एक सेठ, एक महाराजा और एक दीवान ने मिलकर देश को दी पहली रक्षा कंपनी, आजादी से पुराना इतिहास; आज जमीन से अंतरिक्ष तक राज
हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) भारत की पहली डिफेंस कंपनी है, जिसकी स्थापना 1940 में हुई थी। यह एक महारत्न PSU है जो एयरोस्पेस और रक्षा क्षेत्र म ...और पढ़ें

ये है भारत की पहली डिफेंस कंपनी
HighLights
HAL भारत की पहली डिफेंस कंपनी
1940 में स्थापित हुई थी
3.01 लाख करोड़ मार्केट कैपिटल वाली महारत्न PSU है HAL
नई दिल्ली। भारत में 16 डिफेंस पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग्स (DPSUs) और 400 से अधिक प्राइवेट कंपनियाँ हैं, जिनके पास डिफेंस प्रोडक्शन के लिए एक्टिव इंडस्ट्रियल लाइसेंस हैं। इस इकोसिस्टम में हजारों अन्य MSME और स्टार्टअप भी शामिल हैं, जो आर्म्ड फोर्सेज को कंपोनेंट्स सप्लाई करते हैं। मगर क्या आप जानते हैं कि भारत की पहली डिफेंस कंपनी (First Defence Company of India) कौन-सी है और आज उसका मालिक कौन है? आइए आपको बताते हैं।
ये है भारत की सबसे पुरानी डिफेंस कंपनी
हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स भारत की पहली डिफेंस कंपनी मानी जाती है। ये भारत की एक सरकारी महारत्न कंपनी है, जो एयरोस्पेस और रक्षा सेक्टर की यूनिट है। बेंगलुरु में हेडक्वार्टर वाली यह कंपनी लड़ाकू विमान, हेलीकॉप्टर, मानवरहित हवाई वाहनों (UAV), जेट और टरबाइन इंजन, एवियोनिक्स और अन्य हार्डवेयर की डिजाइनिंग, मैन्युफैक्चिंग और ओवरहॉलिंग के काम में शामिल है।
कैसे शुरू हुई थी HAL?
हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स का इतिहास पिछले 85 से ज्यादा सालों से भारत में एयरोनॉटिकल इंडस्ट्री के डेवलपमेंट के साथ जुड़ा हुआ है। बता दें कि 1939 में, इंडस्ट्रियलिस्ट सेठ वालचंद हीराचंद की मुलाकात हार्लो एयरक्राफ्ट कंपनी के डायरेक्टर विलियम डगलस पॉली से एक लंबी दूरी की फ्लाइट के दौरान हुई।
इस अचानक हुई मुलाकात ने 23 दिसंबर 1940 को बैंगलोर में हिंदुस्तान एयरक्राफ्ट लिमिटेड की स्थापना का रास्ता साफ किया, जिससे भारत में एयरक्राफ्ट बनाने का सफर शुरू हुआ।
इस राजा ने भी दिखाई थी दिलचस्पी
मैसूर के शाही परिवार के सदस्य, महाराजा जयाचामाराजेंद्र वाडियार, सितंबर 1940 में ही गद्दी पर बैठे थे। जब उन्हें एयरक्राफ्ट बनाने वाली कंपनी शुरू करने के इंडस्ट्रियलिस्ट सेठ वालचंद हीराचंद के प्लान के बारे में पता चला, तो उन्होंने उदारता दिखाते हुए 700 एकड़ की बेहतरीन जमीन इस काम में दान में दी और इस कंपनी में 25 लाख रुपये का निवेश भीकिया, जबकि दूसरी रियासतों ने इस विचार का समर्थन करने से इनकार कर दिया था।
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मिर्जा इस्माइल ने भी की मदद
मैसूर के दीवान सर मिर्जा इस्माइल, जो कि पुलिस में भी रहे थे, ने भी इस पहल का समर्थन किया। इन तीन दूरदर्शी लोगों की शुरुआती कोशिशों की वजह से ही भारत 1940 के दशक में एयरक्राफ्ट बनाने वाली कंपनी स्थापित कर पाया।
सबसे पहले कौन-से विमान बनाए?
भारत में विमान बनाने के टार्गेट के साथ वालचंद हीराचंद ने मैसूर की तत्कालीन सरकार के साथ मिलकर 23 दिसंबर 1940 को बेंगलुरु में 'हिंदुस्तान एयरक्राफ्ट लिमिटेड' नाम की कंपनी शुरू की थी। मार्च 1941 में भारत सरकार इस कंपनी की शेयरहोल्डर बनी और बाद में 1942 में इसका मैनेजमेंट अपने हाथ में ले लिया।
अमेरिका की इंटरकॉन्टिनेंटल एयरक्राफ्ट कंपनी के साथ मिलकर, कंपनी ने हार्लो ट्रेनर, कर्टिस हॉक फाइटर और वल्टी बॉम्बर विमान बनाने का काम शुरू किया। जनवरी 1951 में, हिंदुस्तान एयरक्राफ्ट लिमिटेड को भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय के कंट्रोल में लाया गया।
आज क्या-क्या है बनाती?
आज HAL लड़ाकू विमान, सिविल एविएशन, हेलीकॉप्टर, अंतरिक्ष के लिए कुछ प्रोडक्ट्स और कई सेगमेंट की एक्सेसरीज बनाती है। HAL देश के स्पेस प्रोग्राम में सक्रिय रूप से शामिल है और योगदान दे रही है। 1988 में एक अलग एयरोस्पेस डिवीजन बनाया गया था।
अभी HAL इस डिवीजन के जरिए ISRO के एयरोस्पेस लॉन्च व्हीकल और सैटेलाइट के लिए जरूरी स्ट्रक्चर बना रहा है। स्ट्रैप-ऑन L-40 स्टेज बूस्टर की पूरी असेंबली करने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर भी तैयार किया गया है।
कितनी है मार्केट कैपिटल?
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि एचएएल की मार्केट कैपिटल 3.01 लाख करोड़ रुपये है। इसकी लिस्टिंग बीएसई और एनएसई पर मार्च 2018 में हुई थी। इसका शेयर 4,506.55 रुपये पर है।
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