सुबह लहसुन, तांबे का पानी और धूप; आयुर्वेदाचार्य ने बताया सेहत का सरल मंत्र, मौसम बदलते ही ऐसे रखें सेहत दुरुस्त
Halo Jagran: मौसम बदलने पर होने वाली बीमारियों से बचाव के लिए आयुर्वेदिक विशेषज्ञ डॉ. शिवादित्य ठाकुर ने सरल उपाय बताए। उन्होंने 'हेलो जागरण' कार्यक्र ...और पढ़ें

आयुर्वेद आधारित जीवनशैली बचाएगी बीमारियों से। सांकेतिक तस्वीर
जागरण संवाददाता, पटना। मौसम अब परिवर्तन की दिशा में है। ठंड विदा लेने लगी है और वसंत का आगमन हो चुका है।
इस संक्रमण काल में अक्सर लोग लापरवाही बरतते हैं, जिसका नतीजा यह होता है कि मौसमी बीमारियां शरीर को अपनी चपेट में ले लेती हैं। इस दौरान सांस संबंधी समस्याएं, साइनस, सॅर्दी-खांसी और अन्य रोग अधिक परेशान करते हैं।
इनसे बचाव के लिए ठंड से सतर्क रहना और आहार-विहार में आवश्यक बदलाव करना जरूरी है। यह जानकारी रविवार को दैनिक जागरण के लोकप्रिय कार्यक्रम ‘हेलो जागरण’ में राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज एवं अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डाॅ. शिवादित्य ठाकुर ने दी।
उन्होंने बताया कि सुबह दो-चार जवा लहसुन चबाकर ताम्रपात्र में रखा गुनगुना पानी पीना लाभकारी है। धूप उपलब्ध होने पर सरसों तेल से मालिश कर 20 मिनट धूप में बैठना चाहिए।
इससे कफ की प्रवृत्ति दूर होती है, विटामिन-डी मिलता है और शरीर में ऐंठन की समस्या नहीं होती। तुलसी, काली मिर्च, दालचीनी और अदरक का काढ़ा पीना चाहिए।
रात में दूध में हल्दी मिलाकर सेवन करने से रोग प्रतिरोधक क्षमता बनी रहती है। सोने से पहले तलवों, हथेलियों और कपाल पर सरसों तेल की मालिश भी लाभकारी होती है।
यदि इन उपायों से लाभ न मिले तो नारदीय लक्ष्मी विलास रस, महामृत्युंजय रस और त्रिसुन टैबलेट का सेवन किया जा सकता है।
अधिक परेशानी होने पर सितोपलादि चूर्ण और अभ्रक भस्म पान पत्ते के रस व शहद के साथ लेने की सलाह दी गई। छोटे बच्चों में ज्वर के साथ समस्या होने पर रसपिप्पली उपयोगी बताई गई।
कार्यक्रम के दौरान पाठकों द्वारा पूछे गए सवालों पर डाॅ. ठाकुर ने विस्तार से उपचार बताए। प्रस्तुत हैं चुनिंदा प्रश्न-उत्तर—
प्रश्न: बावासीर के मरीज हैं, कब्ज बनी रहती है। क्या करें? – श्याम नारायण तिवारी, कंकड़बाग
उत्तर: बावासीर का मुख्य कारण कब्ज है। सबसे पहले कब्ज दूर करना जरूरी है। पथ्यादि काढ़ा और अविपत्तिकर चूर्ण सुबह-शाम एक-एक चम्मच लें। ओल का चूर्ण मठा के साथ सेवन करें। अर्शकुठार रस दो-दो गोली सुबह-शाम जल के साथ लें। भोजन के बाद अभ्यारिष्ट का सेवन लाभकारी है। मठ्ठा, जीरा और हींग का छौंक भी उपयोगी है। रक्तस्राव होने पर बोलबद्ध रस शहद के साथ तथा दूर्वा का रस देने से शीघ्र लाभ मिलता है। जंक फूड से बचें और संतुलित आहार लें।
प्रश्न: साइनस की समस्या रहती है, क्या उपाय करें? – उत्सव कुमार, दीघा
उत्तर: साइनस के कारणों से स्वयं को दूर रखें। ठंड, फ्रिज की चीजें, धूल और तेज धूप से बचें। बाहर निकलते समय मास्क पहनें।
नारदीय लक्ष्मी विलास रस दो-दो गोली दिन में तीन बार तुलसी पत्ते में लपेटकर लें। षडबिंदु तेल नाक में सुबह-शाम चार-चार बूंद डालें। सेप्टिलीन टैबलेट, मृत्युंजय रस और गिलोय टैबलेट भी लाभकारी हैं।
प्रश्न: चलने में घुटनों में दर्द रहता है, साथ में कब्ज भी है। – मनोज शर्मा, विक्रम
उत्तर: आयुर्वेद के अनुसार कब्ज अनेक रोगों की जड़ है। पाचन ठीक न होने पर ‘आम रस’ बनता है, जिससे जोड़ों का दर्द होता है। अविपत्तिकर या त्रिफला चूर्ण सुबह-शाम लें।
महायोगराज गुग्गुल, त्रयोदशांग गुग्गुल और सूजन होने पर शोथारी मंडूर का सेवन करें। घुटनों पर महाविषगर्भ और महामाष तेल से मालिश करें। बालू, सेंधा नमक, अजवाइन और लहसुन की पोटली से सिंकाई करें।
प्रश्न: सीढ़ी चढ़ने पर हांफने लगते हैं, दमा की शिकायत है। – सूर्यदेव मिस्त्री, बिहटा (राघोपुर)
उत्तर: सितोपलादि चूर्ण, अभ्रक भस्म, श्वास चिंतामणि रस और श्वास कुठार रस पान पत्ते के रस के साथ लें। वसावलेह और कनकासव भी दमा में लाभकारी हैं।
इन्होंने भी पूछे सवाल
जनार्धन शर्मा (नौबतपुर), अवधेश कुमार गुप्ता (पुनपुन), रमेश कुमार (बाढ़), अरविंद रजक (सिपारा), नरेंद्र कुमार सिंह (मसौढ़ी), राम रतन प्रसाद (दानापुर), मुकेश मिश्रा (फुलवारी)।
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