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    राज्यकर्मी बने 12000 शिक्षक अब भी शहरी HRA से वंचित, दो तरह की नीति पर उठे सवाल

    By Ajit Kumar Edited By: Ajit kumar
    Updated: Sun, 18 Jan 2026 04:55 PM (IST)

    Bihar teachers HRA issue: 12,000 राज्यकर्मी शिक्षक शहरी गृह किराया भत्ता (HRA) से वंचित हैं, जिससे उनके वेतन में भारी अंतर आ रहा है। शिक्षा विभाग की अ ...और पढ़ें

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    Bihar education department news: समान पद पर कार्यरत शिक्षकों के वेतन में भारी अंतर बना हुआ है। फाइल फोटो

    जागरण संवाददाता, मुजफ्फरपुर। Bihar teachers HRA issue: बिहार में नियोजन से राज्यकर्मी बने करीब 12 हजार शिक्षक अब तक शहरी गृह किराया भत्ता (HRA) से वंचित हैं। शिक्षा विभाग की अनियमित एचआरए व्यवस्था के कारण समान वेतनमान और समान पद पर कार्यरत शिक्षकों के वेतन में भारी अंतर बना हुआ है।

    कई बार शिकायत के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हो सका है, जिससे शिक्षकों में गहरी नाराजगी है। शिक्षा विभाग के नियमों में शहरी क्षेत्र में पदस्थापित शिक्षकों को एचआरए देने का स्पष्ट प्रावधान है, इसके बावजूद बड़ी संख्या में शिक्षक इस सुविधा से वंचित हैं।

    इससे न केवल उनका मासिक वेतन प्रभावित हो रहा है, बल्कि वर्षों के एरियर का भी नुकसान उठाना पड़ रहा है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि यह स्थिति समान काम, समान वेतन के संवैधानिक सिद्धांत के खिलाफ है।

    एक ही विद्यालय में दो तरह का एचआरए

    मामले को लेकर तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के विधान पार्षद वंशीधर ब्रजवासी ने सरकार की दोहरी नीति पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने इस संबंध में अपर मुख्य सचिव (शिक्षा विभाग) को पत्र भेजकर स्पष्ट नीति लागू करने की मांग की है।

    विधान पार्षद ने पत्र में कहा है कि एक ही विद्यालय में कार्यरत शिक्षकों को दो अलग-अलग तरह का आवास भत्ता दिया जा रहा है। पूर्व से कार्यरत शिक्षकों को शहरी एचआरए मिल रहा है, जबकि उसी विद्यालय में नव पदस्थापित विद्यालय अध्यापकों और विशिष्ट शिक्षकों से दूरी प्रमाण-पत्र की मांग की जा रही है।

    नवगठित निकाय भी बने परेशानी की वजह

    नवगठित नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायतों के परिसीमन के बाद कई विद्यालय शहरी क्षेत्र में आ चुके हैं, लेकिन वहां कार्यरत शिक्षकों को आज भी ग्रामीण क्षेत्र के अनुरूप आवास भत्ता ही दिया जा रहा है। जब ऐसे शिक्षक शहरी एचआरए का दावा करते हैं, तो उनसे दूरी प्रमाण-पत्र की बाध्यता लगा दी जाती है।

    विधान पार्षद की प्रमुख मांगें-

    • पूरे राज्य में नगर निकायों की परिसीमा को लेकर स्पष्ट आदेश जारी किए जाएं
    • जहां पहले से शहरी एचआरए दिया जा रहा है, वहां नव पदस्थापित शिक्षकों से दूरी प्रमाण-पत्र की शर्त समाप्त की जाए
    • एक ही विद्यालय में सभी शिक्षकों को समान आवास भत्ता दिया जाए।

    मनोबल और कार्यक्षमता पर प्रभाव

    शिक्षकों का कहना है कि शहरी क्षेत्रों में बढ़ते किराये के बीच बिना एचआरए के जीवन यापन करना कठिन होता जा रहा है। इससे उनके मनोबल और कार्यक्षमता पर भी असर पड़ रहा है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, एचआरए से जुड़े प्रावधानों की समीक्षा की जा रही है और जल्द ही इस पर निर्णय लिया जा सकता है।

    टीचर्स को हो रहा ये नुकसान

    1. समान रैंक के बावजूद वेतन में अंतर
    2. शहरी इलाकों में किराये का अतिरिक्त आर्थिक बोझ
    3. वर्षों के एरियर से वंचित
    4. मनोबल और कार्यक्षमता पर प्रतिकूल असर