Trending

    loading ads...
    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    पीएमसीएच में सांस-फेफड़ा रोगियों को अब मिलेगा तुरंत उपचार, 24 घंटे रेस्पिरेटरी इमरजेंसी शुरू

    Updated: Fri, 17 Apr 2026 12:00 AM (IST)

    राजधानी पटना में बढ़ते प्रदूषण और मौसम बदलाव के कारण श्वास रोगियों की संख्या में वृद्धि हुई है। इसी को देखते हुए पीएमसीएच ने अब 24 घंटे रेस्पिरेटरी इम ...और पढ़ें

    News Article Hero Image

    पीएमसीएच

    जागरण संवाददाता, पटना। राजधानी में बढ़ते प्रदूषण व मौसम के उतार-चढ़ाव के कारण श्वास रोगियों की संख्या तेजी से बढ़ी है। कई बार अचानक इन लोगों को इमरजेंसी में भर्ती कराने से लेकर आइसीयू तक की जरूरत पड़ जाती है। पीएमसीएच ने श्वास रोगियों को राहत देने के लिए बुधवार से 24 घंटे रेस्पिरेटरी (श्वसन) इमरजेंसी सेवा शुरू की है। इससे टीबी, अस्थमा व अन्य गंभीर सांस रोगों से पीड़ित मरीजों को बिना देरी इलाज मिल सकेगा। 

    यह जानकारी अधीक्षक डॉ. राजीव कुमार सिंह व टीबी एवं फेफड़ा रोग के विभागाध्यक्ष डॉ. बीके चौधरी ने दी। अब तक फेफड़ा या श्वास संबंधी रोगियों को मेडिसिन इमरजेंसी में भर्ती किया जाता था और जरूरत पड़ने पर रेस्पिरेटरी विशेषज्ञों को बुलाना पड़ता था। इससे विशेषज्ञ उपचार मिलने में देर होती थी।

    पुरानी इमरजेंसी में अलग यूनिट, 20 बेड आरक्षित

    अधीक्षक डॉ. राजीव कुमार सिंह ने बताया कि पुराने इमरजेंसी वार्ड में 20 बेड श्वसन रोगियों के लिए आरक्षित किए गए हैं। यह विभाग अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस होगा। यहां न्यूमोनिया, अस्थमा, टीबी, ब्रोंकाइटिस, फेफड़ों के संक्रमण समेत सभी श्वसन रोगों का तत्काल उपचार होगा। 

    ब्रोंकोस्कोपी जांच की व्यवस्था सीयूबी बिल्डिंग के तीसरे तल पर की गई है जबकि अन्य जरूरी जांचें इमरजेंसी में ही होंगी। मरीजों को ऑक्सीजन सपोर्ट, नेबुलाइजेशन, पल्मोनरी फंक्शन टेस्ट (पीएफटी) व इमरजेंसी मैनेजमेंट की पूरी सुविधा तुरंत मिलेगी। 

    24 घंटे सेवा चालू रहने से मरीजों को रात या आपात स्थिति में भटकना नहीं पड़ेगा। पहले सीमित समय के कारण कई मरीजों को निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ता था लेकिन अब उन्हें पीएमसीएच में ही समुचित इलाज मिल सकेगा।

    फेफड़ा-श्वास संबंधी रोगों के उपचार की होगी सुविधा

    यह केंद्र केवल सामान्य अस्थमा ही नहीं, बल्कि जटिल बीमारियों के इलाज का भी हब बनेगा। यहां खर्राटे और नींद में सांस रुकने जैसी समस्याओं के लिए स्लीप स्टडी, एलर्जी की पहचान के लिए एलर्जी टेस्टिंग सेंटर, ब्रोंकोस्कोपी व थोराकोस्कोपी जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी। 

    इससे फेफड़ों के कैंसर व टीबी जैसी गंभीर बीमारियों का सटीक और समय पर निदान संभव होगा। जर्नल व राष्ट्रीय अध्ययनों के अनुसार भारत में 7 से 13 प्रतिशत वयस्क किसी न किसी क्रॉनिक श्वसन रोग से पीड़ित हैं। उत्तर भारत में इन बीमारियों का प्रचलन अधिक है, इसमें बिहार जैसे राज्यों में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है।