जमुई में NH-333A पर पुलिया धंसी, मुख्यालय से टूटा सिमुलतला का संपर्क
जमुई में राष्ट्रीय राजमार्ग-333-ए पर एक पुलिया धंसने से सिमुलतला का जिला मुख्यालय से संपर्क टूट गया है। ...और पढ़ें
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घोरपारन जंगल के समीप धंसी सड़क। (जागरण)
HighLights
एनएच-333-ए पर कटोरवा पुलिया अचानक धंस गई।
सिमुलतला का जिला मुख्यालय से संपर्क पूरी तरह बाधित।
स्थानीय लोगों ने विभागीय लापरवाही पर गहरा आक्रोश जताया।
संवाद सूत्र, सिमुलतला(जमुई)। एक तरफ देश में एक्सप्रेस-वे और आधुनिक सड़कों का निर्माण हो रहा है, वहीं जमुई का राष्ट्रीय राजमार्ग-333-ए विभागीय लापरवाही और बदहाल व्यवस्था की कहानी बयां कर रहा है।
गुरुवार को घोरपारन जंगल के समीप स्थित कटोरवा पुलिया अचानक धंस गई, जिससे सिमुलतला का जिला और प्रखंड मुख्यालय से संपर्क पूरी तरह बाधित हो गया।
गनीमत रही कि जिस समय पुलिया धंसी, उस वक्त उस पर कोई बड़ा वाहन नहीं था, अन्यथा बड़ा हादसा हो सकता था। स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिया की जर्जर स्थिति को लेकर कई बार खबरें प्रकाशित की गई थीं और विभागीय अधिकारियों को आगाह भी किया गया था, लेकिन समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
ग्रामीणों ने बताया कि वर्ष 2014 में इस सड़क को राष्ट्रीय राजमार्ग का दर्जा मिला था, लेकिन 12 वर्ष बीत जाने के बाद भी सड़क और पुल-पुलियों की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ।
बड़े वाहनों की आवाजाही बंद
पुलिया धंसने के बाद बड़े वाहनों की आवाजाही पूरी तरह बंद कर दी गई है, जबकि छोटे वाहन जान जोखिम में डालकर गुजर रहे हैं। इस घटना का असर अब दैनिक जीवन पर भी पड़ने लगा है।
बांका और देवघर की ओर से आने वाली फल, सब्जी और अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित हो गई है। मरीजों, छात्रों और रोजमर्रा के यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय ग्रामीणों ने आक्रोश जताते हुए कहा कि यह सड़क अब हादसों का रास्ता बन चुकी है। लोगों का आरोप है कि टेंडर और निर्माण प्रक्रिया में लगातार लापरवाही बरती जा रही है, जिसका खामियाजा आम जनता भुगत रही है।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही युद्धस्तर पर पुलिया निर्माण और सड़क मरम्मत कार्य शुरू नहीं किया गया तो वे उग्र आंदोलन करने को बाध्य होंगे।
इस बाबत सहायक अभियंता मोनिका ने मंत्री की बैठक का हवाला देकर पल्ला झाड़ लिया और दूसरे नंबर पर बात करने को कहकर फोन काट दिया। दोबारा संपर्क करने पर कोई जवाब नहीं मिला।
वहीं, कनीय अभियंता सीता देवी से संपर्क करने की बार-बार कोशिश की गई, लेकिन उनका फोन नहीं उठा।
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