'₹1.20 लाख कट चुके, लेकिन...', आठवें वेतन आयोग के बीच NPS पर छिड़ी नई बहस; OPS बहाली की मांग क्यों कर रहे कर्मचारी?
NPS vs OPS 8th Pay commission: आठवें वेतन आयोग के बीच एनपीएस और ओपीएस पर नई बहस छिड़ गई है, जिसमें कर्मचारी पुरानी पेंशन योजना की बहाली की मांग कर रहे ...और पढ़ें
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आठवें वेतन आयोग के बीच NPS पर छिड़ी नई बहस; OPS बहाली की मांग क्यों कर रहे कर्मचारी?

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
नई दिल्ली| "एनपीएस अकाउंट से अब तक 1.20 लाख रुपए कट चुके हैं। जिसमें अब तक सिर्फ 3000 रुपए की बढ़त हुई है। अगर ऐसे ही चलता रहा तो स्कीम का पूरा पैसा ही डूब जाएगा।"
ये कहना है कि एक सरकारी कर्मचारी का, जिसकी चैट का स्क्रीन शॉट ऑल इंडिया एनपीएस इंप्लॉई फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मंजीत सिंह पटेल (Dr Manjeet Singh Patel NPS) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शेयर किया। उन्होंने पोस्ट करते हुए लिखा कि NPS यानी नेशनल पेंशन सिस्टम कोई योजना नहीं बल्कि भविष्य में होने वाला एक बड़ा 'वित्तीय स्कैम' साबित हो सकता है।
डॉ. पटेल ने जागरण बिजनेस से खास बातचीत में इसका (NPS vs OPS) पूरा गणित भी समझाया। साथ ही, कर्मचारी OPS यानी ओल्ड पेंशन स्कीम की बहाली की मांग क्यों कर रहे हैं, यह भी बताया।
NPS का सबसे बड़ा लूपहोल क्या है?
डॉ. मंजीत सिंह पटेल के अनुसार, एनपीएस का सबसे बड़ा लूपहोल इसका शेयर बाजार (Equity) से जुड़ा होना है। उन्होंने बताया,
"पिछले दो सालों से मार्केट का हाल बुरा है, जिसका सीधा असर कर्मचारियों के फंड पर पड़ रहा है। किसी को हजारों तो किसी को लाखों की चपत लग चुकी है। सवाल यह है कि जब बैंक हमसे लोन पर फिक्स ब्याज लेते हैं, तो हर महीने कर्मचारियों की जेब से जाने वाले ₹12000 करोड़ से ज्यादा के फंड पर एक परसेंट भी गारंटीड रिटर्न क्यों नहीं देते?"
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NPS vs OPS: दोनों में क्या अंतर?
डॉ. पटेल ने बहुत ही सरल भाषा में समझाया कि आखिर कर्मचारी पुरानी पेंशन (OPS) के लिए इतने अडिग क्यों है:
- पैसे की कटौती: ओपीएस में कर्मचारी की सैलरी से कोई पैसा नहीं कटता था, जबकि एनपीएस में कर्मचारी की बेसिक सैलरी और डीए का 10% कटता है और सरकार 14% मिलाती है।
- गारंटी: ओपीएस में पेंशन की राशि तय होती थी। जीपीएफ (GPF) पर 7.1% ब्याज की गारंटी थी, चाहे मार्केट गिरे या बढ़े। एनपीएस में रिटर्न पूरी तरह बाजार के जोखिम पर है। यानी जब बाजार चढ़ेगा तो प्रॉफिट मिलेगा और अगर बाजार गिरता है तो नुकसान होना तय है।
- पहुंच: ओपीएस का पैसा (GPF) कर्मचारी जरूरत पड़ने पर निकाल सकता था, लेकिन एनपीएस का बड़ा हिस्सा रिटायरमेंट तक ब्लॉक रहता है।
2033 में आ सकता है बड़ा संकट?
डॉ. पटेल ने एक डराने वाली आशंका जाहिर की है। उन्होंने कहा कि,
2004 में भर्ती हुए लोग 2033-34 के आसपास रिटायर होंगे। उस समय लाखों लोग एक साथ अपना पैसा (60% विदड्रॉल) निकालेंगे। इतनी बड़ी रकम जब बाजार से बाहर आएगी, तो मार्केट खुद-ब-खुद नीचे गिर जाएगा। इसके अलावा, बैंक और फंड मैनेजर्स जानबूझकर उस समय यूनिट की वैल्यू गिरा सकते हैं ताकि उन्हें कम भुगतान करना पड़े। यह उन कर्मचारियों के साथ धोखा होगा जिन्होंने 30 साल मेहनत की।"
यूनिट का खेल: एक झटके में डूबते हैं लाखों
मार्केट के उतार-चढ़ाव को समझाते हुए उन्होंने बताया कि अगर किसी कर्मचारी के पास 50 लाख की वैल्यू के यूनिट्स हैं और वैश्विक तनाव (जैसे अमेरिका-ईरान युद्ध की धमकी) के कारण यूनिट की कीमत ₹50 से घटकर ₹42 रह जाती है, तो एक ही रात में उस कर्मचारी के ₹8 लाख कम हो जाते हैं। रिटायरमेंट के ठीक पहले ऐसी गिरावट किसी के बुढ़ापे की लाठी तोड़ सकती है।
NPS से क्यों हो रहा है नुकसान?
- कोई न्यूनतम गारंटी नहीं: सीएजी (CAG) ने 2020 में 'मिनिमम एश्योर्ड रिटर्न सिस्टम' (MARS) लागू करने की सिफारिश की थी, जिसे अभी तक अनसुना किया गया है।
- फंड मैनेजर्स का दबदबा: एलआईसी, एसबीआई और यूटीआई जैसे फंड मैनेजर पैसा तो लेते हैं, लेकिन घाटे की जिम्मेदारी कर्मचारी की होती है।
- अनिश्चितता: ग्लोबल इमरजेंसी (जैसे रूस-यूक्रेन युद्ध) के समय फंड की वैल्यू तेजी से घटती है, जिससे कर्मचारी हमेशा तनाव में रहता है।
UPS में भी दो बड़े लूपहोल
डॉ. मंजीत पटेल ने बताया कि सरकार ने साल 2025 में NPS के अंतर्गत यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) शुरू की थी, लेकिन इसमें अभी भी दो बड़े लूपहोल हैं।
- पहला लूपहोल- कर्मचारी 20 साल की सेवा पूरी करने के बाद वॉलंटरी रिटायरमेंट (VRS) ले सकता है। लेकिन पेंशन का भुगतान तुरंत नहीं मिलता। उसे तब तक इंतजार करना पड़ता है जब तक वह 60 साल की उम्र (सुपरएन्यूएशन की आयु) नहीं पहुंच जाता। उदाहरण के लिए, 21 साल की उम्र में नौकरी शुरू करने वाला कर्मचारी 46 साल में VRS लेने पर 14 साल तक पेंशन के लिए इंतजार करेगा। इससे योजना व्यावहारिक नहीं रह जाती।
- दूसरा लूपहोल- सरकार 50% पेंशन के लिए 25 साल की सेवा को अनिवार्य (compulsory) मानती है। अगर सेवा 25 साल से कम है तो पेंशन आनुपातिक (proportionate) रूप में मिलती है, जो काफी कम हो जाती है। ये दोनों कमियां कर्मचारियों के लिए UPS को कम आकर्षक बनाती हैं। उदाहरण के लिए, अगर कोई कर्मचारी 20 साल की उम्र में कॉन्ट्रैक्चुअल नौकरी जॉइन करता है। उन्होंने 20 साल नौकरी की, जिसके बाद सरकार ने उन्हें परमानेंट कर दिया। तो इस हिसाब से उनकी परमानेंट नौकरी 25 साल हो ही नहीं पाएगी। जिससे उन्हें पूरी पेंशन का लाभ नहीं मिल पाएगा।
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डॉ. पटेल ने सरकार के सामने क्या रखी मांग?
डॉ. मंजीत सिंह पटेल ने स्पष्ट किया कि ऑल इंडिया एनपीएस इंप्लॉई फेडरेशन की मांग जायज है। उन्होंने कहा,
हम सिर्फ यह चाहते हैं कि हमारे हिस्से के पैसे पर कम से कम ब्याज की गारंटी तो मिले। जब तक सरकार ओपीएस बहाल नहीं करती या पूर्ण सामाजिक सुरक्षा की गारंटी नहीं देती, कर्मचारियों का यह संघर्ष जारी रहेगा।"
पिछले लगभग दो वर्षों से शेयर मार्केट का हाल खराब है जिसका #NPS पर सीधा सीधा नकारात्मक असर पड़ रहा है। किसी को हजारों में तो किसी को लाखों में चपत लग चुकी है। मुद्दा यह है कि जब वर्ष 2033 में बड़े पैमाने पर रिटायरमेंट शुरू होंगे तब बड़ी विदड्रावल अमाउंट के चलते भी और स्कैम से भी… pic.twitter.com/F6ehwMUxHa
— Dr Manjeet Singh Patel (@ManjeetIMOPS) April 21, 2026
बता दें कि आठवें वेतन आयोग के बीच देशभर के लाखों सरकारी कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना (OPS) और नेशनल पेंशन स्कीम (NPS) की बहस एक बार फिर तेज हो गई है। कर्मचारियों की मांग है कि आठवें वेतन आयोग में OPS को भी बहाल किया जाए।
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