Budget 2026: इनकम टैक्स में छूट नहीं, अब कर कानून के मोर्चे पर राहत देने की तैयारी में सरकार, सूत्रों ने दी बड़ी जानकारी
बजट 2026 में आयकर दरों में बड़ी राहत की संभावना कम है। हालांकि, सरकार आयकर कानून के मोर्चे पर बदलाव कर सकती है। एक रिपोर्ट के अनुसार, नए इनकम टैक्स एक ...और पढ़ें

बजट 2026 में इनकम टैक्स के मोर्चे पर राहत की उम्मीद नहीं है।
नई दिल्ली। 1 फरवरी को पेश होने वाले आम बजट 2026 में इनकम टैक्स के मोर्चे (Income Tax) पर बड़ी राहत या बदलाव होने की संभावना नहीं है। क्योंकि, सरकार पिछले बजट में ही 12 लाख रुपये की आय को टैक्स फ्री कर चुकी है। इसके अलावा, सरकार ने जीएसटी की दरों में भी कटौती कर लोगों को राहत दी है। लेकिन, सरकार इनकम टैक्स कानून के मोर्चे पर कुछ राहत दे सकती है।
मिंट की एक रिपोर्ट के अनुसार, बजट में टैक्सपेयर्स के लिए सबसे महत्वपूर्ण बदलाव इनकम टैक्स के नए नियमों के ज़रिए आने की उम्मीद है, जो यह तय करेंगे कि नया इनकम टैक्स एक्ट, 2025, असल में कैसे काम करेगा? इस घटनाक्रम की जानकारी रखने वाले दो लोगों ने इसकी जानकारी दी है।
इनकम टैक्स कानून को लेकर क्या अहम एलान संभव
इन लोगों ने नाम नहीं बताने की शर्त पर बताया कि FY27 के बजट के हिस्से के तौर पर संसद में पेश होने वाले फाइनेंस बिल, 2026 में सिर्फ़ ज़रूरी इनकम-टैक्स प्रस्ताव हो सकते हैं, इनमें:
हर साल के लिए टैक्स रेट नोटिफ़ाई करना और 1 अप्रैल से नए इनकम टैक्स सिस्टम में बदलाव की रूपरेखा बताना।
नए सिस्टम की रूपरेखा सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज (CBDT) द्वारा जल्द ही जारी किए जाने वाले नियमों से तय होगी।
ये नियम इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि ये टैक्सपेयर्स के अधिकारों, सिस्टम में निष्पक्षता, कंप्लायंस के बोझ और प्रोसेस से जुड़े उल्लंघन व टैक्स चोरी के बीच अंतर को आकार देंगे।
इन बदलावों से क्या फायदे होंगे
रेगुलेटरी फ्रेमवर्क इन नियमों पर निर्भर करेगा, क्योंकि उम्मीद है कि ये नियम फेसलेस असेसमेंट के तहत संवेदनशील प्रक्रियाओं को कवर करेंगे, अधिकारियों के ज़्यादा अधिकार के खिलाफ सुरक्षा देंगे, मुकदमा शुरू करने के लिए प्रोसेस तय करेंगे और नए सिस्टम में बदलाव के बारे में गाइडेंस देंगे।
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इनकम टैक्स एक्ट, 2025 के तहत नियम और भी ज़्यादा महत्वपूर्ण हो गए हैं क्योंकि नए कानून को काफी छोटा कर दिया गया है - इसे आसान और ज़्यादा पढ़ने लायक बनाने की कोशिश में, इसमें 1961 के एक्ट की तुलना में चैप्टर और शब्दों की संख्या लगभग आधी कर दी गई है।
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