LIC का नया मास्टरस्ट्रोक! फिनटेक सेक्टर में उतरने की तैयारी; फोनपे-पेटीएम से होगा मुकाबला
भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) अपनी बढ़ती डिजिटल जरूरतों को पूरा करने के लिए फिनटेक सेक्टर में उतरने की तैयारी कर रहा है। कंपनी रणनीतिक निवेश या नई कं ...और पढ़ें

फिनटेक सेक्टर में उतरेगी एलआईसी

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
भाषा, नई दिल्ली। देश की सबसे बड़ी जीवन बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) अपनी बढ़ती डिजिटल जरूरतों को पूरा करने के लिए फाइनेंस टेक्नोलॉजी (फिनटेक) सेक्टर में उतरने की तैयारी कर रही है। कंपनी रणनीतिक निवेश के जरिये या नई कंपनी बनाकर फिनटेक कारोबार शुरू करने के विकल्पों पर विचार कर रही है। देश में पहले से बड़ी फिनटेक कंपनियों में फोनपे, पेटीएम, गूगलपे आदि मौजूद हैं।
कंपनी के सीईओ और एमडी आर दुरईस्वामी के अनुसार बदलते दौर की जरूरतों और इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए कंपनी वित्तीय प्रौद्योगिकी तथा बीमा प्रौद्योगिकी (इंश्योरटेक) कंपनियों के साथ मिलकर काम कर रही है।
साथ ही, एलआईसी विभिन्न संस्थानों में निवेश करने वाली बड़ी वित्तीय इकाई होने के नाते ऐसे विशेष उपक्रमों में रणनीतिक निवेश की संभावनाएं भी तलाश रही है, जिससे पॉलिसीधारकों के कोष पर बेहतर प्रतिफल प्राप्त किया जा सके।
क्या है कंपनी का प्लान?
दुरईस्वामी ने बताया कि एलआईसी प्रौद्योगिकी नवाचार अपनाने वाली शुरुआती इकाइयों में रही है। कंपनी ने अपने व्यावसायिक अनुप्रयोग विकसित करने के लिए सॉफ्टवेयर विकास केंद्र स्थापित किया है, जहां बड़ी संख्या में विशेषज्ञ कार्यरत हैं।
हालांकि, आधुनिक प्रौद्योगिकी ढांचे और नए डिजिटल मंचों के विकास के लिए बाहरी सूचना प्रौद्योगिकी सेवा प्रदाताओं का सहयोग भी लिया जाता है। दुरईस्वामी के अनुसार, एलआईसी अपने आंतरिक प्रौद्योगिकी दल और बाहरी प्रौद्योगिकी साझेदारों, दोनों की क्षमताओं का उपयोग कर रही है।
कर सकती है नई साझेदारी
कंपनी विभिन्न विकल्पों का मूल्यांकन कर रही है और भविष्य में किसी रणनीतिक साझेदारी या नई पहल की घोषणा कर सकती है। उनका कहना है कि एलआईसी का मुख्य उद्देश्य अपनी आईटी प्रणालियों का आधुनिकीकरण करना और प्रतिस्पर्धा के बीच अधिक चुस्त एवं प्रभावी बनना है।
केंद्र सरकार द्वारा भविष्य में एलआईसी में और हिस्सेदारी बेचने की संभावना पर उन्होंने कहा कि कंपनी इसके लिए पूरी तरह तैयार है। आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) की तैयारी के समय से ही ऐसी संभावित प्रक्रियाओं को ध्यान में रखा गया था।
सरकार करेगी हिस्सेदारी पर फैसला
दुरईस्वामी ने कहा कि हिस्सेदारी बिक्री का अंतिम निर्णय सरकार को लेना है और जब भी ऐसा होगा, एलआईसी उसके सफल क्रियान्वयन में पूरा सहयोग करेगी। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2022 में एलआईसी का आईपीओ आया था, जिसके माध्यम से सरकार ने लगभग 21,000 करोड़ रुपये जुटाए थे और कंपनी में अपनी 3.5 प्रतिशत हिस्सेदारी बेची थी।
इससे पहले एलआईसी पूर्ण रूप से केंद्र सरकार के स्वामित्व में थी। उन्होंने कहा कि सरकार सूचीबद्ध कंपनियों के लिए निर्धारित न्यूनतम सार्वजनिक हिस्सेदारी मानकों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन मौजूदा बाजार परिस्थितियों को देखते हुए उचित समय का इंतजार किया जा रहा है।
खबरें और भी
बोनस शेयर जारी करने की घोषणा
दुरईस्वामी ने कहा कि आईपीओ के बाद एलआईसी ने शेयरधारकों को बेहतर प्रतिफल देने की दिशा में कई कदम उठाए हैं। हाल ही में कंपनी ने एक के बदले एक बोनस शेयर जारी करने की घोषणा की और लाभांश में भी उल्लेखनीय वृद्धि की है।
निदेशक मंडल ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए प्रति शेयर 10 रुपये के अंतिम लाभांश की सिफारिश की है। एलआईसी ने मार्च तिमाही में 23 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 23,420 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित किया है, जो देश की किसी भी वित्तीय सेवा कंपनी द्वारा दर्ज किया गया सबसे बड़ा तिमाही मुनाफा है।
कमेंट्स
सभी कमेंट्स (0)
बातचीत में शामिल हों
कृपया धैर्य रखें।