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    126 साल पुराने Murugappa ग्रुप के होंगे टुकड़े, 5वीं पीढ़ी बांटेगी विरासत; भारत में 33वां सबसे अमीर है ये परिवार

    Updated: Thu, 26 Feb 2026 11:44 AM (IST)

    भारत की 33वीं सबसे अमीर मुरुगप्पा फैमिली (Murugappa Family) में बड़ा बंटवारा हो रहा है। दो साल की बातचीत के बाद, वेल्लयन सुब्बैया चोलामंडलम इन्वेस्टमे ...और पढ़ें

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    126 साल पुराने मुरुगप्पा ग्रुप में होने जा रहा बंटवारा

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    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    नई दिल्ली। भारत की 33वीं सबसे अमीर फैमिली मुरुगप्पा फैमिली (Murugappa Group Divison) में बंटवारा हो रहा है। इस परिवार की नेटवर्थ 75,440 करोड़ रुपये के आस-पास है। वहीं दक्षिण भारत में परिवार के Murugappa Group का काफी दबदबा है। मुरुगप्पा ग्रुप, जिसमें फर्टिलाइजर, इंजीनियरिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज, एब्रेसिव्स, शुगर और मोबिलिटी सॉल्यूशंस की लगभग 30 कंपनियां शामिल हैं, एक लंबे समय से चले आ रहे गवर्नेंस चार्टर के तहत काम करता है जो ओनरशिप को मैनेजमेंट से अलग करता है। अब बंटवारे के तहत कुछ बड़े बदलाव होने जा रहे हैं। आइए जानते हैं इन बदलावों के बारे में।

    वेल्लयन सुब्बैया के लिए रास्ता साफ

    मुरुगप्पा ग्रुप के वारिस वेल्लयन सुब्बैया (Vellayan Subbiah) ने ग्रुप की खास कंपनियों में ओनरशिप को फिर से अलाइन करने के लिए दूसरी प्रमोटर ब्रांच के साथ एक सेटलमेंट किया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस एग्रीमेंट से उनके लिए चोलामंडलम इन्वेस्टमेंट एंड फाइनेंस में हिस्सा बेचने का रास्ता साफ हो गया है।
    इसके साथ ही वे ट्यूब इन्वेस्टमेंट्स ऑफ इंडिया और CG पावर एंड इंडस्ट्रियल सॉल्यूशंस में अपनी पोजीशन मजबूत कर पाएंगे।

    126 साल पुराना है ग्रुप

    मुरुगप्पा परिवार मुरुगप्पा ग्रुप को कंट्रोल करता है, जो 9 बिलियन डॉलर (81800 करोड़ रुपये) रेवेन्यू का ग्रुप है। इसकी शुरुआत सन 1900 में म्यांमार में एक मनी-लेंडिंग फर्म के तौर पर हुई थी।

    2 साल से चल रही बातचीत

    बंटवारे के तहत चीजें फाइनल करने के लिए दो साल से ज्यादा समय से बातचीत चल रही है। अब फाइनल हुआ यह अरेंजमेंट, मुरुगप्पा परिवार के एक बड़े प्लान का हिस्सा है। इसमें बिजनेस कंटिन्यूटी बनाए रखते हुए सवा सौ साल पुराने ग्रुप की ओनरशिप तीन प्रमोटर ग्रुप में बांटने की बात है।
    सेटलमेंट के तहत, सुब्बैया चोलामंडलम इन्वेस्टमेंट (ग्रुप की मेन लेंडिंग ब्रांच) में अपना एक्सपोजर छोड़ देंगे और इसके बजाय ट्यूब इन्वेस्टमेंट्स और CG पावर के साथ अपना अलाइनमेंट बनाए रखेंगे और उसे और मजबूत करेंगे, जिसमें एक्सटेंडेड प्रमोटर स्ट्रक्चर के तहत उन कंपनियों से जुड़े स्टेक लेना या बनाए रखना शामिल है।

    5वीं पीढ़ी संभाल रही बिजनेस

    यह बदलाव या बंटवारा फैमिली होल्डिंग कंपनी अंबाडी इन्वेस्टमेंट्स के जरिए पाँच पीढ़ियों तक जॉइंट ओनरशिप के बाद होने जा रहा है। अलग-अलग तरह के बिजनेस एम्पायर को कैसे बाँटा जाए, इस पर लंबी अंदरूनी बातचीत के बाद फैसला हुआ है।
    मुरुगप्पा कंपनियों में प्रमोटर ओनरशिप अधिकतर इंडिविजुअल शेयरहोल्डिंग के बजाय होल्डिंग व्हीकल्स (स्पेशल कंपनियां) के जरिए होती है। चोलामंडलम इन्वेस्टमेंट में प्रमोटर ग्रुप की लगभग 51-52 फीसदी हिस्सेदारी मौजूदा मार्केट लेवल पर लगभग ₹55,000–₹60,000 करोड़ की है।
    वहीं ट्यूब इन्वेस्टमेंट्स में, लगभग 45-46 फीसदी प्रमोटर ओनरशिप लगभग ₹20,000–₹22,000 करोड़ की है। CG पावर में ट्यूब इन्वेस्टमेंट्स की कंट्रोलिंग पोजीशन के जरिए, प्रमोटर ग्रुप के पास कंपनी का लगभग 58-59 फीसदी हिस्सा है, जिसकी कीमत लगभग ₹45,000–₹50,000 करोड़ है।

    और किन कंपनियों में है परिवार की हिस्सेदारी?

    मुरुगप्पा परिवार के पास कोरोमंडल इंटरनेशनल में लगभग 56-57 फीसदी हिस्सेदारी है, जिसकी वैल्यू लगभग ₹18,000-₹20,000 करोड़ है। साथ ही कार्बोरंडम यूनिवर्सल में लगभग 42-43 फीसदी हिस्सेदारी की वैल्यू ₹9,000-₹10,000 करोड़ है, और EID पैरी में लगभग 44-45 फीसदी हिस्सेदारी की वैल्यू लगभग ₹3,500-₹4,000 करोड़ है।
    इसी तरह ट्यूब इन्वेस्टमेंट्स की भी इनडायरेक्टली शांति गियर्स में लगभग 70 फीसदी हिस्सेदारी है, जिसकी वैल्यू लगभग ₹2,500-₹3,000 करोड़ है।

    ये हुआ है आखिरी फैसला

    डील में आखिरी मगर अहम अरेंजमेंट ओनरशिप को ऑपरेशनल लीडरशिप के साथ जोड़ता हुआ लग रहा है। दरअसल सुब्बैया (परिवार की चौथी पीढ़ी के सदस्य) को ग्रुप में CG पावर को फिर से खड़ा करने और ट्यूब इन्वेस्टमेंट्स को नए मैन्युफैक्चरिंग और मोबिलिटी सेगमेंट में बढ़ाने का क्रेडिट मिला है। इससे ये बिजनेस नए स्ट्रक्चर के तहत उनके प्रमोटर ब्लॉक के लिए नैचुरल एंकर बन गए।

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