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    साबुन, डिटर्जेंट, बिस्किट समेत रोजमर्रा के सामान होंगे महंगे, ब्रिटानिया-डाबर और HUL इन वजहों से दाम बढ़ाने को मजबूर

    Updated: Sun, 10 May 2026 03:36 PM (IST)

    आम लोगों को जल्द ही महंगाई का झटका लग सकता है क्योंकि साबुन, डिटर्जेंट, बिस्किट जैसे रोजमर्रा के सामान महंगे हो सकते हैं। एफएमसीजी कंपनियां बढ़ती लागत ...और पढ़ें

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    बढ़ सकते हैं एफएमसीजी उत्पादों के दाम (AI फोटो)

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    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    नई दिल्ली। आम लोगों के लिए एक टेंशन देने वाली खबर है। जनता को महंगाई का झटका लग सकता है। दरअसल साबुन, डिटर्जेंट, बिस्किट, पैकेट बंद खाने की चीजों और पेय प्रोडक्ट्स की कीमतें बढ़ सकती हैं। देश की प्रमुख एफएमसीजी कंपनियां, जो कि रोजमर्रा के यूज वाले सामान बनाती हैं, बढ़ती लागत से मुनाफे पर पड़ रहे दबाव को कम करने के लिए अपने प्रोडक्ट्स के दाम बढ़ा सकती हैं। ये बढ़ोतरी धीरे-धीरे होने की संभावना है। बता दें कि एफएमसीजी कंपनियों के अधिकारियों ने हालिया तिमाही नतीजों के बाद इशारा दिया कि पहले ही तीन से पांच प्रतिशत तक कीमतें बढ़ चुकी हैं और लागत का दबाव जारी रहा तो ये ट्रेंड आगे भी जारी रह सकता है।

    इन वजहों से बढ़ेंगे रेट

    एफएमसीजी कंपनियों का कहना है कि मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के के चलते ग्लोबल सप्लाई चेन प्रभावित हुई, जिसके नतीजे में कच्चे माल, लॉजिस्टिक्स और पैकेजिंग लागत बढ़ी। वहीं साथ ही रुपये में कमजोरी ने भी दबाव बढ़ाया है।
    अब इन फैकटर्स का असर फूड प्रोडक्ट्स, पर्सनल केयर, पेय उत्पादों और घरेलू उपयोग के सामान समेत कई क्षेत्रों पर दिखाई दे रहा है।

    घट रहा पैकेट का साइज

    कंपनियां मुनाफा बनाए रखने के लिए कीमतें बढ़ाने के साथ पैकेट बंद उत्पादों में मात्रा कम करने की रणनीति भी अपना रही हैं। हालांकि पांच, 10 और 15 रुपये वाले छोटे पैक बाजार में बनाए रखने की कोशिश की जा रही है ताकि बिक्री पर असर कम पड़े।
    कंपनियां कॉस्ट कम करने के लिए छूट और प्रमोशन खर्चों में कटौती, स्टोरेज मैनेजमेंट को मजबूत करने और सप्लाई चेन को अधिक कुशल बनाने जैसे कदम उठा रही हैं। इसके बावजूद उपभोक्ताओं पर बढ़ती लागत का कुछ बोझ पड़ सकता है।

    डाबर-ब्रिटानिया के सामने चुनौती

    डाबर इंडिया के ग्लोबल सीईओ मोहित मल्होत्रा के मुताबिक कंपनी इस वित्त वर्ष में करीब 10 प्रतिशत महंगाई का सामना कर रही है। उन्होंने कहा कि महंगाई के प्रभाव को कम करने के लिए कंपनी विभिन्न कारोबार सेगमेंट्स में औसतन चार प्रतिशत तक कीमतें बढ़ा चुकी है और कॉस्ट कंट्रोल के उपाय भी कर रही है।
    वहीं ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज भी इशारा दे चुकी है कि ईंधन और पैकेजिंग लागत में करीब 20 प्रतिशत वृद्धि के कारण जल्द ही कीमतें बढ़ाई जा सकती हैं। कंपनी के एमडी-सीईओ रक्षित हरगेव के अनुसार कंपनी सीधे दाम बढ़ाने और पैक के वजन में कमी, दोनों विकल्पों पर विचार कर रही है।

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    ऑपरेशनल कॉस्ट हो रही प्रभावित

    ब्रिटानिया के पास गुड डे, मेरी गोल्ड, मिल्क बिकीज और टाइगर जैसे ब्रांड हैं। हरगेव ने कहा कि बड़े पैक वाले उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी की जाएगी। साथ ही एलपीजी, पीएनजी और पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाले लैमिनेट की बढ़ती कीमतें ऑपरेशनल कॉस्ट को प्रभावित कर रही हैं।
    हिंदुस्तान यूनिलीवर ने भी संकेत दिए हैं कि यदि जिंसों की कीमतों में दबाव बना रहा तो कंपनी आगे और कीमतें बढ़ा सकती है। एचयूएल के प्रमुख ब्रांड में सर्फ एक्सल, ब्रुक बॉन्ड, लाइफबॉय, डव, क्लिनिक प्लस, सनसिल्क, लैक्मे जैसे ब्रांड हैं।
    एचयूएल के सीएफओ निरंजन गुप्ता के मुताबिक, ‘‘अभी तक हमारे ऊपर महंगाई का आठ से 10 प्रतिशत का बोझ पड़ा है। हमने पोर्टफोलियो दर पोर्टफोलियो आधार पर कीमतों में दो से पांच प्रतिशत तक की वृद्धि की है।’’

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