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    भारत का 7 साल का सूखा खत्म! गुजरात आ रहा है 6 लाख बैरल कच्चे तेल से लदा ईरानी जहाज, कम होंगे पेट्रोल-डीजल के दाम?

    Updated: Tue, 31 Mar 2026 11:40 PM (IST)

    India Buys Iran Oil 2026: भारत को सात साल बाद ईरान से कच्चा तेल मिलने की उम्मीद है। 'पिंग शुन' नामक जहाज 6 लाख बैरल तेल लेकर गुजरात के वाडिनार बंदरगाह ...और पढ़ें

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    भारत का 7 साल का सूखा खत्म! गुजरात आ रहा है 6 लाख बैरल कच्चे तेल से लदा ईरानी जहाज, कम होंगे पेट्रोल-डीजल के दाम?

    नई दिल्ली| भारत के ऊर्जा बाजार से एक बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है। करीब सात साल के लंबे इंतजार के बाद, भारत को एक बार फिर ईरान से कच्चा तेल (India Iran Crude Oil Import) मिलने की उम्मीद जगी है।

    खबरों के मुताबिक, ईरानी तेल से लदा एक विशाल समुद्री जहाज गुजरात के वाडिनार बंदरगाह (Vadinar Port Iran Crude) की ओर तेजी से बढ़ रहा है। यह घटना इसलिए खास है क्योंकि अमेरिकी प्रतिबंधों की वजह से 2019 से भारत ने ईरान से तेल खरीदना लगभग बंद कर दिया था।

    कौन सा है यह जहाज और कितना है तेल?

    जहाजों की आवाजाही पर नजर रखने वाले डेटा से पता चला है कि ‘पिंग शुन’ (Ping Shun) नाम का यह जहाज करीब 6 लाख बैरल कच्चा तेल लेकर भारत आ रहा है। जिंस विश्लेषण फर्म 'केप्लर' के एक्सपर्ट सुमित रितोलिया का कहना है कि मई 2019 के बाद यह पहली बार होगा जब ईरानी तेल की कोई खेप भारतीय तट पर उतरेगी। अनुमान है कि यह जहाज 4 अप्रैल तक गुजरात के वाडिनार पहुंच जाएगा।

    आखिर यह अचानक मुमकिन कैसे हुआ?

    ईरान पर कड़े अमेरिकी प्रतिबंध लगे हुए हैं, तो फिर यह तेल भारत कैसे आ रहा है? दरअसल, इसके पीछे की कहानी वैश्विक तनाव से जुड़ी है। अमेरिका और इजरायल के साथ ईरान के बढ़ते टकराव के कारण दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छूने लगी थीं।

    कीमतों को काबू में करने के लिए अमेरिकी सरकार ने 'समुद्र में मौजूद' ईरानी तेल की खरीद के लिए 30 दिन की विशेष छूट दी है। यह छूट 19 अप्रैल को खत्म हो जाएगी, और इसी का फायदा उठाकर यह डील हुई है।

    किसका है यह तेल और कहां जाएगा?

    हालांकि आधिकारिक तौर पर किसी कंपनी का नाम सामने नहीं आया है, लेकिन जानकारों का मानना है कि इस तेल का गंतव्य वाडिनार में स्थित नायरा एनर्जी (Nayara Energy) की रिफाइनरी हो सकती है।

    वैसे वाडिनार पोर्ट से बीपीसीएल की बीना रिफाइनरी को भी तेल सप्लाई होता है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने हमेशा यही कहा है कि ईरान से तेल खरीदना एक तकनीकी और कारोबारी फैसला होगा।

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    पुरानी दोस्ती और नई चुनौतियां

    भारत और ईरान का व्यापारिक रिश्ता बहुत पुराना है। एक वक्त था जब भारत अपनी जरूरत का 11.5% तेल अकेले ईरान से खरीदता था। साल 2018 में भारत हर दिन 5 लाख बैरल से ज्यादा तेल ईरान से लेता था, जो प्रतिबंधों के बाद शून्य हो गया।

    अब सबसे बड़ी चुनौती 'पेमेंट' को लेकर है। ईरान अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग सिस्टम 'स्विफ्ट' (SWIFT) से बाहर है, जिसका मतलब है कि उसे सीधे पैसे नहीं भेजे जा सकते। पहले भारत तुर्किये के रास्ते यूरो में भुगतान करता था, लेकिन अब वह रास्ता भी बंद है।

    ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार और कंपनियां इस तेल का भुगतान कैसे करती हैं। अगर यह रास्ता खुल गया, तो आने वाले समय में भारतीय बाजार में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में राहत की उम्मीद की जा सकती है।