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    वोडाफोन आइडिया को राहत देकर फंस गई सरकार! अब TATA और Airtel ने भी मांगी AGR में राहत; 67000 करोड़ की देनदारी

    Updated: Fri, 16 Jan 2026 12:53 PM (IST)

    एयरटेल और टाटा ग्रुप की कंपनियां भी वोडाफोन आइडिया की तरह AGR बकाया पर सरकार से राहत चाहती हैं। वोडाफोन आइडिया को 10 साल की मोहलत मिली है। एयरटेल पर ₹ ...और पढ़ें

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    TATA ग्रुप और Airtel को भी Vi की तरह चाहिए AGR में राहत, एक पर 48 तो दूसरे पर 19 हजार करोड़ की देनदारी

    नई दिल्ली। देश की दूसरी सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी एयरटेल और  टाटा ग्रुप की दो कंपनियों को भी एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू  बकाया पर सरकार से राहत चाहिए। दरअसल, वोडाफोन आइडिया (VI AGR Relief) को उसके AGR पेमेंट पर 10 साल की राहत मिली है। ऐसे में अब इन कंपनियों को भी AGR बकाया जमा करने में छूट चाहिए।

    इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, कंपनियों का मानना है कि अगर एक ऑपरेटर को राहत दी जाती है, तो दूसरों के साथ भी वैसा ही व्यवहार किया जाना चाहिए। वे सरकार के साथ मिलकर बातचीत करने पर विचार कर रही हैं और संभावित कानूनी कदमों पर भी विचार कर रही हैं।

    Airtel और टाटा की 2 कंपनियों पर कितना AGR?

    भारती एयरटेल और टाटा ग्रुप की दो कंपनियों, टाटा टेलीसर्विसेज (TTSL) और टाटा टेलीसर्विसेज महाराष्ट्र (TTML) पर हजारों करोड़ की देनदारी है।

    TTSL और TTML पर मिलाकर AGR का लगभग ₹19,259 करोड़ बकाया है, जबकि भारती एयरटेल पर लगभग ₹48,103 करोड़ बकाया है। उम्मीद थी कि ये कंपनियां इस साल मार्च से अपने AGR की रकम चुकाना शुरू कर देंगी।

    टेलीकम्युनिकेशन डिपार्टमेंट ने वोडाफोन आइडिया को अपने AGR बकाया चुकाने के लिए 10 साल का समय दिया है। इसका कुल बकाया लगभग ₹87,695 करोड़ है, जिसे 2035 तक के लिए रोक दिया गया है।

    सितंबर 2021 में, सरकार ने टेलीकॉम कंपनियों को FY26 तक, चार साल के लिए AGR पेमेंट में देरी करने की इजाजत दी थी। इस दौरान, कंपनियों को तुरंत पेमेंट नहीं करना था, लेकिन ब्याज जुड़ता रहा। इसका मकसद उन्हें आर्थिक रूप से उबरने के लिए समय देना था। लेकिन अब यह समय खत्म होने वाला है। 
    ऐसे में वोडाफोन को तो राहत मिल गई है, लेकिन अन्य कंपनियों को नहीं। इसलिए दूसरी कंपनियां भी AGR में राहत चाहती हैं।

    दूसरे टेलीकॉम आपरेटर ने दिया ये तर्क

    ऑपरेटर्स का तर्क है कि अगर उन्हें भी ऐसी ही राहत नहीं मिलती है, तो इससे उन्हें नुकसान हो सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, इंडस्ट्री के अधिकारियों ने कहा कि सिर्फ एक कंपनी को राहत देने से कॉम्पिटिशन पर असर पड़ सकता है और दूसरों पर दबाव बन सकता है।

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