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    Bihar Politics: अमित शाह के बिहार दौरे पर सियासत तेज, RJD का दावा- सीमांचल बनेगा केंद्र शासित प्रदेश

    Updated: Wed, 25 Feb 2026 09:11 PM (IST)

    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह बिहार दौरे पर सीमा सुरक्षा की समीक्षा कर रहे हैं। राजद ने दावा किया कि शाह बिहार-बंगाल के कुछ हिस्सों को मिलाकर नया केंद् ...और पढ़ें

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    तेजस्वी यादव और अमित शाह। फाइल फोटो

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    राज्य ब्यूरो, पटना। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह फिलहाल बिहार में हैं। वे तीन तीन के दौरे पर ही बुधवार को बिहार पहुंचे हैं। शाह अपनी इस यात्रा में सीमावर्ती जिलों की सुरक्षा व्यवस्था और विकास कार्यों की समीक्षा करेंगे। बैठक में भारत-नेपाल सुरक्षा पर भी चर्चा होगी। शाह ही इस यात्रा के बीच सियासत भी शुरू हो गई है।

    बुधवार को राजद विधायक और पार्टी महासचिव रणविजय साहू ने दावा किया कि शाह बिहार और बंगाल के कुछ हिस्सों को मिलाकर नया केंद्र शासित प्रदेश बनाना चाहते हैं। उनके दौरे का यही मकसद है।

    साहू ने कहा कि यह कदम बंगाल चुनाव को ध्यान में रखकर उठाया जा रहा है, ताकि वोटों का ध्रुवीकरण किया जा सके, इसीलिए घुसपैठ के मुद्दे को आधार बनाकर राजनीतिक लाभ के लिए रणनीति बनाई जा रही है।

    साहू के दावे पर भाजपा ने पलटवार किया। पार्टी के वरिष्ठ नेता और विधायक मिथिलेश तिवारी ने कहा कि सीमांचल में घुसपैठ एक गंभीर समस्या है और राष्ट्रीय सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

    उन्होंने संकेत दिया कि यदि सीमा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए कोई कठोर प्रशासनिक निर्णय लेना पड़े, तो केंद्र सरकार उससे पीछे नहीं हटेगी।

    अमेरिका से व्यापार समझौते की समीक्षा के लिए राजद ने लिखा प्रधानमंत्री को पत्र

    दूसरी ओर, राजद किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुधाकर सिंह (बक्सर के सांसद) ने अमेरिका के साथ हुए अंतरिम व्यापार समझौते को भारत के हितों के प्रतिकूल बताया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर उन्होंने भारत के कृषि क्षेत्र, किसानों तथा छोटे कृषि आढ़तियों के लिए चिंता प्रकट की है।

    पत्र में लिखा है कि समझौते के अंतर्गत अमेरिकी कृषि उत्पादों पर भारत में आयात शुल्क न्यूनतम या शून्य हो जाएगा। अमेरिका मेंं कृषि उत्पादन बड़े कारपोरेट एवं वैश्विक व्यावसायिक संस्थानों के माध्यम से संचालित होता है।

    साथ ही, अमेरिकी सरकार अपने किसानों को अत्यधिक सब्सिडी व संरक्षण प्रदान करती है। ऐसी परिस्थिति में छोटे भारतीय उत्पादकों एवं सीमांत किसानों के लिए प्रतिस्पर्द्धा करना अत्यंत कठिन होगा। अत: अमेरिकी कृषि उत्पादों से संबंधित किसी भी प्रकार के व्यावसायिक समझौते को भारतीय संसद की कृषि एवं किसान कल्याण से संबंधित संयुक्त संसदीय समिति के समक्ष समीक्षा हेतु प्रस्तुत किया जाए। समिति के सुझाव पर ही कोई निर्णय लिया जाए।

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