टैरिफ में कमी से बिहार कृषि निर्यात को मिलेगी नई उड़ान, मखाना निर्यात 30 हजार मीट्रिक टन तक पहुंचने की उम्मीद
अमेरिका द्वारा आयात शुल्क घटाने से बिहार के कृषि क्षेत्र को लाभ मिलेगा, खासकर मखाना निर्यात में। 2024-25 में 25,130 मीट्रिक टन मखाना निर्यात हुआ, जो अ ...और पढ़ें
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टैरिफ में कमी से बिहार के कृषि निर्यात को मिलेगा बढ़ावा
डॉ. नलिनी रंजन, पटना। अमेरिका की ओर से भारत से आयात पर टैरिफ में कमी की घोषणा का सीधा लाभ बिहार के कृषि क्षेत्र को मिलने जा रहा है। खासकर मखाना सहित अन्य कृषि व बागवानी उत्पादों के निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि की संभावना है। कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024-25 में भारत से कुल 25,130 मीट्रिक टन मखाने का निर्यात किया गया, इसमें बिहार की भूमिका सबसे अहम रही।
अब टैरिफ घटने के बाद मखाना निर्यात 30 हजार मीट्रिक टन तक पहुंचने का अनुमान है। आंकड़ों के मुताबिक 2024-25 में अमेरिका समेत विभिन्न देशों को 25 हजार टन से अधिक मखाना भेजा गया। केवल अमेरिका में हर महीने करीब 150 टन मखाना निर्यात हो रहा था, जो अब बढ़कर 250 टन प्रति माह तक पहुंच सकता है। इससे मखाना उत्पादकों, प्रोसेसरों और निर्यातकों को बड़ा लाभ होगा।
हर महीने 50–60 कंटेनर मखाना हो रहा निर्यात
नेहाशी इंटरनेशनल एक्सपोर्टर की निदेशक नेहा आर्या के अनुसार बिहार से हर महीने 50 से 60 कंटेनर मखाना का निर्यात किया जाता है। एक 40 फीट के कंटेनर में करीब पांच टन मखाना लोड होता है। इनमें से लगभग 30 कंटेनर अमेरिका जाते हैं। इसके अलावा आस्ट्रेलिया, कनाडा, यूएई, बेल्जियम, दुबई, कतर, सऊदी अरब, लंदन और अन्य गल्फ देशों में भी बिहार का मखाना बड़ी मात्रा में जा रहा है। हाल ही में भारतीय निर्यातकों का एक प्रतिनिधिमंडल गल्फ देशों के दौरे से लौटा है, जहां मखाने की मांग तेजी से बढ़ती दिखी है।
अमेरिका को जाता है सबसे उच्च गुणवत्ता का मखाना
निर्यातकों के मुताबिक मखाना कुल चार श्रेणियों में होता है, इनमें सबसे उच्च गुणवत्ता वाला मखाना अमेरिका भेजा जाता है। इसे ‘ओके क्वालिटी’ कहा जाता है। अमेरिका निर्यात से पहले मखाने को कई कड़े गुणवत्ता मानकों और जांच प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है।
हरी सब्जियों और फलों के निर्यात को भी मिलेगा बढ़ावा
टैरिफ में कमी का असर सिर्फ मखाना तक सीमित नहीं रहेगा। अमेरिका में बिहार की हरी साग-सब्जियों और फलों की भी अच्छी मांग है। आडू, हरी मिर्च, भिंडी, आम और लीची जैसी सब्जियां व फल एयरमार्ग से प्रतिदिन निर्यात किए जाते हैं। टैरिफ कम होने से इन उत्पादों के निर्यात में भी बढ़ोतरी की उम्मीद है। वहीं मक्का का निर्यात मुख्य रूप से गल्फ देशों में किया जा रहा है।
मखाना बना ‘सुपरफूड’, 27 प्रतिशत की सालाना वृद्धि
मखाना अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में ‘सुपरफूड’ के रूप में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। इसी कारण 2024-25 के दौरान मखाना निर्यात में लगभग 27 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई है। मधुबनी, दरभंगा, सहरसा, पूर्णिया और कटिहार जैसे जिले मखाना उत्पादन और निर्यात के प्रमुख केंद्र हैं।
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