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    Budget 2026: टैक्स रिजीम, HRA से 80C डिडक्शन तक, इनकम टैक्स एक्ट में होने जा रहे बड़े बदलाव; क्या-क्या बदल जाएगा?

    Updated: Mon, 19 Jan 2026 05:54 PM (IST)

    New Income Tax Act India: बजट 2026 से पहले, इनकम टैक्स एक्ट, 1961 की जगह 1 अप्रैल 2026 से नया इनकम टैक्स एक्ट, 2025 लागू होगा। सरकार सीधे नए एक्ट में ...और पढ़ें

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    Budget 2026: टैक्स रिजीम, HRA से 80C डिडक्शन तक, इनकम टैक्स एक्ट में होने जा रहे बड़े बदलाव; क्या-क्या बदल जाएगा?

    स्मार्ट व्यू- पूरी खबर, कम शब्दों में

    New Income Tax Act India: बजट 2026 से ठीक पहले इनकम टैक्स से जुड़े कानूनों में एक ऐसा बदलाव (Budget 2026 income tax changes) होने जा रहा है, जो आम टैक्सपेयर्स से लेकर सैलरी क्लास तक को सीधे प्रभावित करेगा। इस बार सरकार इनकम टैक्स एक्ट, 1961 में नहीं (Income Tax Act 1961 repeal), बल्कि नए इनकम टैक्स एक्ट, 2025 में संशोधन करने जा रही है। अब सवाल यह है कि आखिर जब पुराना कानून दशकों से लागू है, तो अचानक यह बदलाव क्यों और इसका असर किस-किस पर पड़ेगा?

    दरअसल, 1 अप्रैल 2026 (New tax law April 2026) से इनकम टैक्स एक्ट, 1961 को पूरी तरह खत्म (Repeal) किया जाना तय है। उसकी जगह नया और सरल बताया जा रहा इनकम टैक्स एक्ट, 2025 लागू होगा। यह नया कानून अगस्त 2025 में राष्ट्रपति की मंजूरी भी पा चुका है, लेकिन अभी ऑपरेशनल नहीं हुआ है। ऐसे में बजट 2026 के जरिए सरकार ऐसे कानून में बदलाव नहीं कर सकती, जो कुछ ही दिनों में खत्म होने वाला है। यही वजह है कि टैक्स से जुड़े सभी जरूरी संशोधन सीधे 2025 एक्ट में किए जाएंगे।

    1961 से 2025: सेक्शन की जगह शेड्यूल सिस्टम

    नए इनकम टैक्स एक्ट, 2025 में सबसे बड़ा बदलाव स्ट्रक्चर का है। अब तक टैक्स छूट और डिडक्शन अलग-अलग सेक्शन में मिलते थे- जैसे 80C, 80D, HRA, LTA (LTA under Income Tax Act 2025) वगैरह। लेकिन 2025 एक्ट में इन सबको शेड्यूल सिस्टम में शिफ्ट किया गया है।

    उदाहरण के तौर पर, टैक्स सेविंग निवेश और NPS, मेडिक्लेम जैसी कटौतियां अब शेड्यूल XV (NPS and mediclaim schedule XV) में दी गई हैं, जिन्हें अलग-अलग सेक्शन के जरिए लागू किया जाएगा। इसका मकसद है कानून को आसान बनाना (Income tax simplification India) और भविष्य में बदलाव आसान करना।

    HRA, LTA और अलाउंस का नया ढांचा

    हाउस रेंट अलाउंस (HRA) और लीव ट्रैवल अलाउंस (LTA) जैसी छूटें पहले की तरह मिलेंगी, लेकिन इनके नियम अब शेड्यूल III में दर्ज होंगे। यानी कॉन्सेप्ट वही रहेगा, लेकिन नियमों को सेक्शन से हटाकर शेड्यूल और रूल्स के जरिए लागू किया जाएगा। ऑफिशियल ड्यूटी और पर्सनल खर्च से जुड़े स्पेशल अलाउंस भी इसी शेड्यूल सिस्टम के तहत आएंगे। इससे सरकार को जरूरत पड़ने पर नियम बदलने की ज्यादा आजादी मिलेगी।

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    होम लोन ब्याज और नया टैक्स रिजीम

    खुद के मकान पर होम लोन के ब्याज पर मिलने वाली राहत को नए कानून में और साफ शब्दों में परिभाषित किया गया है। यानी डिडक्शन रहेगा, लेकिन शर्तें ज्यादा स्पष्ट होंगी। वहीं नया टैक्स रिजीम, जो अभी सेक्शन 115BAC के तहत है, 2025 एक्ट में नए सेक्शन के साथ जारी रहेगा। इसकी बनावट लगभग वही रहेगी, लेकिन इसे नए कानून के अनुरूप ढाला जाएगा।

    रिबेट की व्यवस्था भी बदल गई?

    नए कानून के तहत रिबेट की व्यवस्था भी बदली गई है। नए टैक्स रिजीम में ₹12 लाख तक और पुराने रिजीम में ₹5 लाख तक की आय पर रिबेट का प्रावधान रखा गया है। इससे मिडिल क्लास टैक्सपेयर्स को सीधा फायदा मिलेगा।

    बजट 2026 का असली मैसेज

    बजट 2026 यह साफ कर देगा कि सरकार टैक्स सिस्टम को लंबे समय के लिए सरल, स्थिर और कम विवाद वाला बनाना चाहती है। 1961 के कानून में पाबंदी लगाने की बजाय 2025 के नए ढांचे में बदलाव करना इसी रणनीति का हिस्सा है।

    टैक्सपेयर्स के लिए साफ संकेत है कि नाम बदला है, ढांचा बदला है। लेकिन ज्यादातर छूट और फायदे फिलहाल बने रहेंगे। फर्क बस इतना है कि अब इनकम टैक्स का खेल नए नियमों और नए शेड्यूल के साथ खेला जाएगा।