Independence Day Special: आज टॉप-5 में है भारत की इकोनॉमी, लेकिन आजादी के वक्त क्या थी हमारी हैसियत? जानिए
Independence Day Special आज भारत को आजाद हुए 78 साल हो गए हैं और हम 79वां स्वतंत्रता दिवस मना रहे हैं। आजादी के बाद से भारत के विकास की कहानी बड़ी ही रोचक रही है। आज हम दुनिया की टॉप 5 इकोनॉमी में से एक हैं। आजादी के समय हम इतने सक्षम नहीं थे।

नई दिल्ली। Independence day special: आज भारत अपना 79वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। आज के हिंदुस्तान और 1947 के हिंदुस्तान में जमीन-आसमान का फर्क है। वो दौर था जब हमें आजादी मिली थी। उसी समय हमनें विकास की नई परिभाषा को लिखना शुरू किया था और आज हम विश्व की टॉप जीडीपी में से एक है। आज Independence Day 2025 के मौके पर हम आपको बताएंगे कि आखिर 1947 में भारत की जीडीपी क्या थी और 2025 में क्या है। इतने सालों में हिंदुस्तान कितना बदला।
15 अगस्त 1947 की मध्यरात्रि को जब दुनिया सो रही थी तब भारत जाग रहा था। क्योंकि ये रात थी भारत के आजादी की। उसके बाद से अब तक का सफर बेहद अभूतपूर्व रहा है। एक नए, स्वतंत्र देश, जो गरीब, विभाजित और संदिग्ध था, से जन्मा भारत, आज दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं और जीवंत लोकतंत्रों में से एक बनकर उभरा है। 1947 से 2025 तक का परिवर्तन शक्ति, सुधार और पीछे मुड़कर न देखने के साहस की कहानी है।
1947 में कितनी बड़ी अर्थव्यवस्था था हिंदुस्तान?
आजादी मिलने से पहले, भारत में 200 से अधिक वर्षों तक अंग्रेजों ने राज किया। तब से, देश ने एक लंबा सफर तय किया है। 1947 में, भारत का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) 2,700 अरब रुपये था। यानी 2.7 लाख करोड़ रुपये। उस समय भारत की जनसंख्या 35 करोड़ थी और अमेरिकी डॉलर और भारतीय रुपये के बीच विनिमय दर 3.3 डॉलर थी। इन आंकड़ों के आधार पर, 1947 में भारत की प्रति व्यक्ति जीडीपी 2,337 अमेरिकी डॉलर होगी, जबकि आज 202 में यह 2,731 अमेरिकी डॉलर होगी।
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आजादी के बाद 1947 से 1964 तक भारत की विकास दर 1.68 फीसदी रही। आंकड़े बताते हैं कि भारत की प्रति व्यक्ति वास्तविक जीडीपी वृद्धि की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) जापान, दक्षिण कोरिया और अमेरिका जैसी पूंजीवादी अर्थव्यवस्थाओं से कम थी। यह कोई आश्चर्य की बात नहीं है। जो बात शायद कम ही लोगों को पता होगी, वह यह है कि यह चीन या पूर्व सोवियत संघ जैसे कम्युनिस्ट देशों से भी कम थी।
1947 और 1964 के बीच, जापान की प्रति व्यक्ति जीडीपी की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) 7.9%, सोवियत संघ की 4.4% और भारत की 1.68% थी। इसके अलावा, भारत का रिकॉर्ड फिलीपींस या मलेशिया से भी बदतर था। यहां तक कि बेहद गरीब बर्मा (अब म्यांमार) की भी 1950 और 1964 के बीच 3.16% की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर रही।
1991 के बाद भारत ने लिखी नई कहानी
1991 में, भुगतान संतुलन संकट के कारण व्यापक आर्थिक सुधार हुए। भारत ने अपना बाजार खोला, शुल्कों में ढील दी और प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव और वित्त मंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के नेतृत्व में विदेशी निवेश को आमंत्रित किया। यह परिवर्तन विश्व अर्थव्यवस्था में भारत के लिए टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ।
1990 के दशक के अंत और 2000 के दशक में सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में आई तेजी के साथ भारत एक सॉफ्टवेयर केंद्र बन गया है। 2025 तक, भारत ने दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था का दर्जा हासिल कर लिया। भारत औद्योगिक विनिर्माण, सेवा उद्योगों और प्रौद्योगिकी-आधारित उद्योगों में बहुत तेजी से आगे बढ़ेगा। नए उद्यम फल-फूल रहे हैं और नवीकरणीय ऊर्जा, ई-कॉमर्स और वित्तीय प्रौद्योगिकी जैसे नए क्षेत्र फिर से उभर रहे हैं।
आज कितनी बड़ी अर्थव्यवस्था है हिंदुस्तान?
1947 से अब की बात करें तो आज भारत की कहानी बिल्कुल अलग है। आज भारत दुनिया की टॉप 4 इकोनॉमी में से एक है। आज हिंदुस्तान की तूती बोलती है। आज का भारत विकास की नई परिभाषा लिख रहा है। आज का भारत आत्मनिर्भर भारत है। आज का भारत सुपर पावर है। फोर्ब्स इंडिया की लेटेस्ट रिपोर्ट की मानें तो भारत की जीडीपी 4.19 ट्रिलियन डॉलर है। यह विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। करंट प्राइस के हिसाब से भारत की पर कैपिटा इनकम $2.88 हजार (मंथली) है।
1947 में नव-स्वतंत्र भारत की धूल भरी गलियों से शुरू होकर 2025 के चहल-पहल वाले स्मार्ट शहरों तक, भारतीय राष्ट्र का यह महान परिवर्तन, इसके लोगों की निष्ठा और आकांक्षाओं का प्रमाण है। इस यात्रा का अनुभव स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान, नेताओं की दूर दर्शिता और आम नागरिकों के पुनरुत्थान से प्रभावित रहा है।
आज का भारत ऐसा भारत है जो दुनिया से आंख से आंख मिलाकर बात करता है। जब भी भारत कुछ बोलता है तो दुनिया ध्यान लगाकर सुनती है। आज का भारत पूरी तरह से बदल चुका है। 1947 से अब तक की विकास की कहानी बहुत रोचक और संघर्षशील रही है।
आज भारत की ऐसी पहचान बन चुकी है कि कोई भी देश उसे दरकिनार नहीं कर सकता। भारत विश्व की एक नई ताकत बनकर उभरा है। आज हम हर एक क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन रहे हैं। फिर चाहे वह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हो, मैन्युफैक्चरिंग हो, डिफेंस सेक्टर हो हर चीज में हिंदुस्तान एक नई कहानी लिख रहा है। उस समय हम आजाद हुए थे। हमारे पास संसाधन नहीं थे। लेकिन फिर भी हम विकास की एक नई लिख रहे थे और आज वह कहानी इतनी बड़ी हो चुकी है कि दुनिया भारत को विश्व गुरु की निगाह से देखती है।
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