चपरासी से ये शख्स बना एशिया का 'शुगर किंग', ₹3000 के लोन से खड़ा किया 1.27 लाख करोड़ का साम्राज्य
रॉबर्ट कुओक, जिन्हें 'शुगर किंग' कहा जाता है, 102 साल की उम्र में मलेशिया के सबसे अमीर व्यक्ति हैं, जिनकी संपत्ति 13.6 बिलियन डॉलर है। एक साधारण 'ऑफिस ...और पढ़ें

102 साल की उम्र में, कुओक आज भी मलेशिया के सबसे अमीर व्यक्ति हैं।

समय कम है?
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नई दिल्ली। दुनिया में सफलता की कई कहानियां हैं, लेकिन मलेशिया के 'शुगर किंग' (Sugar King) कहे जाने वाले रॉबर्ट कुओक (Robert Kuok) की कहानी सबसे अलग और प्रेरणादायक है। 102 साल की उम्र में, कुओक आज भी मलेशिया के सबसे अमीर व्यक्ति हैं। फोर्ब्स की हालिया रैंकिंग के अनुसार, उनकी कुल संपत्ति लगभग 13.6 बिलियन डॉलर (करीब 1.27 लाख करोड़ रुपये) है। कभी एक 'ऑफिस बॉय' (चपरासी) के तौर पर काम करने वाले कुओक ने आज कमोडिटी, पाम ऑयल, शिपिंग, रियल एस्टेट और दुनिया भर में मशहूर 'शांगरी-ला' (Shangri-La) होटल्स का एक विशाल साम्राज्य खड़ा कर दिया है।
कैसे एक आम इंसान ने अपनी सूझबूझ और दूरदर्शिता से एशिया के सबसे बड़े व्यापारिक साम्राज्यों में से एक की नींव रखी, चलिए जानते हैं।
शुरुआती जीवन और मुश्किल दौर
रॉबर्ट कुओक का जन्म ब्रिटिश शासन के दौरान मलेशिया के जोहोर बाहरू में एक चीनी अप्रवासी परिवार में हुआ था। उनके पिता एक सफल चावल व्यापारी थे, लेकिन द्वितीय विश्व युद्ध (WWII) और आर्थिक मंदी के दौरान परिवार के कारोबार को भारी नुकसान उठाना पड़ा।
1948 में पिता के निधन के बाद, कुओक ने अपने करियर की शुरुआत बेहद साधारण तरीके से की। जापानी कब्जे वाले दौर में उन्होंने मित्सुबिशी (Mitsubishi) ट्रेडिंग फर्म के साथ एक 'ऑफिस बॉय' के रूप में काम किया। युद्ध के बाद, 1949 में उन्होंने अपने भाइयों और चचेरे भाइयों के साथ मिलकर 'कुओक ब्रदर्स' नाम से एक कंपनी शुरू की। बताया जाता है कि अपना खुद का व्यवसाय शुरू करने के लिए उन्होंने जोहोर के शाही परिवार से महज़ 3,000 डॉलर का एक छोटा सा लोन लिया था।
ऐसे बने एशिया के 'शुगर किंग'?
उनके जीवन का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट 1950 और 1960 के दशक में आया। 1959 में, कुओक ने जापानी निवेशकों और स्थानीय प्रभावशाली लोगों (नेताओं और शाही परिवार) के साथ मिलकर मलेशिया की पहली शुगर रिफाइनरी (चीनी मिल) स्थापित की।
असली मास्टरस्ट्रोक उन्होंने 1961 में खेला। दुनिया भर में चीनी की कीमतें बढ़ने से ठीक पहले, उन्होंने भारत से भारी मात्रा में सस्ती कच्ची चीनी खरीद ली। 1960 के दशक की शुरुआत तक, कुओक ने मलेशिया के 80 प्रतिशत चीनी बाजार पर कब्जा कर लिया था। वे हर साल 15 लाख टन चीनी का उत्पादन कर रहे थे, जो उस समय के कुल वैश्विक उत्पादन का लगभग 10 प्रतिशत था। इसी ऐतिहासिक सफलता ने उन्हें दुनिया भर में "एशिया का शुगर किंग" की उपाधि दिला दी।
कारोबार का विस्तार और 'शांगरी-ला' की नींव
कुओक सिर्फ चीनी तक सीमित नहीं रहे, उन्होंने अपने बिजनेस को तेजी अगल-अलग क्षेत्रों में बांटा। साल 1971 में उन्होंने सिंगापुर में अपना पहला 'शांगरी-ला होटल' (Shangri-La Hotel) खोला। आज यह दुनिया की सबसे बड़ी लक्जरी होटल चेन्स में से एक है, जिसके 100 से अधिक होटल्स दुनियाभर में मौजूद हैं।
उन्होंने मलेशिया और इंडोनेशिया में बड़े पैमाने पर कृषि व्यवसाय शुरू किया। 2007 में उन्होंने अपने प्लांटेशन और अनाज के बिजनेस का विलय 'विल्मार इंटरनेशनल' के साथ कर दिया, जो आज दुनिया की सबसे बड़ी पाम-ऑयल प्रोसेसर कंपनी है। 1974 में हांगकांग में 'कैरी ग्रुप' (Kerry Group) की स्थापना की। उन्होंने शिपिंग, रियल एस्टेट के साथ-साथ 1993 में प्रमुख अखबार 'साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट' में भी कंट्रोलिंग हिस्सेदारी खरीदी।

आज की स्थिति और विरासत
1993 में ही रोजमर्रा के मैनेजमेंट के काम से संन्यास ले चुके कुओक का विशाल साम्राज्य अब उनके परिवार (भतीजे और बेटी) द्वारा संभाला जा रहा है। 102 वर्ष की उम्र में भी रॉबर्ट कुओक मलेशिया के निर्विवाद नंबर 1 अरबपति बने हुए हैं। एक छोटे से व्यापारी से लेकर एशिया के सबसे बड़े बिजनेस टाइकून बनने की उनकी यह यात्रा साबित करती है कि अगर आपके पास दूरदृष्टि और कभी हार न मानने का जज्बा हो, तो कुछ भी हासिल किया जा सकता है।
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