₹15000000000000, इतिहास का सबसे बड़ा रिफंड लौटा रही ट्रंप सरकार; भारत के हिस्से टैरिफ की कुल कितनी रकम आएगी?
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में टैरिफ के मुद्दे पर हार के बाद अब डोनल्ड ट्रंप प्रशासन $166 बिलियन की रकम रिफंड कर रही है। GTRI की रिपोर्ट के अनुसार, भारत को ...और पढ़ें
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अमेरिका में टैरिफ रिफंड प्रोसेस शुरू (सांकेतिक तस्वीर)
नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने पिछले साल मनमाने तरीके से दुनियाभर के कई देशों पर भारी-भरकम टैरिफ (Trump Tarrifs) लगाए थे, लेकिन यूएस सुप्रीम कोर्ट में हार मिलने के बाद अब टैरिफ के नाम पर वसूली गई रकम लौटानी पड़ रही है। दरअसल, अमेरिका में 166 अरब डॉलर (15 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा) की टैरिफ रिफंड प्रोसेस शुरू हो गई है, लेकिन भारत को इससे मिलने वाला वित्तीय लाभ निश्चित नहीं है और यह काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगा कि निर्यातक अमेरिकी खरीदारों के साथ किस तरह बातचीत करते हैं। भारतीय व्यापारिक संगठन GTRI की एक रिपोर्ट में यह कहा गया है।
अमेरिकी कस्टम एंड बॉर्डर सिक्योरिटी द्वारा संचालित एक नए डिजिटल प्लेटफॉर्म, CAPE (कंसोलिडेटेड एडमिनिस्ट्रेशन एंड प्रोसेसिंग ऑफ एंट्रीज) के माध्यम से 20 अप्रैल से रिफंड के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू हो गई है। यह प्रोसेस अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय के 20 फरवरी, 2026 के फैसले के बाद आया है, जिसमें डोनल्ड ट्रम्प के राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान लगाए गए टैरिफ को रद्द कर दिया था।
10-12 अरब डॉलर का रिफंड
GTRI की रिपोर्ट के अनुसार, अनुमान है कि कुल रिफंड में से लगभग 10-12 अरब डॉलर भारत से आयातित वस्तुओं से संबंधित हैं। हालांकि, रिफंड व्यवस्था की संरचना भारतीय कंपनियों के लिए प्रत्यक्ष लाभ को सीमित करती है। केवल अमेरिका स्थित आयातक जिन्होंने टैरिफ का भुगतान किया है, वे ही क्लेम फाइल करने के पात्र हैं, जिससे निर्यातकों के पास इन धनराशि को स्वयं वापस पाने का कोई कानूनी रास्ता नहीं बचता है।
हालांकि, रिफंड में ब्याज शामिल होगा और इसके 60 से 90 दिनों के भीतर प्रोसेस होने की उम्मीद है, लेकिन भारतीय कंपनियों को मिलने वाला कोई भी लाभ पूरी तरह से व्यावसायिक समझौतों पर निर्भर करेगा।
इस थिंक टैंक ने कहा, “रिफंड पाने के लिए अमेरिकी आयातकों को शिपमेंट डेटा, टैरिफ लाइन और भुगतान के प्रमाण सहित विस्तृत दावे दाखिल करने होंगे। ब्याज सहित स्वीकृत दावों का भुगतान 60-90 दिनों के भीतर होने की उम्मीद है। केवल वे लोग जिन्होंने टैरिफ का भुगतान किया है - मुख्य रूप से अमेरिकी आयातक और कंपनियां ही रिफंड का दावा कर सकते हैं।”
किस सेक्टर निर्यात में क्या योगदान
GTRI की रिपोर्ट के अनुसार, भारत के अमेरिका को होने वाले निर्यात का आधे से अधिक हिस्सा (लगभग 53%) प्रभावित हुआ, विशेष रूप से कपड़ा और परिधान जैसे श्रम-प्रधान उद्योगों में। इन क्षेत्रों से भारत से संबंधित रिफंड में लगभग 4 अरब डॉलर का योगदान होने की उम्मीद है।
इंजीनियरिंग सामान का योगदान भी लगभग इतना ही हो सकता है, जबकि रसायनों का योगदान लगभग 2 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है, अन्य श्रेणियों में इसका हिस्सा कम रहेगा।
लेकिन निर्यातकों के लिए सीधे दावे का कोई रास्ता न होने से स्थिति और भी जटिल हो जाती है। भुगतान केवल अमेरिकी आयातकों को ही मिलेगा, जिसका मतलब है कि भारतीय कंपनियों को रिफंड किए गए शुल्क का कोई भी हिस्सा पाने के लिए बातचीत पर निर्भर रहना होगा।
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