'GST Reform से होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए 5 साल तक दें मुआवजा', इन राज्यों ने मोदी सरकार से की डिमांड
GST Reform 3 और 4 सितंबर को होने वाली जीएसटी काउंसिल की बैठक से पहले विपक्ष शासित राज्यों के मंत्रियों ने बैठक की। बैठक के बाद पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने मांग की कि जीएसटी दरों में प्रस्तावित कटौती से होने वाले संभावित नुकसान की भरपाई केंद्र सरकार राज्यों को मुआवजा देकर पूरी करे।

नई दिल्ली। जीएसटी सुधार (GST Reform) प्रस्ताव के कारण हर साल होने वाले संभावित 2 लाख करोड़ रुपये के राजस्व नुकसान की भरपाई के लिए विपक्ष शासित राज्यों ने केंद्र की मोदी सरकार से अगले 5 साल तक के लिए मुआवजे की मांग की है। हिमाचल प्रदेश, झारखंड, कर्नाटक, केरल, पंजाब, तमिलनाडु, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल के मंत्रियों ने जीएसटी की दरों में प्रस्तावित कटौती के बाद व्यवसायों द्वारा मुनाफाखोरी को रोकने के लिए एक तंत्र बनाने की भी मांग की ताकि इसका लाभ आम आदमी तक पहुंच सके।
राज्यों ने सुझाव दिया की मौजूदा सेस चार्ज बनाए रखने के लिए प्रस्तावित 40 प्रतिशत टैक्स के अलावा ध्रुमपान और लग्जरी वस्तुओं पर अतिरिक्त शुल्क लगाया जाए। और इससे मिलने वाले पैसों को राज्यों में बांटा जाए।
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3 और 4 सितंबर को होने वाली GST Council की बैठक में राज्य अपने प्रस्ताव प्रस्तुत करेंगे। इस बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण करेंगे। और इसमें राज्यों के मंत्री शामिल होंगे।
केंद्र सरकार ने राज्यों को सुझाव जीएसटी में दो 5 फीसदी और 18 फीसदी का स्लैब बनाने का सुझाव दिया है। वर्तमान में GST में 5, 12, 18 और 28 प्रतिशत के चार स्लैब हैं।
राज्यों ने की 5 साल के लिए मुआवजे की मांग
आठ राज्यों की बैठक के बाद पत्रकारों को जानकारी देते हुए, कर्नाटक के वित्त मंत्री कृष्ण बायरे गौड़ा ने कहा कि प्रत्येक राज्य को अपने मौजूदा वस्तु एवं सेवा कर (GST) राजस्व में 15-20 प्रतिशत की कमी आने की उम्मीद है।
गौड़ा ने कहा, "20 प्रतिशत जीएसटी राजस्व हानि देश भर में राज्य सरकारों के राजकोषीय ढांचे को गंभीर रूप से अस्थिर कर देगी।" उन्होंने आगे कहा कि राज्यों को 5 वर्षों के लिए मुआवजा दिया जाना चाहिए, जिसे राजस्व स्थिर होने तक आगे बढ़ाया जा सकता है।
गौड़ा ने कहा कि केंद्र द्वारा जीएसटी दरों को कम करने और स्लैब में कटौती करने के मौजूदा प्रस्ताव से कराधान की शुद्ध दर और घटकर 10 प्रतिशत हो जाएगी।
तेलंगाना को 7,000 करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान
इस बैठक के बाद तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री और वित्त मंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क ने कहा कि जीएसटी की दरों में होने वाली कटौती से राज्य को सालाना 7,000 करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान है। उन्होंने केंद्र से नए कर उपाय से होने वाले संभावित नुकसान की राज्यों को उचित भरपाई करने का अनुरोध किया।
हिमाचल प्रदेश, झारखंड, कर्नाटक, केरल, पंजाब, तमिलनाडु, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल के मंत्री फिर से 2 सितंबर को बैठक करेंगे। इन सभी ने मांग की कि राजस्व संरक्षण की गणना के लिए आधार वर्ष 2024-25 निर्धारित किया जाए और राज्यों के राजस्व को 14 प्रतिशत वार्षिक दर से संरक्षित किया जाए, जो पिछले तीन वर्षों की औसत वृद्धि दर है।
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