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    बिहार का पहला मॉडर्न मोक्षधाम: आदियोगी शैली की शिव प्रतिमा, कैंटीन-वेटिंग हॉल और ऑनलाइन बुकिंग

    Updated: Thu, 26 Feb 2026 08:40 AM (IST)

    पटना के बांस घाट पर बिहार का पहला आधुनिक श्मशान घाट 89.40 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हुआ है। यह 4.5 एकड़ में फैला है, जिसमें 42 फीट ऊंचे 'मोक्ष द्वा ...और पढ़ें

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    बिहार का पहला आधुनिक श्मशान घाट 89.40 करोड़ रुपये की लागत से तैयार

    जागरण संवाददाता, पटना। Patna Smart City और Bihar Urban Infrastructure Development Corporation की पहल पर पटना के बांस घाट में बिहार का पहला मॉडर्न श्मशान घाट तैयार हुआ है। करीब 4.5 एकड़ में फैले इस परिसर का निर्माण 89.40 करोड़ रुपये की लागत से हुआ है। यह पुरानी 1.24 एकड़ की व्यवस्था से लगभग तीन गुना बड़ा है। डिजाइन में पारंपरिक आस्था और आधुनिक सुविधाओं का संतुलन दिखता है। पूरा परिसर सुव्यवस्थित, हरित और तकनीक-संपन्न बनाया गया है। राजधानी पटना के लिए यह एक बड़ी शहरी उपलब्धि मानी जा रही है।

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    42 फीट ऊंचे ‘मोक्ष द्वार’ और ‘वैकुंठ द्वार’

    श्मशान घाट में प्रवेश के लिए दो भव्य द्वार बनाए गए हैं - मोक्ष द्वार और वैकुंठ द्वार। दोनों द्वार 42 फीट ऊंचे हैं, जिनमें एक प्रवेश और दूसरा निकास के लिए है। द्वारों पर कांसे से बना ‘ॐ’ का प्रतीक स्थापित किया गया है।

    इन्हें जालंधर के कारीगरों ने तैयार किया है। दूर से ही इन द्वारों की भव्यता ध्यान आकर्षित करती है। यह संरचना आध्यात्मिकता और आधुनिक वास्तुकला का अनूठा उदाहरण है।

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    एक साथ 18 अंतिम संस्कार की सुविधा

    नए परिसर में एक साथ 18 शवों के अंतिम संस्कार की व्यवस्था है। 4 इलेक्ट्रिक ओवन, 6 सेमी-इलेक्ट्रिक और 8 पारंपरिक चिताएं बनाई गई हैं।
    इलेक्ट्रिक ओवन गुजरात से मंगाए गए हैं।

    इनमें 15–20 मिनट में दाह-संस्कार संभव है। पारंपरिक वुड क्रीमेशन में भी कम लकड़ी की खपत होती है। धुएं के नियंत्रण के लिए आधुनिक चिमनी सिस्टम लगाया गया है।

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    90% कम प्रदूषण, हरित परिसर

    इलेक्ट्रिक शवदाहगृह पारंपरिक लकड़ी की तुलना में 90% कम प्रदूषण फैलाते हैं। पूरे परिसर में करीब 12 हजार पेड़-पौधे लगाए गए हैं। ये पौधे आंध्र प्रदेश से मंगाए गए हैं।

    परिसर को हराभरा और शांत वातावरण देने पर विशेष ध्यान दिया गया है। जेपी गंगा पथ (मरीन ड्राइव) की ओर विशेष व्यू-कटर फ्रेम लगाए गए हैं।
    दीवारों पर ‘ॐ’ और त्रिशूल के आकर्षक स्टील फ्रेम सजाए जा रहे हैं।

    आदियोगी की तर्ज पर शिव प्रतिमा

    परिसर के दो तालाबों के बीच 12 फीट ऊंची शिव प्रतिमा स्थापित की गई है। यह प्रतिमा Adiyogi Shiva Statue की तर्ज पर तैयार की गई है।
    15 फीट ऊंचे त्रिशूल के साथ शिव की जटाओं से गंगा प्रवाहित होती दिखाई देती है।

    फाइबर मटेरियल से बनी इस प्रतिमा को जालंधर के कारीगरों ने गढ़ा है। रात में विशेष लाइटिंग से यह परिसर आध्यात्मिक आभा बिखेरता है। आने वाले लोगों को यहां शांति और श्रद्धा का अनुभव होता है।

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    अस्थि विसर्जन के लिए विशेष तालाब

    अस्थि विसर्जन और स्नान के लिए दो अलग-अलग तालाब बनाए गए हैं। एक तालाब 45 मीटर और दूसरा 65 मीटर लंबा है। दो किलोमीटर लंबी पाइपलाइन से गंगा जल सीधे इन तालाबों में आता है।

    इससे गंगा नदी को प्रदूषण से बचाने में मदद मिलेगी। लोग धार्मिक आस्था के साथ यहीं विसर्जन कर सकेंगे। यह व्यवस्था पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अहम कदम है।

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    दीवारों पर जीवन यात्रा की झलक

    श्मशान घाट की दीवारों पर जीवन और मृत्यु की कहानी चित्रित की गई है। जन्म से लेकर कर्म और स्वर्ग-नरक के मार्ग तक का दृश्यांकन किया गया है। शांति और सत्य के संदेश लिखे गए हैं।

    राजा हरिश्चंद्र की कथा भी उकेरी गई है। यह चित्रांकन शोकाकुल परिवारों को धैर्य और प्रेरणा देता है। पूरे परिसर को सांस्कृतिक और आध्यात्मिक स्वरूप दिया गया है।

    ऑनलाइन बुकिंग और आधुनिक सुविधाएं

    Patna Municipal Corporation की वेबसाइट से ऑनलाइन स्लॉट बुकिंग की सुविधा उपलब्ध है। व्हाट्सएप चैटबोट (9264447449) के जरिए भी टिकट आईडी जनरेट की जा सकती है। मुक्ति रथ की बुकिंग और डेथ सर्टिफिकेट के लिए आवेदन भी यहीं से संभव है।

    परिजनों की सहायता के लिए हेल्प डेस्क टीम तैनात रहेगी। लंबी कतार और अव्यवस्था से राहत मिलेगी। डिजिटल सुविधा से अंतिम संस्कार की प्रक्रिया अधिक सरल होगी।

    बिहार में बन रहे 40 आधुनिक शवदाह गृह

    राज्यभर में अत्याधुनिक तकनीक से 40 शवदाह गृह बनाए जा रहे हैं। इनमें से 20 का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। उत्तर बिहार के 12 और दक्षिण बिहार के 8 जिलों में काम समाप्त हुआ है।

    इनका सौंदर्यीकरण अंतिम चरण में है। सभी जगह इलेक्ट्रिक और पारंपरिक दोनों सुविधाएं होंगी।बांस घाट का मॉडल पूरे बिहार के लिए उदाहरण बन रहा है।

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