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    Indian Railways लगातार हो रहा अमीर, टिकट बेचकर नहीं ऐसे कर डाली ₹6000 करोड़ से ज्यादा की कमाई; कौन-सा खजाना लगा हाथ?

    Updated: Mon, 20 Apr 2026 06:05 PM (IST)

    Indian Railway Salary: भारतीय रेलवे ने वित्त वर्ष 2025-26 में स्क्रैप बेचकर ₹6,813.86 करोड़ कमाए, जो ₹6,000 करोड़ के लक्ष्य से अधिक है। पिछले वर्ष भी ...और पढ़ें

    Indian Railway Income:  रविवार को सरकार ने जानकारी दी कि भारतीय रेलवे ने वित्त वर्ष 2025–26 में कबाड़ (स्क्रैप) बेचकर 6,813.86 करोड़ रुपए कमाए हैं, जो 6,000 करोड़ रुपए के लक्ष्य से अधिक है। इस उपलब्धि की खास बात यह है कि स्क्रैप बेचकर कमाई (मॉनिटाइजेशन) में रेलवे ने अपने लक्ष्य को काफी हद तक पार कर लिया है।

    पिछले वर्ष कितने हुई थी कमाई?

    इससे पहले 2024–25 में भी रेलवे ने 5,400 करोड़ रुपए के लक्ष्य के मुकाबले 6,641.78 करोड़ रुपए की कमाई की थी।लगातार मिल रही यह सफलता दिखाती है कि रेलवे अपने डिपो, यार्ड और वर्कशॉप में पड़े पुराने और बेकार सामान से सही कमाई कर रहा है।

    अधिकारियों के अनुसार, इस पहल से न सिर्फ रेलवे की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है, बल्कि इससे जगह भी खाली हो रही है और रीसाइक्लिंग के जरिए पर्यावरण को भी फायदा मिल रहा है। साथ ही, पुराने सामान के निपटान की पारदर्शी व्यवस्था से कामकाज और बेहतर हुआ है।

    और कहां से हुई है कमाई?

    स्क्रैप से कमाई के साथ-साथ टिकट के अलावा होने वाली आय (नॉन-फेयर रेवेन्यू - एनएफआर) भी रेलवे की वित्तीय स्थिति को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा रही है। स्टेशन विकास, विज्ञापन और रेलवे की संपत्तियों के व्यावसायिक उपयोग से होने वाली यह कमाई पिछले पांच साल में लगातार बढ़ी है।

    2021–22 में यह आय करीब 290 करोड़ रुपए थी, जो 2025–26 में बढ़कर 777.76 करोड़ रुपए हो गई, यानी करीब 168 प्रतिशत की बढ़त हुई।

    इनकम का रेलवे ने क्या किया?

    सरकार ने कहा कि इस अतिरिक्त आय से रेलवे आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और यात्रियों की सुविधाओं में निवेश कर रहा है। इनमें बेहतर स्टेशन सुविधाएं, साफ-सफाई, डिजिटल सेवाएं और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना शामिल है और यह सब बिना किराया बढ़ाए किया जा रहा है।

    नॉन-फेयर कमाई को और कैसे बढ़ा रहा है रेलवे?

    नॉन-फेयर कमाई बढ़ाने के लिए रेलवे ने स्टेशनों पर प्रीमियम ब्रांडेड दुकानों की शुरुआत भी की है। इसके तहत कंपनी के स्वामित्व वाली सिंगल-ब्रांड आउटलेट्स खोलने के लिए ठेके दिए गए हैं और अब तक 22 प्रीमियम ब्रांड्स को जगह दी जा चुकी है। इन दुकानों से यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी और रेलवे की आय भी बढ़ेगी।

    (आईएएनएस इनपुट के साथ)