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    भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर घरेलू शराब उद्योग की मांग, कहा- हमें भी समान अवसर दें

    By Jagran BusinessEdited By: Gyanendra Tiwari
    Updated: Sat, 07 Feb 2026 08:53 PM (IST)

    सीआईएबीसी ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के बाद घरेलू शराब निर्माताओं के लिए समान अवसर की मांग की है। संगठन चाहता है कि आयात शुल्क में कटौती चरणबद्ध ह ...और पढ़ें

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    भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर घरेलू शराब उद्योग की मांग, कहा- हमें भी समान अवसर दें 

    PTI, नई दिल्ली। घरेलू शराब विनिर्माताओं के संगठन (सीआईएबीसी) ने शनिवार को कहा कि वह उम्मीद करता है कि शराब और पेय पदार्थों पर शुल्क भारत द्वारा हाल ही में ब्रिटेन और यूरोपीय संघ (India EU FTA) के साथ किए गए मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) के अनुरूप ही रखे जाएंगे।

    भारत और अमेरिका द्वारा अंतरिम व्यापार समझौते (India US Trade Deal) के लिए तय किए गए ढांचे के अनुसार, वाइन और स्पिरिट से लेकर सूखे मेवों तक के अमेरिकी उत्पाद अब भारत में या तो शुल्क मुक्त या कम आयात शुल्क पर प्रवेश करेंगे।

    CIABC ने की सरकार से ये मांग

    भारतीय सरकार से आयात के मुकाबले "समान और निष्पक्ष अवसर" सुनिश्चित करने का आग्रह करते हुए, 'कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन अल्कोहलिक बेवरेज कंपनीज' ने कहा कि उसे उम्मीद है कि यह सौदा दोनों देशों के लिए "न्यायसंगत और पारस्परिक रूप से लाभकारी" होगा।

    भारत में निर्मित विदेशी शराब (आईएमएफएल) कंपनियों का प्रतिनिधित्व करने वाले इस संगठन ने कहा कि वह आयात शुल्क में कटौती के खिलाफ नहीं है, लेकिन चाहता है कि यह "चरणबद्ध तरीके से" की जाए।

    सीआईएबीसी के महानिदेशक अनंत एस अय्यर ने कहा, "हमें उम्मीद है कि सरकार गैर-शुल्क बाधाओं को हटाने से संबंधित हमारे द्वारा उठाए गए मुद्दों का समाधान करेगी और आयात के मुकाबले घरेलू उद्योग को समान अवसर प्रदान करेगी।"

    संगठन का कहना है कि विकसित देशों के निर्माताओं की तुलना में भारतीय उद्योग पहले से ही उच्च पूंजी, परिचालन लागत और प्रतिबंधात्मक लाइसेंसिंग व्यवस्था के कारण नुकसान की स्थिति में है। सीआईएबीसी ने राज्य सरकारों से यह भी अनुरोध किया है कि वे "आयातित शराब को दी गई सभी उत्पाद शुल्क रियायतें वापस लें।"

    संगठन ने चेतावनी दी

    संगठन ने चेतावनी दी कि सीमा शुल्क में कटौती के साथ-साथ एक्साइज रियायतें जारी रहना भारतीय विनिर्माताओं के लिए "दोहरी मार" जैसा होगा। कुछ राज्यों में सीधे विदेशों से बोतलबंद होकर आने वाली (बीआईओ) शराब पर कर ढांचा अधिक अनुकूल है, जिससे स्वदेशी उद्योग पिछड़ रहा है।

    संगठन ने आयातित शराब को लागत से कम कीमत पर भारतीय बाजार में खपाने (डंपिंग) को रोकने के लिए कड़े उपायों की मांग की। साथ ही, उन्होंने भारतीय उत्पादों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेहतर पहुंच की वकालत की।

    भारतीय उत्पादों को वर्तमान में ब्रिटेन, यूरोपीय संघ और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में कई तरह के गैर-शुल्क प्रतिबंधों का सामना करना पड़ता है। भारत और अमेरिका ने शनिवार को अंतरिम व्यापार समझौते की घोषणा की है, जिसके तहत अमेरिका भारतीय वस्तुओं पर शुल्क को वर्तमान 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करेगा, जबकि भारत सभी अमेरिकी औद्योगिक वस्तुओं और वाइन-स्पिरिट सहित कृषि उत्पादों पर शुल्क कम या खत्म करेगा।

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