क्या होता है Repo Rate जिसे लेकर RBI लेगा फैसला, आप पर कैसे पड़ता है असर?
RBI Repo Rate: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) हर दो महीने में मौद्रिक समिति (RBI MPC Meeting) की बैठक आयोजित करता है, जिसमें रेपो रेट पर निर्णय लिया जाता है ...और पढ़ें
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RBI Repo Rate: रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया हर दो महीने में मौद्रिक समिति (RBI MPC Meeting की बैठक आयोजित करता है। इस बैठक के दौरान वित्तीय संबंधित कई महत्वपूर्ण फैसले लिए जाते हैं। इसके साथ ही यह भी फैसला लिया जाता है कि रेपो रेट में कोई बदलाव करना है या नहीं।
अगले महीने आरबीआई की मौद्रिक समिति की बैठक है। इससे पहले फरवरी में ये बैठक आयोजित की गई थी। अब सवाल ये है कि रेपो रेट आम आदमी के लिए कैसे जरूरी है। हर व्यक्ति का इसके बारे में जानना क्यों जरूरी है। सबसे पहले जानते हैं कि रेपो रेट क्या है?
Repo Rate क्या है
रेपो रेट वह दर है, जिसके तहत वाणिज्यिक बैंक, केंद्रीय बैंक लोन लेता है। रेपो रेट के जरिए बैंक शॉर्ट टर्म लोन प्रदान करता है। इस दर के आधार पर ही केंद्रीय बैंक महंगाई को नियंत्रण करने का भी काम करता है। केंद्रीय बैंक, आरबीआई हर दो महीने में मौद्रिक समिति की बैठक आयोजित करता है। इस बैठक के दौरान रेपो रेट में बदलाव को लेकर भी फैसला लिया जाता है।
आपकी EMI कैसे कम होती है?
- अगर रेपो रेट में बढ़ोतरी आती है तो बैंक को लोन महंगा मिलता है। इस तरह से आम जनता को भी ज्यादा ब्याज पर लोन लेना पड़ता है।
- इसी तरह अगर रेपो रेट में कमी आती है तो बैंक को लोन कम ब्याज पर मिलता है। इसी तरह आम जनता को भी कम ब्याज पर लोन मिलता है और इस तरह उनकी ईएमआई भी कम हो जाती है।
- अगर आपने लोन फ्लोटिंग रेट पर लिया हो तो रेपो रेट में होने वाले बदलाव का डायरेक्ट प्रभाव आपकी ईएमआई पर पड़ता है। हालांकि अगर आपने फिक्स्ड ब्याज दर पर लोन लिया है तो इसका डायरेक्ट प्रभाव नहीं पड़ता है। यह बैंक पर निर्भर करता है कि वे ब्याज दर में बदलाव करेगा या नहीं।
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