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    यूरोपियन यूनियन ने दो साल के लिए खत्म किया GSP का लाभ, भारत के 87% निर्यात पर लगेगा ज्यादा टैरिफ

    Updated: Thu, 22 Jan 2026 03:57 PM (IST)

    GSP suspension India: यूरोपियन यूनियन ने 1 जनवरी 2026 से भारत के लिए जनरलाइज्ड स्कीम ऑफ प्रेफरेंसेज (GSP) लाभ निलंबित कर दिए हैं। इससे भारत के 87% निर ...और पढ़ें

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    भारत के निर्यात पर ईयू में अब अधिक टैरिफ लगेगा।

    यूरोपियन यूनियन (EU) ने 1 जनवरी, 2026 से भारत को कार्बन टैक्स के अलावा एक और झटका दिया है। उसने जनरलाइज्ड स्कीम ऑफ प्रेफरेंसेज (GSP) के लाभ निलंबित (EU GSP suspension India) कर दिए हैं। इससे ईयू को भारत के 87 प्रतिशत निर्यात पर अधिक शुल्क (higher tariffs on Indian exports) लगेगा।

    GSP रियायतों के तहत भारतीय उत्पादों को EU के बाजारों में मोस्ट फेवर्ड नेशन (MFN) टैरिफ से कम पर निर्यात किया जा सकता था।

    यह भी पढ़ें- यूरोपियन यूनियन के GSP लाभ खत्म करने से भारत का मात्र 2.7% निर्यात होगा प्रभावित, सरकार ने खुद बताया

    जीएसपी लाभ निलंबित करने से भारतीय निर्यातकों को पूरा MFN टैरिफ चुकाना पड़ेगा। यूरोपियन कमीशन के अनुसार टैरिफ में रियायत 1 जनवरी 2026 से 31 दिसंबर 2028 तक के लिए सस्पेंड की गई है।

    निर्यातकों के लिए क्या बदला

    थिक टैंक ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनीशिटिव (GTRI) के अनसार जीएसपी के तहत निर्यातकों को ‘मार्जिन ऑफ प्रेफरेंस’ (MoP) मिलता था, यानी EU के एमएफएन शुल्क में एक निश्चित छूट मिलती थी। अधिकांश वस्त्र, परिधान और औद्योगिक उत्पादों के लिए यह MoP औसतन 20% था। यदि किसी कपड़े पर एमएफएन शुल्क 12% था, तो जीएसपी के तहत केवल 9.6% शुल्क देना पड़ता था। 1 जनवरी से यह लाभ समाप्त होने के बाद निर्यातकों को पूरा 12% शुल्क चुकाना पड़ रहा है।

    जीएसपी के तहत रियायतें ऐसे समय खत्म (India EU trade setback) की गई हैं जब 1 जनवरी से ही ईयू ने कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) या कार्बन टैक्स शुरू किया है। इससे भारतीय इस्पात और एल्युमिनियम निर्यातकों को पहले से ही कार्बन रिपोर्टिंग और बढ़ती अनुपालन लागत का सामना करना पड़ रहा है।

    भारत की प्रतिस्पर्धी क्षमता पर असर

    अगले हफ्ते भारत और ईयू के बीच मुक्त व्यापार समझौता (FTA) होने की उम्मीद है। लेकिन एफटीए के लागू होने में एक वर्ष या उससे भी अधिक समय लग सकता है। इसलिए निकट भविष्य में भारतीय निर्यातकों को अधिक व्यापार बाधाओं का सामना करना पड़ेगा।

    गारमेंट जैसे सेक्टर जो कीमतों को लेकर काफी संवेदनशील हैं, उनमें टैरिफ में यह बढ़ोतरी भारत की प्रतिस्पर्धी क्षमता कमजोर कर सकती है। ईयू के खरीदार बांग्लादेश और वियतनाम जैसे देशों के शुल्क-मुक्त सप्लायरों की ओर मुड़ सकते हैं।

    निर्यातकों के संगठन FIEO के डायरेक्टर जनर अजय सहाय ने कहा कि EU के फैसले से अब अधिकांश भारतीय उत्पादों को पूर्ण MFN शुल्क दरों का सामना करना होगा। सहाय ने कहा, "इसने बांग्लादेश और वियतनाम जैसे देशों की तुलना में भारत की मूल्य प्रतिस्पर्धा को काफी कमजोर कर दिया है। उन देशों को शुल्क मुक्त या कम शुल्क का लाभ मिलना जारी है।"

    ईयू ने भारत के लिए जिन चीजों पर जीएसपी रियायत खत्म की है उनमें शामिल हैं-

    खनिज उत्पाद, ऑर्गेनिक और इनऑर्गेनिक केमिकल उत्पाद, प्लास्टिक और उसके सामान, रबर और उनके सामान, टेक्सटाइल, पत्थर, प्लास्टर, सीमेंट, एस्बेस्टस, अभ्रक के सामान, सिरेमिक उत्पाद, काँच, मोती और कीमती धातुएं, लोहा-इस्पात और उनके सामान, बेस मेटल और उनके सामान, मशीनरी, मेकैनिकल और इलेक्ट्रिकल उपकरण और उनके पुर्जे, रेलवे व्हीकल और उपकरण तथा मोटर वाहन, साइकिल, विमान, पानी के जहाज।

    इन उत्पादों पर जीएसपी का लाभ जारी

    वर्तमान में जीएसपी का लाभ सीमित उत्पादों के लिए ही है- कृषि और खाद्य पदार्थ, लेदर गुड्स, लकड़ी और कागज, फुटवियर, ऑप्टिकल और मेडिकल उपकरण तथा हैंडीक्राफ्ट। ईयू को भारत के निर्यात में इनका हिस्सा 13% से भी कम है।

    क्या है जीएसपी

    जनरलाइज्ड स्कीम ऑफ प्रेफरेंसेज (जीएसपी) यूरोपियन यूनियन की एक एकतरफा व्यापार व्यवस्था है। इसके तहत विकासशील देशों को एमएफएन से कम शुल्क पर निर्यात की सुविधा मिलती है। देशों को आय स्तर और निर्यात प्रतिस्पर्धा क्षमता के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है। किसी उत्पाद समूह में निर्यात का स्तर अधिक हो जाने पर ये रियायतें वापस ले ली जाती हैं।

    ईयू के नियमों के अनुसार, यदि किसी उत्पाद समूह का निर्यात लगातार तीन वर्षों तक निर्धारित सीमा से अधिक रहता है, तो उस पर दी जाने वाली रियायत वापस ले ली जाती है। इसी नियम के तहत भारत को दी जाने वाली रियायत 2026–2028 की अवधि के लिए खत्म की गई है। जीटीआरआई के अजय श्रीवास्तव के अनुसार, कानूनी रूप से यह फैसला भले उचित लगे, लेकिन इससे भारत के अधिकांश निर्यात उत्पादों को एक झटके में तरजीही पहुंच खोनी पड़ेगी।