Middle East War: क्या फिर डूबेंगे छोटे व्यापार? सिबिल ने बैंकों को दी कोविड जैसी मदद देने की बड़ी चेतावनी!
पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच, ट्रांसयूनियन सिबिल ने वित्तीय संस्थानों को महत्वपूर्ण परामर्श जारी किया है। सिबिल ने बैंकों और ऋणदाताओ ...और पढ़ें

नई दिल्ली| पश्चिम एशिया में गहराते भू-राजनीतिक तनाव के बीच, क्रेडिट सूचना कंपनी ट्रांसयूनियन (TU) सिबिल ने वित्तीय संस्थानों के लिए एक महत्वपूर्ण परामर्श जारी किया है। सिबिल का कहना है कि मौजूदा वैश्विक संकट को देखते हुए बैंकों और ऋणदाताओं को खुदरा ग्राहकों तथा सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (MSME) को वैसी ही वित्तीय सहायता देनी होगी, जैसी कोविड-19 महामारी के दौरान प्रदान की गई थी।
सतर्कता के साथ समर्थन की जरूरत
ट्रांसयूनियन सिबिल के प्रबंध निदेशक और सीईओ भावेश जैन के अनुसार, वित्तीय संस्थानों को इस चुनौतीपूर्ण समय में केवल बड़े कॉर्पोरेट्स ही नहीं, बल्कि छोटे कर्जदारों की जरूरतों के प्रति भी संवेदनशील होना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि:
- ऋणदाताओं को ग्राहकों की आय और पिछले भुगतान रिकॉर्ड की गहन जांच करनी चाहिए।
- जरूरत पड़ने पर राहत पैकेज या अतिरिक्त सहायता के विकल्प खुले रखने चाहिए।
- बाजार में जारी प्रतिस्पर्धा के बीच पोर्टफोलियो की गुणवत्ता से समझौता नहीं किया जाना चाहिए।
पोर्टफोलियो की स्थिति और भविष्य की निगरानी
राहत की बात यह है कि दिसंबर में समाप्त हुई तिमाही के दौरान खुदरा कर्ज की गुणवत्ता में सुधार देखा गया है। जैन ने स्पष्ट किया कि फरवरी तक ऋण पोर्टफोलियो स्थिर बना हुआ है, हालांकि मार्च के आंकड़ों का विश्लेषण अभी बाकी है।
आने वाले हफ्तों में टीयू सिबिल इस बात पर कड़ी नजर रखेगी कि पश्चिम एशिया संकट का भारतीय ऋण बाजार और विभिन्न पोर्टफोलियो पर क्या प्रभाव पड़ता है।
वित्तीय संस्थानों को सलाह दी गई है कि वे "सतर्कता के साथ समर्थन" की नीति अपनाएं ताकि अर्थव्यवस्था के आधार स्तंभ (MSME) को टूटने से बचाया जा सके।
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