आम आदमी से लेकर शेयर बाजार के लिए अच्छी खबर, 8 साल के निचले स्तर पर पहुंची महंगाई दर, जुलाई में बड़ी गिरावट
Indias Retail Inflation जुलाई के महीने में खुदरा महंगाई दर में भारी गिरावट देखने को मिली है। इसके साथ ही भारत में खुदरा महंगाई दर जुलाई में घटकर 8 साल के निचले स्तर 1.55 प्रतिशत पर आ गई जो जून में 2.1 प्रतिशत थी। जनवरी 2019 के बाद यह पहली बार है जब खुदरा मुद्रास्फीति 2 प्रतिशत के निशान से नीचे आई है।

नई दिल्ली। अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर एक राहत भरी खबर आई है। दरअसल, भारत में खुदरा महंगाई दर जुलाई में घटकर 8 साल के निचले स्तर 1.55 प्रतिशत पर आ गई, जो जून में 2.1 प्रतिशत थी। यह जून 2017 के बाद सबसे कम है, जबकि जनवरी 2019 के बाद यह पहली बार है जब खुदरा मुद्रास्फीति 2 प्रतिशत के निशान से नीचे आई है।
खुदरा महंगाई की दर लगातार छह महीने से 4 प्रतिशत से बनी हुई है, और अप्रैल से अब तक एवरेज इंफ्लेशन 3 प्रतिशत से नीचे बना हुआ है। वहीं, खाद्य महंगाई लगातार दूसरे महीने नेगेटिव जोन में रही, इंडेक्स में 1.8 प्रतिशत की अधिक गिरावट दर्ज की गई, जबकि जून में यह -1.1 प्रतिशत थी।
महंगाई दर में गिरावट की वजह
खाद्य महंगाई दर में गिरावट की वजह मुख्यतः दालों, सब्जियों, अनाज, अंडों, चीनी और परिवहन लागत में कमी के कारण हुई। जुलाई में खाद्य मुद्रास्फीति का आंकड़ा जनवरी 2019 के बाद से सबसे कम है। ग्रामीण इलाके में महंगाई की दर जुलाई में 1.18 प्रतिशत रही, जो जून में 1.72 प्रतिशत थी, जबकि शहरी मुद्रास्फीति इसी अवधि में 2.56 प्रतिशत से घटकर 2.05 प्रतिशत हो गई।
सब्जियों की कीमतों में पिछले साल की तुलना में 20.7 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि दालों की कीमतों में 14 प्रतिशत की गिरावट आई। मांस और मछली की महंगाई दर में भी लगातार चौथे महीने गिरावट जारी रही। वहीं, फलों की मुद्रास्फीति पिछले महीने के 12.6 प्रतिशत की तुलना में बढ़कर 14.4 प्रतिशत हो गई, जबकि तेल और अन्य वसायुक्त पदार्थों की महंगाई दर 19.2 प्रतिशत रही।
महंगाई दर RBI के अनुमान के अनुसार
पिछले हफ्ते भारतीय रिज़र्व बैंक एमपीसी बैठक के दौरान पूरे वर्ष के लिए मुद्रास्फीति के अपने पूर्वानुमान को 3.7 प्रतिशत से घटाकर 3.1 प्रतिशत कर दिया। केंद्रीय बैंक को अब उम्मीद है कि दूसरी तिमाही में महंगाई की औसतन दर 2.1 प्रतिशत रहेगी, तीसरी तिमाही में बढ़कर 3.1 प्रतिशत हो जाएगी, और चौथी तिमाही में वित्त वर्ष के अंत 4.4 प्रतिशत पर होगी।
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