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    मधेपुरा में 80 वर्षीय बुजुर्ग की अनोखी श्रद्धा, सड़कों से एक-एक ईंट चुनकर खड़ा किया हनुमान मंदिर

    Updated: Thu, 11 Jun 2026 02:25 AM (IST)

    मधेपुरा के उदाकिशुनगंज में 80 वर्षीय रघु मंडल अपनी खराब आर्थिक व शारीरिक स्थिति के बावजूद एक हनुमान मंदिर का निर्माण कर रहे हैं। उन्होंने एक साल से ईं ...और पढ़ें

    रघु मंडल और तैयार हो रहा मंदिर। फोटो जागरण

    रघु मंडल और तैयार हो रहा मंदिर। फोटो जागरण

    HighLights

    1. 80 वर्षीय रघु मंडल मधेपुरा में हनुमान मंदिर बना रहे हैं।

    2. एक साल से ईंटें जमा कर मंदिर की दीवार खड़ी की।

    3. पेंशन के पैसों से बालू-सीमेंट का इंतजाम कर रहे हैं।

    संवाद सूत्र, उदाकिशुनगंज (मधेपुरा)। उदाकिशुनगंज नगर परिषद क्षेत्र के वार्ड संख्या छह डोहटबारी निवासी 80 वर्षीय बुजुर्ग रघु मंडल का आस्था के प्रति ऐसा जुनून है कि एक-एक ईंट जुटाकर दीवार खड़ी कर चुके हैं। एक साल से सड़क किनारे, गली, मुहल्ले अन्य जगहों पर फेंके ईंट को चुनकर जमा किया करते हैं।

    जब लोग उनसे पूछते कि ईंट क्यों चुन रहे हैं और इसे जमा कर क्या करेंगे तो वहे बस एक ही बात कहा करते कि मंदिर बनाउंगा। खुद के खाने और रहने का ठिकाना नहीं लेकिन हनुमान मंदिर बनाने का जुनून ऐसा कि ईंट की दीवार खड़ी कर चुके हैं। दीवार खड़ी हुई तो लोगों को रघु की बात समझ में आने लगी।

    तन और धन से कमजोर, लेकिन मन में श्रद्धा

    दरअसल उदाकिशुनगंज नगर परिषद क्षेत्र अंतर्गत पटेल चौक से डोहटवारी जाने वाली सड़क के कला भवन के पीछे मोड़ के पास एक पीपल का वृक्ष है। ठीक उसके बगल में मंदिर की दीवार खड़ी की गई है।

    रघु मंडल अपनी कमजोर आर्थिक स्थिति और खराब स्वास्थ्य के बावजूद इस काम में लगे हुए हैं। वह सार्वजनिक स्थान पर हनुमान मंदिर का निर्माण करा रहे हैं। उनके इस प्रयास की इलाके में खूब सराहना हो रही है।

    स्थानीय लोगों ने बताया कि रघु मंडल आर्थिक रूप से काफी कमजोर हैं और अपने खर्च का इंतजाम खुद करते हैं। वे बीमारी से भी पीड़ित हैं, जिस कारण उन्हें चलने-फिरने में परेशानी होती है। बावजूद उन्होंने मंदिर निर्माण की ठान रखी है।

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    पेंशन के पैसे सें मंगाई बालू-सीमेंट

    रघु मंडल बताते हैं कि तीन दशक पूर्व उन्होंने अपने एक दोस्त के साथ मिलकर पीपल का पौधा लगाया था, जो अब विशाल वृक्ष का रूप ले चुका है। वह पहले रिक्शा चलाते थे। अस्वस्थता और उम्र के हिसाब से रिक्शा चलाना छोड़ दिया।

    पेंशन की राशि से गुजर बसर कर रहे और उसी में से कुछ रुपये मंदिर निर्माण के लिए बचा कर रखते हैं। मंदिर के लिए उसने ईंट चुनकर जमा किए। थोड़ी-थोड़ी बालू और सीमेंट लोगों से मांगकर जमा किए। पेंशन के पैसे राजमिस्त्री को दिए। हालांकि का मंदिर का निर्माण कार्य अभी पूरा नहीं हुआ है। छत ढलाई के लिए कुछ और समय लगेगा।

    ग्रामीणों ने की सराहना 

    प्राइवेट शिक्षक शिक्षक प्रभाष यादव कहते हैं कि वह बगल में रहते हैं। आर्थिक परेशानी और बीमारी के बावजूद वे जिस लगन से मंदिर बनवा रहे हैं, वह समाज के लिए एक मिसाल है। युवाओं को उनसे सीख लेनी चाहिए।

    ग्रामीणों का कहना है कि जिस उम्र में लोग आराम करना चाहते हैं, उस उम्र में रघु मंडल समाज और धर्म के लिए एक अच्छा काम कर रहे हैं। उनका यह प्रयास लोगों को मेहनत, श्रद्धा और दृढ़ संकल्प का संदेश देता है। 

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