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    EPF पेंशन बढ़ेगी? ₹1000 से गुजारा मुश्किल, समिति ने की तुरंत बढ़ाने की सिफारिश; कितनी करने की मांग

    Updated: Wed, 18 Mar 2026 08:14 PM (IST)

    EPS Pension Hike: संसदीय समिति ने ईपीएफ न्यूनतम पेंशन ₹1000 को अपर्याप्त बताते हुए तत्काल बढ़ाने की सिफारिश की है। समिति का कहना है कि बढ़ती महंगाई और ...और पढ़ें

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    नई दिल्ली| क्या ईपीएफ पेंशन अब बढ़ने (EPF pension hike) वाली है? संसद की एक अहम समिति ने साफ कहा है कि ₹1000 महीना पेंशन से गुजारा करना मुश्किल है और इसे तुरंत बढ़ाया जाना चाहिए।

    मंगलवार को संसद की स्थायी समिति ने कर्मचारी पेंशन योजना (EPS-95 minimum pension increase) के तहत मिलने वाली न्यूनतम पेंशन की समीक्षा करने की सिफारिश की।

    समिति ने साफ शब्दों में कहा कि मौजूदा ₹1000 प्रति माह पेंशन सम्मानजनक जीवन के लिए बिल्कुल पर्याप्त नहीं है।

    पेंशन बढ़ाकर कितनी करने की मांग?

    यह सिफारिश ऐसे समय आई है, जब देशभर के पेंशनधारक पेंशन को बढ़ाकर ₹7500 प्रति माह (increase EPF pension to 7500) करने की मांग कर रहे हैं। इसी मांग को लेकर EPS-95 पेंशनर्स ने 9 मार्च से जंतर-मंतर पर तीन दिन का प्रदर्शन भी किया था।

    श्रम, वस्त्र एवं कौशल विकास से जुड़ी इस संसदीय समिति (parliamentary committee recommendation on EPF pension) ने अपनी 15वीं रिपोर्ट (अनुदान मांग 2026-27) में कहा कि,

    महंगाई लगातार बढ़ रही है, लेकिन पेंशन की राशि लंबे समय से नहीं बढ़ी है। समिति ने बताया कि उसे कई पेंशनधारकों, खासकर बुजुर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों से शिकायतें मिली हैं कि ₹1000 में बुनियादी जरूरतें भी पूरी नहीं हो पा रहीं।

    रिपोर्ट में EPFO को लेकर क्या बताया?

    रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि सरकार पहले से इस योजना में आर्थिक सहायता देती है। इसके तहत ईपीएफ (EPFO pension hike latest update) के सक्रिय सदस्यों के लिए 1.16% का योगदान और न्यूनतम ₹1000 पेंशन सुनिश्चित करने के लिए बजटीय समर्थन शामिल है।

    लेकिन समिति का मानना है कि मौजूदा हालात खासकर महंगाई, इलाज का खर्च और रोजमर्रा की जिंदगी की बढ़ती लागत को देखते हुए यह रकम पूरी तरह नाकाफी है।

    समिति ने क्या-क्या दिए सुझाव?

    समिति ने श्रम एवं रोजगार मंत्रालय को सुझाव दिया है कि EPS-95 के तहत न्यूनतम पेंशन की 'तुरंत और व्यापक समीक्षा' की जाए, ताकि इसे समय के अनुसार बढ़ाकर एक सम्मानजनक स्तर तक लाया जा सके।

    साथ ही, समिति ने यह भी कहा कि सरकार को इस योजना के लिए बजटीय सहायता बढ़ाने के विकल्प तलाशने चाहिए, ताकि पेंशनधारकों को बेहतर सामाजिक सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता मिल सके।

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    ठेका श्रमिका का भी मुद्दा उठा

    रिपोर्ट में एक और अहम मुद्दा उठाया गया ठेका (कॉन्ट्रैक्ट) श्रमिकों का। समिति ने पाया कि कई कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स नियमित कर्मचारियों जैसा काम करते हैं, लेकिन दुर्घटना के बाद उन्हें मुआवजा और राहत मिलने में देरी होती है।

    इस पर समिति ने सिफारिश की कि ऐसे श्रमिकों को EPF और ESI जैसी योजनाओं के तहत समय पर कवर किया जाए और मुआवजे की प्रक्रिया तेज की जाए।

    साथ ही केंद्र और राज्य सरकारों से कहा गया है कि वे एक ऐसा सिस्टम बनाएं जो इन नियमों के पालन की निगरानी करे और समय पर भुगतान सुनिश्चित करे।

    कुल मिलाकर, संसदीय समिति का यह रुख साफ संकेत देता है कि आने वाले समय में EPF पेंशन को बढ़ाने पर सरकार को बड़ा फैसला लेना पड़ सकता है, जिससे लाखों रिटायर्ड कर्मचारियों को राहत मिल सकती है।