RBI MPC Meeting आज से हुई शुरू, क्या इस बार मिलेगी EMI में राहत; क्या कह रहे हैं एक्सपर्ट
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की आज मौद्रिक समिति (RBI MPC Meeting) की बैठक शुरू हो गई है। ये बैठक तीन दिन तक चलेगी। इस बैठक के दौरान आरबीआई रेपो रेट (RBI Rep ...और पढ़ें
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नई दिल्ली। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की आज मौद्रिक समिति की बैठक शुरू हो गई है। ये बैठक तीन दिन तक चलेगी। इस बैठक के दौरान आरबीआई रेपो रेट सहित वित्तीय संबंधित कई महत्वपूर्ण फैसले लेगा। रेपो रेट का सीधा असर आपके ईएमआई पर पड़ता है। इसलिए सभी की निगाहे एमपीसी मीटिंग पर टिकी हुई है।
Repo Rate अब तक कितना हुआ कम?
| तारीख | रेपो रेट | बदलाव |
| 7 फरवरी | 6.25% | -0.25% |
| 9 अप्रैल | 6.00% | -0.25% |
| 6 जून | 5.50% | -0.50% |
| अगस्त | 5.50% | कोई बदलाव नहीं |
| 1 अक्टूबर | 5.50% | कोई बदलाव नहीं |
| 5 दिसंबर | 5.25% | -0.25% |
अगर पिछले फरवरी से देखें तो आरबीआई द्वारा अब तक 1.25 की कटौती की जा चुकी है। इसलिए कई विशेषज्ञों का ये मानना है कि आरबीआई इस बार रेपो रेट में किसी भी तरह का बदलाव नहीं करेगा।
क्या कह रहे हैं एक्सपर्ट?
बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कहा, " इस बार एमपीसी द्वारा रेपो रेट में बदलाव करने की संभावना कम है यह ब्याज दर में कटौती के दौर का अंत भी हो सकता है।"
उन्होंने आगे कहा कि इसका कारण यह है कि बॉन्ड यील्ड से संकेत मिलता है कि अब ब्याज दरों में कोई कमी नहीं आएगी, क्योंकि सरकार का उधार कार्यक्रम पिछले वर्ष के समान ही है।
क्या होता है Repo Rate?
देश की केंद्रीय बैंक, एक साल में हर दो महीने बाद मौद्रिक समिति की बैठक आयोजित करती है। इस बैठक के दौरान रेपो रेट और अन्य वित्तीय संबंधित निर्णय लिए जाते हैं। रेपो रेट वो दर है, जिसके आधार पर वाणिज्यिक बैंक आरबीआई से लोन लेते हैं। हालांकि रेपो रेट के आधार पर बैंक आरबीआई से शॉर्ट टर्म लोन ही ले पाते हैं।
अब ये समझते हैं कि ये आप कैसे असर करेगा?
Repo Rate Cut क्या करेगा असर?
अगर रेपो रेट में कटौती होती है, तो बैंकों को लोन कम ब्याज पर मिलेगा। फिर आपको भी कम ब्याज पर लोन उपलब्ध कराया जाएगा।
ऐसी ही अगर रेपो रेट में बढ़ोतरी होती है, तो बैंक को लोन लेना महंगा पड़ेगा। इससे आपका भी लोन ब्याज दर बढ़ जाएगा। ब्याज दर बढ़ने से आपकी ईएमआई भी महंगी हो जाएगी।
हालांकि ये बैंकों पर भी निर्भर करता है कि रेपो रेट में कटौती के बाद वे फिक्स्ड ब्याज दर कम करना चाहते हैं या नहीं।
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