'RAC बर्थ वालों के साथ नहीं हो रहा न्याय', किराया फुल लेकिन सीट आधी; संसद में उठा मुद्दा, अब मिलेगा रिफंड!
संसद की पब्लिक अकाउंट्स कमेटी (PAC) ने RAC टिकट धारकों को पूरा किराया लेने के बावजूद आधी सीट मिलने पर आपत्ति जताई है। समिति ने रेलवे को सुझाव दिया है ...और पढ़ें

'RAC बर्थ वालों के साथ नहीं हो रहा न्याय', किराया फुल लेकिन सीट आधी; संसद में उठा मुद्दा, अब मिलेगा रिफंड!
नई दिल्ली। ट्रेन की RAC टिकट मुद्दा देश की संसद में उठा है। इस पर संसद की पब्लिक अकाउंट्स कमेटी (PAC) ने आपत्ति जताते हुए रेलवे सुझाव दिया है। दरअसल, वर्तमान में अगर आप ट्रेन की कोई टिकट बुक करते हैं और वह टिकट RAC होती है तो आपको आधी सीट मिलती है। अगर आप ट्रेन से ट्रेवल करते हैं तो आपको सीट तो आधी मिलती है, लेकिन किराया पूरा देना पड़ता है। अब इसी मुद्दे को लेकर संसद की पब्लिक अकाउंट्स कमेटी ने आपत्ति जताते हुए रेलवे से इसमें बदलाव करने को कहा है।
प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (PTI) की एक रिपोर्ट के अनुसार, संसद की पब्लिक अकाउंट्स कमेटी (PAC) ने इस पर आपत्ति जताई है और रेलवे को एक विकल्प सुझाया है।
संसदीय समिति ने रेलवे को दिया सुझाव
एक संसदीय समिति ने रेल मंत्रालय को सुझाव दिया है कि RAC (रिजर्वेशन अगेंस्ट कैंसलेशन) यात्रियों को टिकट किराए का आंशिक रिफंड देने के लिए एक सिस्टम बनाया जाए, जिनसे पूरा किराया लिया जाता है लेकिन यात्रा के दौरान उन्हें पूरी बर्थ नहीं मिलती है।
संसदीय समिति ने कहा, "कमेटी को यह भी लगता है कि RAC के तहत टिकटों के लिए पूरा किराया लेना और जहां टिकट होल्डर चार्ट बनने के बाद भी बिना बर्थ की सुविधा के RAC कैटेगरी में रहता है, वह सही नहीं है और इसलिए, वे चाहते हैं कि मंत्रालय एक ऐसा सिस्टम बनाए जिससे उन कस्टमर/यात्रियों को आंशिक किराया वापस किया जा सके जिन्हें पूरी बर्थ नहीं मिली, लेकिन बोर्डिंग के समय पूरा किराया देना पड़ा।"
अभी IRCTC के अनुसार, RAC ई-टिकट पर किराए का कोई रिफंड नहीं मिलेगा, अगर ट्रेन के तय समय पर निकलने से 30 मिनट पहले तक टिकट कैंसिल नहीं किया जाता है या ऑनलाइन TDR फाइल नहीं किया जाता है।
पिछले कुछ सालों में रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर और टेक्नोलॉजी में हुए सुधारों को देखते हुए, कमेटी ने पाया कि यह बेंचमार्क बहुत कम और पुराना है। उसने बताया कि 2007 के बाद से इस क्राइटेरिया में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
सुपरफास्ट ट्रेनों के टैग पर कमेटी ने क्या कहा?
इतना ही नहीं, कमेटी ने रेलवे को सुपर फास्ट ट्रेनों की मौजूदा स्पीड के क्राइटेरिया को रिव्यू करने का भी सुझाव दिया है, यह कहते हुए कि 2007 में तय की गई लिमिट अब पुरानी हो गई हैं।
PTI के अनुसार, रिपोर्ट में बताए गए ऑडिट नतीजों के मुताबिक, अभी चल रही 478 सुपरफास्ट ट्रेनों में से 123 ट्रेनें 55 किमी प्रति घंटे से कम की तय स्पीड पर चलती हैं, जिससे यह सवाल उठता है कि क्या वे सच में सुपरफास्ट टैग के लायक हैं।
अगर कमेटी की सिफारिशों को लागू किया जाता है, तो इससे RAC पैसेंजर के लिए कीमतें ज्यादा सही हो सकती हैं और ट्रेन क्लासिफिकेशन में ज्यादा पारदर्शिता आ सकती है। इससे न सिर्फ पैसेंजर की संतुष्टि बेहतर होगी, बल्कि यह भी पक्का होगा कि टिकट का किराया असल यात्रा अनुभव को दिखाए।
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