Repo Rate क्या होता है? आपकी EMI कैसे हो जाती है कम या ज्यादा; यहां जानें सब
इस महीने आरबीआई ने रेपो रेट (RBI Repo Rate) में कोई भी बदलाव न करने का फैसला लिया है। रेपो रेट पहले की तरह 5.25 फीसदी रहेगा। अक्सर रेपो रेट से जुड़ी ख ...और पढ़ें

नई दिल्ली। आरबीआई के फैसले से पहले ही कई कयास लगाए जा चुके थे कि इस बार रेपो रेट में किसी भी तरह का बदलाव नहीं होगा। इस खबर को सुनकर आम जनता के मन में ये सवाल उठ रहे हैं कि आखिर ये रेपो रेट क्या है और इसके बदलने और न बदलने से हम पर कैसे असर हो रहा है?
सबसे पहले ये समझते हैं कि रेपो रेट क्या (What is Repo Rate) होता है?
क्या होता है Repo Rate?
देश की केंद्रीय बैंक, एक साल में हर दो महीने बाद मौद्रिक समिति की बैठक आयोजित करती है। इस बैठक के दौरान रेपो रेट और अन्य वित्तीय संबंधित निर्णय लिए जाते हैं। रेपो रेट वो दर है, जिसके आधार पर वाणिज्यिक बैंक लोन लेता है। हालांकि रेपो रेट के आधार पर बैंक आरबीआई से शॉर्ट टर्म लोन लेता है।
अब ये समझते हैं कि ये आप कैसे असर करेगा।
Repo Rate Cut क्या करेगा असर?
अगर रेपो रेट में कटौती होती है, तो बैंकों को लोन कम ब्याज पर मिलेगा। फिर आपको भी कम ब्याज पर लोन उपलब्ध कराया जाएगा।
ऐसी ही अगर रेपो रेट में बढ़ोतरी आती है, तो बैंक को लोन लेना महंगा पड़ेगा। इससे आपका भी लोन ब्याज दर बढ़ेगा। ब्याज दर बढ़ने से आपकी ईएमआई भी बढ़ जाएगी।
हालांकि ये बैंकों पर भी निर्भर करता है कि रेपो रेट में कटौती के बाद वे फिक्स्ड ब्याज दर कम करना चाहती है या नहीं।
RBI रेपो रेट में क्यों बदलाव करती है?
देश की केंद्रीय बैंक यानी आरबीआई रेपो रेट में बदलाव कर मनी सप्लाई को नियंत्रित करने की कोशिश करती है। मनी सप्लाई में नियंत्रित कर, वे महंगाई को कम या ज्यादा करने का काम करती है। ऐसी ही ठीक सरकार भी अपने राजकोषीय नीति (Fiscal Policy) के जरिए नियंत्रित करने का काम करती है।
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