भरत तिवारी एनकाउंटर: पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने खोली पुलिस के दावों की पोल, 'आत्मरक्षा में फायरिंग' पर उठे सवाल
पुलिस के दावों के विपरीत भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पांच गोलियां लगने का खुलासा हुआ है, जिससे पुलिस की आत्मरक्षा की कहानी पर ...और पढ़ें
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भरत तिवारी एनकाउंटर। फाइल फोटो
HighLights
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भरत को पैर-जांघ में पांच गोलियां लगीं।
पुलिस के आत्मरक्षा में फायरिंग के दावों पर सवाल उठे।
न्यायिक जांच और मानवाधिकार आयोग मामले की पड़ताल करेगा।
जागरण संवाददाता, आरा। भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में 17 जून को हुए भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर प्रकरण में पोस्टमार्टम रिपोर्ट के सामने आने के बाद कई नए सवाल खड़े हो गए हैं।
प्राथमिकी में एसटीएफ जवान द्वारा आत्मरक्षा में चार राउंड फायरिंग किए जाने और भरत भूषण तिवारी को गोली लगने दावा किया गया है। वहीं, तत्कालीन थानाध्यक्ष राजेश मालाकार द्वारा भी एक राउंड फायरिंग का उल्लेख है, हालांकि उस गोली के लगने का जिक्र नहीं किया गया है।
दूसरी ओर, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भरत के पैर एवं जांघ के हिस्से में कुल पांच गोली लगने का उल्लेख है। ऐसे में प्राथमिकी में दर्ज घटनाक्रम और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बीच अंतर को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
आत्मरक्षा में इतनी गोलियां?
मुठभेड़ में शामिल पुलिसकर्मियों को न्यायिक जांच और राज्य मानवाधिकार आयोग की जांच के दौरान इन बिंदुओं पर जवाब देना पड़ सकता है। सबसे बड़ा सवाल तो यह उठेगा कि यह कैसी मुठभेड़ थी, जिसमें तड़ातड़ आत्मरक्षा में इतनी गोलियां मारी गईं। वैसे मृतक की मां आशा देवी के बयान पर हुई प्राथमिकी में पांच गोली मारे जाने का जिक्र है।
इधर, पुलिस का कहना है कि भरत भूषण तिवारी ने पुलिस टीम पर फायरिंग की थी, जिसके बाद आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई की गई। इसी कार्रवाई में वह घायल हुआ और बाद में उसकी मौत हो गई।
हालांकि आत्मरक्षा में कितनी गोलियां चलाई गईं, किन-किन ने फायरिंग की, किन परिस्थितियों में बल प्रयोग किया गया और क्या मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) का पालन हुआ, यह अब जांच का प्रमुख विषय होगा।
पुलिस एनकाउंटर के बाद हुई थी भरत तिवारी की मौत
उल्लेखनीय है कि मुठभेड़ में घायल भरत भूषण तिवारी का सदर अस्पताल, आरा में प्राथमिक उपचार करने वाले चिकित्सकों ने भी प्रारंभिक परीक्षण के दौरान चार-पांच गोलियां लगने की बात कही थी। गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे पीएमसीएच रेफर किया गया था, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
सूत्रों के अनुसार, न्यायिक जांच में यह भी देखा जाएगा कि पुलिस द्वारा की गई फायरिंग परिस्थितियों के अनुरूप थी या नहीं तथा बल प्रयोग की आवश्यकता कितनी थी। राज्य मानवाधिकार आयोग भी पूरे घटनाक्रम, पुलिस कार्रवाई और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करेगा।
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पुलिस की कहानी में भरत की चलाई गोली बोनट पर लगी
पुलिस की प्राथमिकी के अनुसार, पुलिस टीम द्वारा पीछा किए जाने पर भरत ने फायरिंग की, जिसमें एक गोली थाना के सरकारी वाहन के बोनट पर लगी।
पुलिस का दावा है कि कई बार आत्मसमर्पण की चेतावनी देने के बावजूद वह फायरिंग करता रहा। इस दौरान तत्कालीन थानाध्यक्ष ने एक राउंड फायरिंग की।
प्राथमिकी के अनुसार, भरत एक हाथ में मोबाइल और दूसरे हाथ में पिस्टल लिए हुए था। उसने एक बार पिस्टल फेंक दी, लेकिन जब एक जवान हथियार उठाने आगे बढ़ा तो उसने दोबारा पिस्टल उठा ली और पुलिस पर दो राउंड फायरिंग कर दी।
इसके बाद एसटीएफ जवान अक्षय ने आत्मरक्षा में कमर के नीचे चार राउंड फायरिंग की, जिसमें गोली लगने से वह गिर पड़ा। पुलिस ने घटनास्थल से दो खोखा, एक देसी पिस्टल, एक मैगजीन और दो कारतूस बरामद करने का दावा किया है। इसे पूरे प्रकरण में जांच के लिए तत्कालीन थानाध्यक्ष, एसटीएफ जवान की सर्विस पिस्टल एवं आरोपित की देसी पिस्टल जब्त है।
13 जुलाई को राज्य मानवाधिकार आयोग में होगी सुनवाई
राज्य मानवाधिकार आयोग ने इस मामले में चार सप्ताह का समय देते हुए अगली सुनवाई की तिथि 13 जुलाई निर्धारित की है। मुठभेड़ को लेकर पुलिस की ओर से दो अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज की गई हैं।
जांच एजेंसियां एफआईआर, घटनास्थल से मिले साक्ष्य, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, बैलिस्टिक जांच और संबंधित पुलिसकर्मियों के बयानों के आधार पर पूरे प्रकरण की समीक्षा करेंगी।
उधर, मुठभेड़ को लेकर पहले से ही विवाद बना हुआ है। मृतक के स्वजन पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठा रहे हैं। ऐसे में न्यायिक जांच और राज्य मानवाधिकार आयोग की पड़ताल इस चर्चित मामले की सच्चाई सामने लाने में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।