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    Budget 2026 में मैन्युफैक्चरिंग पर बड़ा दांव: सेमीकंडक्टर से टेक्सटाइल तक, किन सेक्टरों को मिली ताकत?

    Updated: Sun, 01 Feb 2026 07:34 PM (IST)

    Budget 2026: बजट 2026 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को भारत की औद्योगिक रणनीति का केंद्र बनाया है। बायोफार्मा, सेमीकंडक्ट ...और पढ़ें

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    Budget 2026 में मैन्युफैक्चरिंग पर बड़ा दांव: सेमीकंडक्टर से टेक्सटाइल तक, किन सेक्टरों को मिली ताकत?

    स्मार्ट व्यू- पूरी खबर, कम शब्दों में

    नई दिल्ली| वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026 (Budget 2026) में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को भारत की औद्योगिक रणनीति के केंद्र में रखा। सरकार ने बायोफार्मा, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, रेयर अर्थ, टेक्सटाइल, स्पोर्ट्स गुड्स और भारी उद्योग जैसे सात रणनीतिक सेक्टरों में बड़े कदमों की घोषणा की है। टैक्स रियायत, कस्टम ड्यूटी में कटौती और लॉजिस्टिक्स सुधारों के जरिए घरेलू उत्पादन बढ़ाने और आयात पर निर्भरता घटाने का साफ संकेत है। अब सवाल यह है कि आखिर मैन्युक्चरिंग के किस सेक्टर को क्या-क्या मिला? चलिए सिर्फ 10 पॉइंट में समझते हैं।

    मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर से जुड़े 10 बड़े एलान

    1. Biopharma SHAKTI : ₹10000 करोड़ का प्लान

    सरकार ने बायोफार्मा 'शक्ति' (Biopharma SHAKTI) योजना शुरू की है। पांच साल में ₹10,000 करोड़ खर्च कर भारत को बायोलॉजिक्स और बायोसिमिलर दवाओं का ग्लोबल हब बनाने का लक्ष्य है। तीन नए NIPER संस्थान, सात पुराने अपग्रेड, 1,000+ क्लीनिकल ट्रायल साइट्स और दवा नियामक सिस्टम को मजबूत किया जाएगा।

    2. सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 में क्या खास?

    इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (India Semiconductor Mission) के अगले चरण में सिर्फ चिप फैब नहीं, बल्कि मशीनरी, मटेरियल, सप्लाई चेन और भारतीय IP पर फोकस होगा। इससे आयात घटेगा और भारत ग्लोबल चिप वैल्यू चेन में ऊपर जाएगा।

    3. इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स के लिए ₹40000 करोड़

    इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम का बजट ₹22,919 करोड़ से बढ़ाकर ₹40,000 करोड़ किया गया। मकसद- सिर्फ असेंबली नहीं, बल्कि पार्ट्स का निर्माण भारत में हो।

    यह भी पढ़ें- Budget 2026: ITR की नई डेट, लेट फीस से लेकर TDS-TCS में बदलाव तक, आम टैक्सपेयर्स के लिए 15 सवालों में पूरी डिटेल

    4. रेयर अर्थ कॉरिडोर को किया मिला?

    ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और केरल में रेयर अर्थ मटेरियल कॉरिडोर बनेंगे। इससे EV, रिन्यूएबल एनर्जी और डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग को जरूरी कच्चा माल देश में मिलेगा।

    5. केमिकल, कैपिटल गुड्स और भारी उद्योग

    तीन नए केमिकल पार्क, हाई-टेक टूल रूम और इंफ्रास्ट्रक्चर मशीनरी के लिए अलग स्कीम। कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग के लिए ₹10,000 करोड़, लॉजिस्टिक्स मजबूत होगा।

    6. टेक्सटाइल सेक्टर का आधुनिकीकरण

    फाइबर आत्मनिर्भरता, हैंडलूम-हैंडीक्राफ्ट सपोर्ट, मेगा टेक्सटाइल पार्क और स्किल ट्रेनिंग। खादी और गांव उद्योगों को ब्रांडिंग और ग्लोबल मार्केट से जोड़ने की योजना।

    7. स्पोर्ट्स गुड्स मैन्युफैक्चरिंग

    नई R&D स्कीम से भारत स्पोर्ट्स इक्विपमेंट का ग्लोबल सप्लायर बनने की दिशा में बढ़ेगा।

    8. एक्सपोर्ट और टोल मैन्युफैक्चरिंग पर टैक्स राहत

    बॉन्डेड जोन में मैन्युफैक्चरिंग करने वाले विदेशी सप्लायरों को 5 साल की टैक्स छूट। एक्सपोर्ट टाइमलाइन बढ़ी, कुछ इनपुट्स ड्यूटी-फ्री।

    9. कस्टम ड्यूटी में बड़ी कटौती

    लिथियम बैटरी, एयरक्राफ्ट पार्ट्स, डिफेंस MRO, सोलर ग्लास के कच्चे माल समेत कई आइटम पर बेसिक कस्टम ड्यूटी शून्य की गई।

    10. SEZ और एविएशन मैन्युफैक्चरिंग

    SEZ यूनिट्स को घरेलू बाजार में रियायती ड्यूटी पर बिक्री की छूट। सी-प्लेन मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा।

    क्या है एक्सपर्ट्स की राय?

    लावा इंटरनेशनल लिमिटेड के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर एंड चीफ मैन्युफैक्चरिंग ऑफिसर संजीव अग्रवाल ने बताया कि, "इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट स्कीम का ₹40,000 करोड़ तक बढ़ना बड़ा कदम है। लेकिन असली असर तभी दिखेगा जब इंफ्रास्ट्रक्चर और स्कीम लागू करने की रफ्तार तेज होगी।" यानी यह साफ है कि भारत अब सिर्फ बाजार ही नहीं, बल्कि ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग पावरहाउस बनने की तैयारी में है।