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    इस डिजिटल युग में क्या है म्यूचुअल फंड में निवेश का नया तरीका?

    By Jagran BusinessEdited By: Chandrashekhar Gupta
    Updated: Mon, 23 Mar 2026 04:33 PM (IST)

    निलेश डी. नाईक (PhonePe Wealth) ने म्यूचुअल फंड निवेश की बारीकियों के बारे में बताया है। उन्होंने कहा कि कैसे पिछले 5-6 सालों में निवेशकों में जागरूकत ...और पढ़ें

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    नई दिल्ली। आज हमारे सामने ढेरों म्यूचुअल फंड हैं, लेकिन उनमें से कौन सा सही है, निवेशक समझ नहीं पाता है। वह इस डिजिटल युग में सरल तरीके से म्यूचुअल फंड के बारे में जानना चाहता है। निलेश डी. नाईक (हेड ऑफ इन्वेस्टमेंट प्रोडक्ट्स, Share.Market - PhonePe Wealth) ने निवेश के इसी बारीकियों को डिकोड किया है। उन्होंने छोटे शहरों और कस्बों में रहने वाले रिटेल इन्वेस्टर्स के लिए कुछ महत्त्वपूर्ण इनसाइट दिए हैं। इस इंटरव्यू को जागरण न्यू मीडिया की कंसल्टिंग एडिटर गीतू मोजा ने मॉडरेट किया है। पढ़ें इंटरव्यू के कुछ अंश।

    क्या निवेशकों की सोच में व्यवहारिक बदलाव आया है। क्या वो जागरूक हो चुके हैं। आपको क्या लगता है?

    मैं कहूंगा कि म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री का अच्छा समय आ गया है। पिछले 5-6 सालों में AMC, डिस्ट्रीब्यूटर्स, एडवाइजर और मीडिया हाउस जैसे इंडस्ट्री स्टेकहोल्डर्स ने लोगों में म्यूचुअल फंड के बारे में जागरूकता फैलाई है और उन्हें शिक्षित किया है। इस दौरान स्टॉक मार्केट ने भी अच्छा प्रदर्शन किया है। लेकिन यहां प्रोडक्ट मेरिट पर भी बात होनी चाहिए यानी म्यूचुअल फंड प्रोडक्ट पर जो वादा किया गया था, वो भी डिलिवर हुआ है। इसके अलावा, आसान एक्सेस ने भी नए निवेशकों को म्यूचुअल फंड में निवेश करने के लिए प्रेरित किया है। यह इंडस्ट्री के लिए अच्छा समय है। मुझे लगता है कि यह अगले 10-20 साल तक बना रहेगा।

    पूरा इंटरव्यू देखने के लिए एपिसोड 1 पर क्लिक करें

    कुछ साल पहले तक निवेशक मार्केट डाउन पर पैनिक हो जाते थे और अपना निवेश रोक देते थे। लेकिन आज के निवेशक SIP में ज्यादा मैच्योरिटी दिखा रहे हैं?

    पिछले 10-15 सालों में SIP का ट्रेंड बदला है और पिछले 6-7 वर्षों में इसमें जबरदस्त मोमेंटम देखा गया है। दरअसल, SIP की शुरुआत निवेशकों की उस मानसिकता को बदलने के लिए हुई, जहां वे बढ़ते बाजार के साथ निवेश करते है और गिरते बाजार के साथ बाहर निकल जाते थे। SIP ने इस अस्थिरता को खत्म करने का काम किया है। इसलिए अगर कोई मंथली SIP कर रहा है, तो वह सही काम कर रहा है। यह टाइमिंग रिस्क को कम करता है। इसके अलावा आंकड़ों में SIP ने Lumpsum के मुकाबले अच्छा प्रदर्शन किया है। इसमें वॉरेन बफे का एक अच्छा कोट है, “जब दूसरे डरे हुए हैं तो लालची बनो और जब दूसरे लालची हैं तो डरो।" जहां भीड़ जा रही है और आप वहीं जा रहे हैं तो आप हमेशा गलत काम करेंगे और गलत समय पर इन्वेस्ट करेंगे। इस स्थिति से उबरने के लिए आपको SIP जरूर करना चाहिए।

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    सीनियर सिटीजंस की सोच में बदलाव आया है। आज वह FD के अलावा निवेश के दूसरे विकल्पों को अपना रहे हैं, जैसे म्यूचुअल फंड। आप इस बदलते ट्रेंड को कैसे देखते हैं।

    “म्यूचुअल फंड सही है" इसका मतलब यह हुआ कि म्यूचुअल फंड न केवल नए और युवा लोगों के लिए, बल्कि रिटायरमेंट ले चुके सीनियर सिटीजंस के लिए भी सही है। बस जरूरी है कि फंड एलोकेशन पर पूरा कंट्रोल हो, खासकर इक्विटी पर। रिटायरमेंट के बाद आप लंबे समय के लिए निवेश तो कर सकते हैं, लेकिन इसमें 70-80% इक्विटी एक्सपोजर रखना जोखिम भरा हो सकता है। यहां, मैं सीनियर सिटीजंस के बारे में कहूंगा कि वह SWP (सिस्टमैटिक विड्रॉल प्लान) कर सकते हैं, जो एक टैक्स एफिशिएंट तरीका है। सीनियर सिटीजंस को ऐसे प्रोडक्ट्स के बारे में ज्यादा से ज्यादा जागरूक करना चाहिए।

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    निवेशकों को बेहतर अनुभव देने और उनके निवेश की यात्रा को आसान बनाने के लिए PhonePe Wealth क्या कर रहा है?

    हाल ही में हमने एक बहुत ही दिलचस्प टूल लॉन्च किया है, जिसे हमने CRISP का नाम दिया है। CRISP का फुल फॉर्म है-कंसिस्टेंसी, रिस्क एंड इन्वेस्टमेंट स्टाइल ऑफ पोर्टफोलियो। कंसिस्टेंसी में हम निवेशकों को एक सिंपल मेट्रिक देते हैं जो यह बताता है कि फंड कंसिस्टेंसी में हाई, मीडियम या लो है। उसी तरह रिस्क में हम बताते हैं कि कौन सा फंड ज्यादा रिस्क ले रहा है, जिसमें हम निवेशकों को इससे बचने की सलाह देते हैं। अंतिम और सबसे दिलचस्प पहलू है इन्वेस्टमेंट स्टाइल ऑफ पोर्टफोलियो, जो फंड का प्रेडोमिनेंट इनवेस्टमेंट स्टाइल को दर्शाता है, जैसे कि वैल्यू, क्वालिटी और मोमेंटम।

    हमने देखा है कि ट्रेंड बदल गया है। अब यंग इन्वेस्टर्स पहली जॉब लगने के बाद इन्वेस्ट करने के बारे में सोचते हैं। आप ऐसे इन्वेस्टर्स को क्या सलाह देंगे?

    निवेश में कोई प्रोडक्ट ‘सही' या ‘गलत' नहीं होता, बल्कि यह निवेशक की रिस्क प्रोफाइल, वित्तीय समझ और उद्देश्यों पर निर्भर करता है। फिर भी, शुरुआती निवेशकों के लिए म्यूचुअल फंड ही निवेश की शुरुआत करने का सबसे बेहतरीन विकल्प माना गया है। म्यूचुअल फंड में आपका पैसा कई सारे स्टॉक में लगता है। जैसे अगर आप इक्विटी फंड में ₹100 का निवेश करते हैं, तो आपका पैसा 60-70 स्टॉक्स में इन्वेस्ट होगा। यह एक बड़ा फायदा है। इसके अलावा म्यूचुअल फंड में कड़े नियम लागू होते हैं, जहां SEBI निवेशकों के हितों की रक्षा करता है और फंड की ट्रांसपेरेंसी देखी जाती है। इसमें निवेशकों को पता होता है कि उनका पैसा कहां और कैसे निवेश किया जा रहा है।

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     गोल्ड और सिल्वर की कीमतों में उछाल की वजह से आए FOMO को रिटेल निवेशक कैसे मैनेज करे।

    ऐसे कई मामले हैं, जहां लोगों ने इक्विटी म्यूचुअल फंड से पैसा निकालकर सोने और चांदी में इन्वेस्ट किया है। दरअसल, FOMO के व्यवहार की वजह से निवेशकों इन्वेस्टमेंट जर्नी में नुकसान बहुत ज्यादा होता है। इससे निपटने के लिए म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री को आगे आना पड़ेगा। निवेशकों में जागरूकता बढ़ाना, उन्हें सही विकल्प देना और उनके पोर्टफोलियो की प्लानिंग में मदद करना अब प्राथमिकता होनी चाहिए। चूंकि, इंडस्ट्री अभी ग्रोथ फेज के शुरुआती दौर में है, इसलिए यह सक्रियता दिखाने का बिल्कुल सही समय है।

    आप हमें अपने डेली SIP ऑफर के बारे में बताएं। ₹10 के डेली निवेश की सुविधा के पीछे की क्या सोच है?

    जब हम डेली SIP का फीचर लॉन्च कर रहे थे, तो हमारे मन में कई सवाल थे—जैसे कि ‘कोई रोजाना निवेश क्यों करेगा?' हालांकि, बाजार के पुराने अनुभवों को देखते हुए हमने यह कदम उठाया। मुझे यह बताते हुए खुशी और हैरानी है कि हमें उम्मीद से कहीं बेहतर रिस्पॉन्स मिला है।

    व्यावहारिक रूप से देखें तो, सब्जी बेचने या दुकान लगाने वाले छोटे व्यापारियों के लिए हर महीने एक साथ ₹2000 निवेश करना चुनौतीपूर्ण होता है। इसके विपरीत, डेली ₹10 से ₹50 तक की छोटी बचत उनके डेली कैश फ्लो के अनुकूल होती है, जिससे निवेश उनके लिए बोझ नहीं, बल्कि एक आदत बन जाता है। यही वजह है कि हमने डेली SIP में जबरदस्त सफलता देखी है। यह छोटे मर्चेंट के लिए अपने निवेश की यात्रा शुरू करने का एक अच्छा प्रोडक्ट है।

    पूरा इंटरव्यू देखने के लिए एपिसोड 2 पर क्लिक करें