सर्च करे
Home

Trending

    loading ads...
    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    भारत की GDP को 1% का झटका! मिडिल ईस्ट वॉर से बढ़ेगी महंगाई, इन सेक्टर्स में जा सकती है नौकरी

    By Jagran BusinessEdited By: Ankit Kumar Katiyar
    Updated: Tue, 31 Mar 2026 10:05 PM (IST)

    मिडिल ईस्ट में जारी तनाव का भारत की अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता है। ईवाई की रिपोर्ट के अनुसार, यदि संघर्ष अगले वित्त वर्ष तक खिंचता है, तो भारत ...और पढ़ें

    News Article Hero Image

    मिडिल ईस्ट तनाव: भारत की जीडीपी को झटका, महंगाई बढ़ेगी, नौकरियों पर खतरा

    नई दिल्ली| मिडिल ईस्ट में जारी तनाव केवल सरहदों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर आपकी जेब और देश की रफ्तार पर पड़ने वाला है। दिग्गज कंसल्टेंसी फर्म ईवाई (EY) की ताजा 'इकोनॉमी वॉच' रिपोर्ट के मुताबिक, अगर यह संघर्ष अगले वित्त वर्ष तक खिंचता है, तो भारत की रियल जीडीपी (GDP) ग्रोथ में 1% तक की कटौती हो सकती है।

    महंगाई का डबल अटैक

    रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि इस युद्ध के कारण खुदरा महंगाई दर (Retail Inflation) तय अनुमान से 1.5% तक बढ़ सकती है। इसका मुख्य कारण कच्चे तेल की कीमतों में होने वाला उतार-चढ़ाव है। भारत अपनी जरूरत का लगभग 90% कच्चा तेल आयात करता है। साथ ही, हम नेचुरल गैस और खाद (फर्टिलाइजर) के लिए भी बाहरी देशों पर निर्भर हैं। ऐसे में ग्लोबल मार्केट में आने वाला कोई भी उछाल भारत में हर चीज महंगी कर देगा।

    इन सेक्टर्स पर गिरेगी गाज

    युद्ध का सबसे बुरा असर उन सेक्टर्स पर पड़ेगा जहाँ सबसे ज्यादा लोगों को रोजगार मिलता है। इनमें शामिल हैं:

    • कपड़ा (Textile) और पेंट्स
    • केमिकल और फर्टिलाइजर
    • सीमेंट और टायर इंडस्ट्री

    इन क्षेत्रों में उत्पादन लागत बढ़ने से मांग कम होगी, जिसका सीधा असर कमाई और नौकरियों पर पड़ सकता है। ईवाई ने पहले वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की विकास दर 6.8% से 7.2% रहने का अनुमान लगाया था, लेकिन अब इसमें बड़ी गिरावट की आशंका है।

    यह भी पढ़ें- Toll Plaza New Rules: 1 अप्रैल से बदल रहा टोल का नियम, बिना Fastag बैलेंस के हाइवे पर चढ़े तो लगेगा भारी जुर्माना!

    बाकी संस्थाओं ने भी चेताया

    सिर्फ ईवाई ही नहीं, बल्कि OECD ने भी हाल ही में अनुमान जताया है कि अगले वित्त वर्ष में भारत की जीडीपी ग्रोथ गिरकर 6.1% रह सकती है, जो चालू वित्त वर्ष के 7.6% के मुकाबले काफी कम है।

    साफ़ है कि दुनिया के एक हिस्से में चल रही जंग भारत की सप्लाई चेन, ट्रांसपोर्ट और एनर्जी मार्केट के लिए बड़ा सिरदर्द बनने वाली है। स्थिति सुधरने में अभी वक्त लग सकता है।