सर्च करे
Home
फोकस

Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    Aluminium Scrap Import पर सख्ती की मांग, ₹88434 करोड़ के आयात पर उठे सवाल; अनिल अग्रवाल की वेदांता की क्या है तैयारी?

    Updated: Thu, 09 Jul 2026 07:54 PM (IST)

    Aluminium Scrap: भारतीय एल्युमिनियम उद्योग ने देश को निम्न गुणवत्ता वाले स्क्रैप का डंपिंग ग्राउंड बनने से रोकने के लिए सख्त गुणवत्ता मानकों और आयात श ...और पढ़ें

    निम्न गुणवत्ता वाले एल्युमिनियम स्क्रैप आयात पर रोक लगाने की मांग

    निम्न गुणवत्ता वाले एल्युमिनियम स्क्रैप आयात पर रोक लगाने की मांग

    timer icon

    समय कम है?

    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    नई दिल्ली| भारत का एल्युमिनियम उद्योग चाहता है कि देश को लो ग्रे वाले एल्युमिनियम स्क्रैप का डंपिंग ग्राउंड बनने से बचाया जाए। इसी को लेकर एल्युमिनियम एसोसिएशन ऑफ इंडिया (AAI) ने वित्त मंत्रालय और खान मंत्रालय को ज्ञापन सौंपा है।

    एसोसिएशन ने लंबे समय से लंबित BIS स्क्रैप गुणवत्ता मानकों को तुरंत नोटिफाइड यानी अधिसूचित करने की मांग की है। उद्योग का कहना है कि, अगर समय रहते सख्त गुणवत्ता नियम लागू नहीं किए गए तो इसका असर देश के विनिर्माण, उपभोक्ता सुरक्षा और एल्युमिनियम उद्योग की वैश्विक साख पर पड़ सकता है।

    AAI के मुताबिक,

    आज एल्युमिनियम सिर्फ एक धातु नहीं बल्कि भविष्य की अर्थव्यवस्था के लिए रणनीतिक महत्व वाला मेटल बन चुका है। बिजली, परिवहन, इंफ्रास्ट्रक्चर, रक्षा, एयरोस्पेस, इलेक्ट्रॉनिक्स, पैकेजिंग, बर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे कई अहम क्षेत्रों में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में घटिया गुणवत्ता वाले स्क्रैप का अनियंत्रित आयात देश के लिए बड़ा जोखिम बन सकता है।

    सरकार से एसोसिएशन ने क्या की अपील?

    एसोसिएशन ने सरकार से अपील की है कि जब तक BIS के गुणवत्ता मानक और ग्रेड आधारित HSN कोड लागू नहीं हो जाते, तब तक एल्युमिनियम स्क्रैप पर 2.5% बेसिक कस्टम ड्यूटी (BCD) जारी रखी जाए। इसके बाद ग्रेड-3 से ग्रेड-7 तक के निम्न गुणवत्ता वाले स्क्रैप पर आयात शुल्क बढ़ाकर 7.5% किया जाए, ताकि घटिया स्क्रैप की डंपिंग पर रोक लगाई जा सके।

    AAI की क्या हैं प्रमुख मांगें?

    • लंबे समय से लंबित BIS स्क्रैप गुणवत्ता मानकों को तुरंत अधिसूचित किया जाए।
    • एल्युमिनियम स्क्रैप (HS 7602) के लिए ग्रेड आधारित HSN कोड लागू किए जाएं।
    • ग्रेड-3 से ग्रेड-7 तक के लो-ग्रेड स्क्रैप पर आयात शुल्क 7.5% किया जाए।
    • जब तक नए नियम लागू नहीं होते, तब तक 2.5% बेसिक कस्टम ड्यूटी जारी रखी जाए।
    • देश में स्क्रैप कलेक्शन और रीसाइक्लिंग व्यवस्था को मजबूत बनाया जाए, ताकि आयात पर निर्भरता घटे।

    'कम गुणवत्ता वाला स्क्रैप निर्यात कर रहे'

    एएआई का कहना है कि दुनिया के कई देश पहले ही अपनी एल्युमिनियम वैल्यू चेन को सुरक्षित करने के लिए सख्त कदम उठा चुके हैं। अमेरिका ने सेक्शन-232 के तहत एल्युमिनियम उत्पादों पर शुल्क बढ़ाकर 50% कर दिया है। वहीं यूरोपीय संघ (EU) कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) और अन्य सुरक्षा उपाय लागू कर रहा है। चीन और मलेशिया जैसे देश भी केवल उच्च गुणवत्ता वाले एल्युमिनियम स्क्रैप के आयात की अनुमति देते हैं।

    उद्योग संगठन का दावा है कि कई देश अपने यहां उच्च गुणवत्ता वाला स्क्रैप रोककर केवल कम गुणवत्ता वाला स्क्रैप निर्यात कर रहे हैं। ऐसे में भारत में गुणवत्ता मानकों की कमी उसे लो-ग्रेड स्क्रैप के बड़े बाजार में बदल सकती है।

    खबरें और भी

    यह भी पढ़ें- राधाकिशन दमानी के पोर्टफोलियो वाला शेयर, कंपनी ने खेला 850 करोड़ का दांव, अब 250% ग्रोथ का लक्ष्य

    आत्मनिर्भर भारत के लिए चिंता का विषय

    AAI ने यह भी बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में चैप्टर-76 के तहत एल्युमिनियम आयात 3,479 किलो टन पर एनम (KTPA) के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया, जिस पर ₹88,434 करोड़ की विदेशी मुद्रा खर्च हुई। इसमें सिर्फ एल्युमिनियम स्क्रैप का आयात 2,028 KTPA रहा, जिस पर ₹40,203 करोड़ की विदेशी मुद्रा खर्च हुई। उद्योग का मानना है कि यह स्थिति आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य के लिए चिंता का विषय है।

    10 साल में ₹1.5 लाख करोड़ का निवेश

    एसोसिएशन ने याद दिलाया कि पिछले 10 वर्षों में भारतीय एल्युमिनियम उद्योग में करीब ₹1.5 लाख करोड़ का निवेश हो चुका है। वहीं वेदांता, हिंडाल्को और नाल्को जैसी कंपनियां ₹3 लाख करोड़ से अधिक के नए निवेश की तैयारी कर रही हैं। इन निवेशों से वित्त वर्ष 2033 तक प्राथमिक एल्युमिनियम उत्पादन क्षमता करीब 90 लाख टन प्रतिवर्ष (9 मिलियन टन) तक पहुंचने और 1 लाख से ज्यादा नए रोजगार पैदा होने की उम्मीद है।

    एएआई का कहना है कि अगर सरकार समय रहते BIS गुणवत्ता मानक, ग्रेड आधारित HSN कोड और आयात नियंत्रण जैसे कदम उठाती है, तो भारत में जिम्मेदार रीसाइक्लिंग को बढ़ावा मिलेगा, विदेशी मुद्रा की बचत होगी और एल्युमिनियम उद्योग की गुणवत्ता व वैश्विक प्रतिस्पर्धा भी मजबूत होगी।