Share Market में आई सुनामी के बीच मुंह के बल गिरा भारत का रुपया, डॉलर के मुकाबले 92.34 के निचले स्तर पर पहुंचा
Indian Rupee Hits All Time Low Against dollar: मिडिल ईस्ट में तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के कारण भारतीय रुपये ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 92. ...और पढ़ें
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Share Market में आई सुनामी के बीच मुंह के बल गिरा भारत का रुपया, डॉलर के मुकाबले 92.31 के निचले स्तर पर पहुंचा
नई दिल्ली। Indian Rupee Hits All Time Low Against dollar: मिडिल ईस्ट में आई तबाह से भारत के शेयर बाजार में भारी गिरावट देखी जा रही है। शेयर बाजार के अलावा इसका असर भारत के रुपये पर भी देखा जा रहा है। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले में आज भारतीय रुपये में बड़ी गिरावट देखी गई। सोमवार (9 मार्च) को भारतीय रुपया US डॉलर के मुकाबले 92.34 (Indian rupee hits record low) के ऑल-टाइम लो पर आ गया।
करेंसी में गिरावट भारत समेत उन देशों पर बढ़ते आर्थिक दबाव को दिखाती है जो एनर्जी इंपोर्ट पर बहुत ज्यादा निर्भर हैं। भारतीय रुपया 92.20 प्रति डॉलर पर खुला, जबकि पिछले सेशन में यह 91.74 पर था। शुरुआती ट्रेड में यह और गिरकर पिछले हफ्ते के अपने सबसे निचले स्तर 92.3025 को पार कर गई।
तेल के दामों में आई तेजी का रुपये पर दिखा असर
भारतीय रुपये में आई यह गिरावट इसलिए आई क्योंकि कच्चे तेल की कीमतों में इजाफा देखा गया है। इसका असर असर उभरते बाजारों की करेंसी पर पड़ा।
शुक्रवार (6 मार्च) के बंद भाव से 50 पैसे से ज्यादा की गिरावट, महीनों में एक दिन की सबसे बड़ी गिरावट में से एक है, जिससे रुपये पर बढ़ते दबाव का पता चलता है। युद्ध की वजह से ब्रेंट क्रूड 26.4% बढ़कर $117.16 प्रति बैरल हो गया था और एशियाई ट्रेडिंग में पहले यह $116.4 प्रति बैरल के आसपास ट्रेड कर रहा था।
ट्रेडर्स ने कहा कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने वोलैटिलिटी को रोकने के लिए शायद सेशन में पहले फॉरेन एक्सचेंज मार्केट में कदम रखा। मार्केट पार्टिसिपेंट्स के मुताबिक, माना जा रहा है कि सेंट्रल बैंक ने डोमेस्टिक स्पॉट मार्केट खुलने से पहले डॉलर बेचे, जिससे ऑफिशियल ओपनिंग से पहले रुपया लगभग 92.30 से 92.20 पर थोड़ी देर के लिए रिकवर हुआ।
एक बैंक के करेंसी ट्रेडर ने कहा, "जाहिर है, आज रुपये पर बहुत दबाव होगा। यह शायद एकतरफा होगा, और RBI को दखल देकर बाजार को शांत करना होगा।"
भारत दुनिया की तीसरा बड़ा क्रूड ऑयल इंपोर्टर
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा क्रूड ऑयल इंपोर्टर है, जिससे दुनिया भर में एनर्जी की कीमतों में होने वाले बदलावों के प्रति इकॉनमी बहुत सेंसिटिव हो जाती है। जब तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो भारत का इंपोर्ट बिल तेजी से बढ़ जाता है। क्योंकि तेल की कीमत US डॉलर में होती है, इसलिए कमजोर रुपये का मतलब है कि देश को उतना ही क्रूड ऑयल खरीदने के लिए लोकल करेंसी में और भी ज्यादा पेमेंट करना पड़ता है।
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