होर्मुज की टेंशन के बीच इस राज्य से आई अच्छी खबर, बढ़ गया कच्चे तेल का उत्पादन; किसने किया ये कमाल?
राजस्थान के मंगला तेल क्षेत्र में तकनीकी नवाचार और रणनीतिक पुनर्विकास के माध्यम से कच्चे तेल उत्पादन में प्रतिदिन लगभग 2,000 बैरल की वृद्धि दर्ज की गई ...और पढ़ें

राजस्थान में बढ़ा कच्चे तेल का उत्पादन

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
भाषा, नई दिल्ली। वैश्विक तेल बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच घरेलू कच्चे तेल के उत्पादन को बढ़ावा देते हुए राजस्थान के मंगला तेल क्षेत्र से उत्पादन में प्रतिदिन लगभग 2,000 बैरल की वृद्धि हुई है। इस क्षेत्र का परिचालन करने वाली कपंनी के अधिकारियों के अनुसार कच्चे तेल के उत्पादन में यह बढोतरी तकनीकी इनोवेशन और रणनीतिक पुनर्विकास योजना के माध्यम से इस पुराने तेल क्षेत्र में होने वाली प्राकृतिक गिरावट को रोककर प्राप्त की गई है। उल्लेखनीय है कि मंगला तेल क्षेत्र की खोज 2004 में हुई थी और इससे उत्पादन 2009 में शुरू हुआ।
सबसे बड़े जमीनी तेल भंडारों में से एक
मंगला तेल क्षेत्र देश के सबसे बड़े जमीनी (ऑनशोर) तेल भंडारों में से एक है और इसने राजस्थान को एक प्रमुख कच्चा तेल उत्पादक क्षेत्र के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। हालांकि, प्राकृतिक रूप से भंडार कम होने के कारण इस क्षेत्र से उत्पादन समय के साथ घट रहा था, जिससे परिचालन संबंधी चुनौतियां पैदा हो रही थीं।
‘केयर्न आयल एंड गैस’ कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "पुनर्विकास रणनीति के तहत साइडट्रैकिंग जैसी प्रौद्योगिकी का उपयोग किया गया है-जिसमें मौजूदा कुओं को फिर से व्यवस्थित करके उन भंडारों तक पहुंचा जाता है जिनका पहले दोहन नहीं हुआ था-जिससे लागत और भूमि पर उसके असर, दोनों में कमी आती है।"
डेली कितना उत्पादन हो रहा?
केयर्न ने उत्पादन दर में सुधार करने और लंबे समय तक उत्पादन बनाए रखने के लिए 'विस्तारित तेल खोज' (ईओआर) के तरीके भी लागू किए जिनमें पॉलीमर इंजेक्शन और अल्कलाइन-सरफेक्टेंट-पॉलीमर (एएसपी) फ्लडिंग शामिल हैं।
अधिकारी के अनुसार, पुनर्विकसित कुओं में से केवल एक कुएं से ही शुरुआती चरण में प्रतिदिन लगभग 2,000 बैरल तेल मिलना शुरू हो गया जो इस पहल की सफलता का परिचायक है।
क्या है एक्सपर्ट्स का अनुमान?
विशेषज्ञों का कहना है कि पुराने जमीनी (भू स्थित) तेल क्षेत्रों से होने वाली इस तरह की क्रमिक वृद्धि, घरेलू उत्पादन को सहारा देकर, आयात पर निर्भरता कम करके और लागत को नियंत्रित करते हुए देश के लिए व्यावहारिक अल्पकालिक सहारा प्रदान कर सकती है
मंगला तेल क्षेत्र में उत्पादन के रुझान बताते हैं कि शुरुआती वर्षों में इसमें लगातार वृद्धि हुई जिसके बाद धीरे-धीरे गिरावट आई। विशेषज्ञों के अनुसार, पुराने जमीनी तेल क्षेत्रों में ऐसा होता ही है।
अब तक कितना तेल निकाला गया?
उल्लेखनीय है कि 2009 में उत्पादन शुरू होने के बाद से इस क्षेत्र से 50 करोड़ बैरल से अधिक कच्चा तेल निकाला जा चुका है। 2009 और 2014 के बीच उत्पादन काफी मज़बूत रहा और लगभग 2,00,000 बैरल प्रतिदिन के स्तर पर बना रहा।
हालांकि, 2015 से उत्पादन में गिरावट आने लगी और यह 1,30,000 से 170,000 बैरल प्रति दिन के बीच रहा। 2021 से 2025 तक यह गिरावट जारी रही जब दैनिक उत्पादन और गिरकर 1,00,000 से 80,000 बैरल के बीच पहुंच गया।
फिलहाल इस क्षेत्र से अनुमानित उत्पादन 80,000 बैरल प्रति दिन है। कंपनी के अधिकारी ने बताया कि कंपनी पुनर्विकास और उत्पादन बढ़ाने की उन रणनीतियों पर काम कर रही है जिनका दीर्घकालिक लक्ष्य उत्पादन को बढ़ाना है।
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