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    RBI की कमजोर मानसून पर बड़ी चेतावनी, अमेरिका-ईरान समझौते में अड़चन से मंडरा रहा महंगाई का साया, कैसे बिगड़ सकता है बजट?

    By Jagran BusinessEdited By: Ashish Kushwaha
    Updated: Mon, 22 Jun 2026 10:12 PM (IST)

    आरबीआई बुलेटिन ने अमेरिका-ईरान शांति समझौते में संभावित व्यवधान और कमजोर दक्षिण-पश्चिम मानसून से भारत की आर्थिक वृद्धि और मुद्रास्फीति पर दबाव पड़ने क ...और पढ़ें

    महंगाई का नया झटका! पेट्रोल-डीजल और सब्जियों के बाद अब क्यों डरा रही है RBI की यह रिपोर्ट?

    महंगाई का नया झटका! पेट्रोल-डीजल और सब्जियों के बाद अब क्यों डरा रही है RBI की यह रिपोर्ट?

    HighLights

    1. कमजोर मानसून से भारत की आर्थिक वृद्धि पर दबाव।

    2. अमेरिका-ईरान समझौते में व्यवधान से महंगाई बढ़ने का खतरा।

    3. वैश्विक अर्थव्यवस्था की नाजुक स्थिति, भू-राजनीतिक तनाव जारी।

    अमेरिका-ईरान शांति समझौते में संभावित व्यवधान और दक्षिण-पश्चिम मानसून की कमजोरी से भारत की आर्थिक वृद्धि एवं मुद्रास्फीति के परिदृश्य पर दबाव पड़ सकता है जबकि वैश्विक अर्थव्यवस्था अब भी नाजुक बनी हुई है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के एक बुलेटिन में सोमवार को यह आशंका जताई गई। जून माह के बुलेटिन में ‘अर्थव्यवस्था की स्थिति’ शीर्षक से प्रकाशित लेख में कहा गया है कि पश्चिम एशिया में अंतरिम शांति समझौता होने के बावजूद भू-राजनीतिक तनाव और व्यापार से जुड़े गतिरोध कायम हैं। बुलेटिन के मुताबिक, अमेरिका एवं ईरान के बीच अस्थायी समझौते से कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन वैश्विक आर्थिक परिदृश्य अब भी कमजोर बना हुआ है।

    लेख में कहा गया, ‘‘अगर यह समझौता टूटता है तो महंगाई के अनुमानों में उछाल, ऊर्जा आपूर्ति ढांचे में बाधा, निवेश में देरी, खाद्य सुरक्षा संबंधी चिंताएं और वित्तीय स्थिरता पर असर जैसे जोखिम फिर से बढ़ सकते हैं, जिससे वृद्धि दर पर भी दबाव आ सकता है।’’

    इस चुनौतीपूर्ण वैश्विक माहौल के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था ने 2025-26 की चौथी तिमाही में 7.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की, जिसे निजी खपत और स्थायी निवेश से समर्थन मिला। आरबीआई बुलेटिन के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 के शुरुआती दो महीनों के उच्च-आवृत्ति संकेतक आर्थिक गतिविधियों में निरंतर मजबूती का संकेत देते हैं।

    हालांकि, मई में कुछ तेजी के बावजूद उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित खुदरा मुद्रास्फीति नियंत्रित दायरे में बनी हुई है। प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) प्रवाह और पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार के चलते भारत का बाहरी क्षेत्र मजबूत बना हुआ है। लेख कहता है, ‘‘मौजूदा वैश्विक अस्थिरता के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था ने झटके सहने के मामले में कई दूसर देशों की तुलना में मजबूत बुनियादी स्थिति के साथ इस दौर में कदम रखा।’’

    हालांकि, वाणिज्यिक एलपीजी कीमतों में बढ़ोतरी का असर ‘रेस्तरां और आवास सेवाओं’ श्रेणी में महंगाई बढ़ने के रूप में दिखा। मई में 12 में से आठ श्रेणियों में महंगाई में क्रमिक बढ़ोतरी दर्ज की गई। खाद्य एवं पेय महंगाई में भी बढ़ोतरी देखी गई, जिसका कारण गर्मियों के दौरान असामान्य मौसमी रुझान रहा।

    चावल, गेहूं एवं दालों की कीमतों में तेजी आई, जबकि आलू, प्याज एवं टमाटर जैसी प्रमुख सब्जियों के दाम भी बढ़े। खाद्य तेलों की कीमतों में भी मासिक आधार पर खासी तेजी देखी गई। ऊर्जा आपूर्ति शृंखला में गतिरोध की वजह से कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहीं, लेकिन जून में इनमें कुछ नरमी आई।

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    अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उछाल का आंशिक असर खुदरा कीमतों पर भी पड़ा, जिसके तहत मई में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में चार बार में क्रमशः लगभग 7.5 रुपये और 7.6 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की गई। केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया कि बुलेटिन में व्यक्त विचार लेखकों के निजी मत हैं और ये आरबीआई के आधिकारिक विचार नहीं हैं।

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