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    Petrol Diesel निर्यात पर सरकार का बड़ा फैसला, पेट्रोल पर ड्यूटी बढ़ाई; डीजल पर घटाई, 1 जुलाई से नई दरें लागू

    Updated: Tue, 30 Jun 2026 10:18 PM (IST)

    भारत सरकार ने पेट्रोल, डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल के निर्यात शुल्क में बड़ा बदलाव किया है। डीजल और एटीएफ पर ड्यूटी घटाई गई है, जबकि पेट्रोल पर बढ़ाई ...और पढ़ें

    भारत ने 1 जुलाई से डीजल पर एक्सपोर्ट टैक्स घटाया, पेट्रोल पर बढ़ाया।

    भारत ने 1 जुलाई से डीजल पर एक्सपोर्ट टैक्स घटाया, पेट्रोल पर बढ़ाया।

    HighLights

    1. डीजल निर्यात शुल्क 14 रुपये से घटाकर 8.5 रुपये प्रति लीटर।

    2. एटीएफ निर्यात शुल्क 12.5 रुपये से घटाकर 7.5 रुपये प्रति लीटर।

    3. पेट्रोल निर्यात शुल्क 1.5 रुपये से बढ़ाकर 4 रुपये प्रति लीटर।

    नई दिल्ली। भारत सरकार ने पेट्रोल-डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल के निर्यात (Petrol Diesel Export Duty) को लेकर बड़ा फैसला किया है। दरअसल, ईरान संघर्ष थमने की वजह से वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें फरवरी के शुरुआत में जितनी थी, उतने स्तर तक पहुंच चुकी है। अब केंद्र की मोदी सरकार ने डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल के एक्सपोर्ट पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स (एक्सपोर्ट टैक्स भी कह सकते हैं) को कम कर दिया है, जबकि पेट्रोल के एक्सपोर्ट पर लगने वाली ड्यूटी बढ़ा दी है। नई दरें बुधवार 1 जुलाई से लागू होंगी।

    यानी भारत से जिन देशों में डीजल एविएशन टर्बाइन फ्यूल जाता है अब वहां सस्ता हो सकता है। वहीं, पेट्रोल पर सरकार ने निर्यात ड्यूटी बढ़ा दी। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने अपनी एक रिपोर्ट में ऐसा दावा किया है।

    पेट्रोल पर 2.5 रुपये बढ़ी एक्सपोर्ट ड्यूटी

    न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार भारत सरकार ने डीजल के एक्सपोर्ट पर लगने वाली ड्यूटी को 14 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 8.5 रुपये कर दिया गया है, जबकि एविएशन टर्बाइन फ्यूल पर ड्यूटी को 12.5 रुपये से घटाकर 7.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है।

    वहीं, दूसरी ओर भारत में पेट्रोल की सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने पेट्रोल पर एक्सपोर्ट ड्यूटी बढ़ा दी है। पेट्रोल पर विंडफॉल टैक्स यानी एक्सपोर्ट टैक्स को 1.5 रुपये से बढ़ाकर 4 रुपये प्रति लीटर कर कर दिया गया है।

    रिपोर्ट के अनुसार भारत की सरकारी तेल मार्केटिंग कंपनियों द्वारा नेपाल, भूटान, बांग्लादेश और श्रीलंका को किए जाने वाले पेट्रोल, डीजल और ATF के निर्यात के दौरान निर्यात शुल्क में छूट दी गई थी। अब यह छूट सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों द्वारा मॉरीशस और मालदीव को किए जाने वाले निर्यात पर भी लागू कर दी गई है।

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    कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट

    वैश्विक स्तर पक कच्चे तेल की कीमतें अपने उच्चतम स्तर $126 प्रति बैरल से बहुत नीचे आ गई हैं। दरअसल, जियोपॉलिटिकल तनाव कम होने और होर्मुज स्ट्रेट खुलने से वैश्विक तेल सप्लाई पहले की ईरान संघर्ष से पहले की तरह हो गई है।

    Strait of Hormuz से शिपिंग फिर से शुरू होने से लंबे समय तक सप्लाई में रुकावट का डर कम हो गया है। यही कारण है कि कच्चे तेल की कीमतें वापस फिर से उसी स्तर पर आ गई हैं, जैसे ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध शुरू होने से पहले थीं। मंगलवार रात 10 बजकर 15 मिनट के आसपास ब्रेंट क्रूड की कीमत 73.04 डॉलर प्रति बैरल थी।

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