में अपेक्षित सुधार नहीं हो सका। भागलपुर 13 अंकों के साथ लगातार अपनी स्थिति बनाए हुए है। मुंगेर के अंक 10 से बढ़कर 11, जमुई के 9 से 10, मधेपुरा के 11 से 12, अररिया के 9 से 10 तथा पूर्णिया के 11 से 12 हो गए।

    वहीं बांका (11), लखीसराय (12), खगड़िया (12), सहरसा (12), सुपौल (12), किशनगंज (8) और कटिहार (14) के अंक पिछले वर्ष की तरह ही रहे। यानी अधिकांश जिलों में स्मार्ट क्लास, आईसीटी लैब और डिजिटल संसाधनों पर निवेश के बावजूद प्रदर्शन में बड़ा बदलाव नहीं दिखा।

    स्कूल सुरक्षा में कई जिले फिसले, भागलपुर और कटिहार ने दर्ज किया सुधार

    पीजीआई-डी 2024-25 की तुलना में 2025-26 में स्कूल सेफ्टी एंड चाइल्ड प्रोटेक्शन श्रेणी में कई जिलों का प्रदर्शन कमजोर हुआ है। भागलपुर ने 11 से बढ़कर 13 अंक हासिल किए, जबकि कटिहार ने भी 11 से 14 अंक तक सुधार दर्ज किया। इ

    सके विपरीत बांका के अंक 16 से घटकर 11, मुंगेर के 14 से 13, जमुई के 16 से 14, खगड़िया के 15 से 12, सुपौल के 15 से 13, पूर्णिया के 15 से 13 और किशनगंज के 13 से घटकर 8 रह गए।

    लखीसराय और सहरसा के 12-12 अंक स्थिर रहे, जबकि मधेपुरा (10 से 12) और अररिया (10 से 11) में सुधार हुआ। रिपोर्ट बताती है कि स्कूलों में बाल सुरक्षा और संरक्षण को लेकर कई जिलों में पहले की तुलना में प्रदर्शन कमजोर हुआ है, जिस पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।

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