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    सीमेंट कंपनियों में पकड़ा गया हेराफेरी का बड़ा खेल! Dalmia-India Cements तक का नाम; जांच में चौंकाने वाला खुलासा

    Updated: Mon, 09 Mar 2026 05:27 PM (IST)

    भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) ने ONGC को सीमेंट सप्लाई करने वाली डालमिया सीमेंट, श्री दिग्विजय और इंडिया सीमेंट्स जैसी कंपनियों के बीच 2007-2018 के ए ...और पढ़ें

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    तीन बड़ी कंपनियों के बीच एक कथित 'प्राइस-फिक्सिंग' (कीमतें तय करने की मिलीभगत) का भंडाफोड़। (AI फोटो) 

    नई दिल्ली। भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) ने ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन (ONGC) को सीमेंट सप्लाई करने वाली तीन बड़ी कंपनियों के बीच एक कथित 'प्राइस-फिक्सिंग' (कीमतें तय करने की मिलीभगत) का भंडाफोड़ किया है। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह चौंकाने वाला मामला 2007 से 2018 के बीच का है और इसका खुलासा एक बेहद ही अजीबोगरीब बहाने "लकी नंबर 7" से हुआ है।

    आइए विस्तार से समझते हैं कि कैसे एक छोटी सी गलती ने इतने बड़े गठजोड़ (Cartel) की पोल खोल दी।

    एक जैसी बोलियों से कैसे हुआ शक?

    इस पूरे मामले की शुरुआत 2018 में ONGC के एक सीमेंट टेंडर से हुई। जब ONGC ने टेंडर की बोलियां (Bids) खोलीं, तो अधिकारी यह देखकर हैरान रह गए कि सभी प्रतिस्पर्धी कंपनियों ने एक ही कीमत ठीक 7,000 रुपये प्रति टन कोट की थी। अलग-अलग कंपनियों के बिल्कुल एक जैसी कीमत तय करना असामान्य था, जिसने ONGC के मन में गहरा शक पैदा कर दिया।

    'अंक ज्योतिष का फैक्टर' और लकी नंबर का बहाना

    जब ONGC ने इस असामान्य समानता पर सवाल उठाया और चेतावनी नोटिस भेजा, तो 'इंडिया सीमेंट्स' के एक अधिकारी ने जो जवाब दिया, वह और भी चौंकाने वाला था। कंपनी ने अपने लिखित जवाब में कहा कि उनकी बोली वैश्विक रुझानों से प्रभावित थी और इसे "अंक ज्योतिष (Numerology) के 7 अंक का भी समर्थन प्राप्त था।" अधिकारी ने तर्क दिया कि '7' उनका लकी नंबर है। यह अजीबोगरीब स्पष्टीकरण जांच रिकॉर्ड का हिस्सा बन गया और इसी ने ONGC को इन कंपनियों के खिलाफ अविश्वास (Antitrust) शिकायत दर्ज करने के लिए प्रेरित किया।

    ONGC की शिकायत के बाद CCI ने मामले की गहन जांच शुरू की। नियामक की रिपोर्ट के अनुसार, यह गठजोड़ (कार्टेल) काफी लंबे समय से चल रहा था।

    डालमिया सीमेंट (भारत) और श्री दिग्विजय: ये दोनों कंपनियां 2007 से 2018 के बीच इस कथित कार्टेल का मुख्य हिस्सा थीं।

    इंडिया सीमेंट्स: यह कंपनी 2017 और 2018 के बीच कुछ समय के लिए इस व्यवस्था में शामिल हुई।

    जांच में ईमेल, मीटिंग्स और अंदरूनी जो बात हुई उससे यह साफ हुआ कि ये कंपनियां आपस में बातचीत करके बोलियां लगा रही थीं। उनका मुख्य मकसद ONGC के टेंडर्स में आपसी प्रतिस्पर्धा को खत्म करना और मुनाफे को आपस में बांटना था।

    कैसे काम करता था यह गठजोड़?

    रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं जिसके मुताबिक प्रतिद्वंद्वी कंपनियों के अधिकारी टेंडर जमा करते समय एक-दूसरे की मदद करते थे। 2018 में 'श्री दिग्विजय' के एक वरिष्ठ अधिकारी ने टेंडर भरने में मदद के लिए डालमिया के ऑफिस का दौरा किया था।

    एक्सेल शीट से होती थी प्लानिंग

    कंपनियों ने अपनी फैक्ट्रियों और ONGC के डिलीवरी पॉइंट्स के बीच रेल मालभाड़े की दूरी की तुलना करने के लिए बाकायदा एक्सेल (Excel) शीट तैयार की थीं। इसके जरिए वे तय करते थे कि आपस में प्रतिस्पर्धा किए बिना कॉन्ट्रैक्ट्स को कैसे बांटा जाए।

    ऐसे होता था मुनाफे का बंटवारा

    श्री दिग्विजय के वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रेम आर. सिंह की गवाही के अनुसार, एक जैसी कीमत (7,000 रुपये) तय करने का मकसद कंपनियों के बीच वॉल्यूम और रेवेन्यू को लगभग बराबर बांटना था।

    जांच के घेरे में आए कई बड़े नाम

    राजीव नांबियार: पूर्व प्रबंध निदेशक, श्री दिग्विजय
    वाई. एच. डालमिया: अध्यक्ष, डालमिया भारत
    एन. श्रीनिवासन: पूर्व प्रबंध निदेशक, इंडिया सीमेंट्स

    विदेशी कंपनियों को रोकने की साजिश

    इन सीमेंट कंपनियों ने न सिर्फ आपस में सांठगांठ की, बल्कि टेंडर प्रक्रिया में हिस्सा ले रही विदेशी कंपनियों को बाहर करने के लिए भी पूरी ताकत लगा दी। उन्होंने विदेशी कंपनियों के सर्टिफिकेशन पर सवाल उठाते हुए सरकार से बार-बार शिकायतें कीं और तर्क दिया कि सरकार को विदेशी कंपनियों के बजाय घरेलू कंपनियों को प्राथमिकता देनी चाहिए।
    इन विदेशी कंपनियों में दुनिया की सबसे बड़ी ऑयलफील्ड सर्विसेज प्रदाता कंपनी Schlumberger (अब SLB), UAE स्थित क्लासिक ऑयल फील्ड केमिकल्स और बेल वेदर (Bell Weather) शामिल थीं।
    पाया कि सीमेंट फर्मों ने विदेशी बोलियों को रद्द कराने के लिए ONGC को सीमेंट की सप्लाई रोकने की योजना बनाकर दबाव डालने की भी कोशिश की थी, जो प्रतिस्पर्धा कानूनों का सीधा उल्लंघन है।

    इस बीच, संबंधित सीमेंट कंपनियों को जांच के निष्कर्षों पर जवाब देने के लिए कहा गया है। उनके जवाबों की समीक्षा करने के बाद, सीसीआई इस मामले में अंतिम आदेश जारी करेगा। रॉयटर्स के मुताबिक मामले के सीसीआई के समक्ष लंबित होने का हवाला देते हुए डालमिया भारत ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया, लेकिन पहले कहा था कि वह अधिकारियों के साथ सहयोग कर रही है। 

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